—Advertisement—

इंदौर का 175 करोड़ का प्रदेश का पहला डबलडेकर ब्रिज: 800 टन की बो-स्ट्रिंग लॉन्च, जल्द खुलेगा यातायात – जानिए 5 बड़ी बातें

Author Picture
Published On: 23 March 2026
00000013 300x142 1

—Advertisement—

इंदौर के लवकुश चौराहे पर बन रहे प्रदेश के पहले डबलडेकर ब्रिज की 800 टन वजनी बो-स्ट्रिंग को दूसरे सिरे से जोड़ने का काम शुरू हो गया है। 175 करोड़ की लागत वाले इस ऐतिहासिक पुल के बारे में सभी अपडेट यहां पढ़ें।

इंदौर का डबलडेकर ब्रिज: 800 टन की बो-स्ट्रिंग लॉन्च, सिंहस्थ से पहले खुलने की उम्मीद

इंदौर। मध्य प्रदेश के पहले डबलडेकर ब्रिज के निर्माण ने एक और ऐतिहासिक चरण में प्रवेश कर लिया है। इंदौर के लवकुश चौराहे पर बन रहे इस अत्याधुनिक पुल की 800 टन वजनी बो-स्ट्रिंग को दूसरे सिरे से जोड़ने का काम सोमवार को तेजी से शुरू हो गया। रविवार रात को ट्रैफिक डायवर्ट कर इस विशाल स्टील संरचना को लॉन्च करने का प्रयास किया गया, जो अब पूरा होने की ओर है।

175 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा यह ब्रिज न सिर्फ प्रदेश का पहला डबलडेकर ब्रिज है, बल्कि ऊंचाई के मामले में भी सबसे खास है। जमीन की सतह से इसकी ऊंचाई 65 मीटर (लगभग 20 मंजिला इमारत) से अधिक है। एक किलोमीटर से ज्यादा लंबे इस पुल का 85 प्रतिशत से अधिक काम पूरा हो चुका है और अब अंतिम चरण में मध्य भाग को जोड़ा जा रहा है।

विशालकाय क्रेनों की मदद से हो रहा निर्माण

इतनी ऊंचाई पर इतने भारी ढांचे को स्थापित करना अपने आप में एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। निर्माण एजेंसी ने इसके लिए विशालकाय क्रेनों का सहारा लिया है। रविवार रात को जब इस बो-स्ट्रिंग को लॉन्च करने की कवायद शुरू हुई, तो इंदौर-सांवेर रोड का ट्रैफिक डायवर्ट कर दिया गया था। दोनों तरफ लगाई गईं इन विशाल क्रेनों ने मध्य हिस्से को धीरे-धीरे आगे खिसकाना शुरू किया।

इस प्रक्रिया के दौरान दो-तीन मीटर का हिस्सा सफलतापूर्वक खिसकाने के बाद काम को सुरक्षा कारणों से रोक दिया गया था। सोमवार सुबह से फिर से इस कार्य को शुरू कर दिया गया है। इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA) के अधिकारी स्वयं मौके पर मौजूद हैं और पूरी प्रक्रिया पर नजर बनाए हुए हैं। इस डबलडेकर ब्रिज की बो-स्ट्रिंग चंडीगढ़ से बनकर तैयार आई है, जिसे अब मध्य हिस्से में फिट किया जा रहा है।

प्रदेश का पहला और सबसे ऊंचा डबलडेकर ब्रिज

यह पुल अपने आप में एक इंजीनियरिंग चमत्कार है। आमतौर पर शहरों में बनने वाले फ्लाईओवर या पुलों से यह कई मायनों में अलग है। सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह प्रदेश का पहला डबलडेकर ब्रिज है, यानी इस पर दो स्तरों (डेक) पर यातायात चलेगा। ऊपरी डेक पर वाहनों की आवाजाही होगी, जबकि निचले डेक पर मेट्रो का ट्रैक बिछाया जा रहा है।

इसकी ऊंचाई 65 मीटर से अधिक है, जो इसे प्रदेश का सबसे ऊंचा पुल बनाती है। यह ऊंचाई इसलिए जरूरी है क्योंकि इसके नीचे से रेलवे लाइन और अन्य महत्वपूर्ण मार्ग गुजरते हैं। पुल की कुल लंबाई एक किलोमीटर से अधिक है, जो इसे एक प्रमुख शहरी कनेक्टिविटी परियोजना बनाती है। इस पुल के बनने से लवकुश चौराहा और आसपास के इलाकों में जाम की समस्या से काफी हद तक निजात मिल जाएगी।

सिंहस्थ और शहर के लिए रणनीतिक महत्व

इस पुल का निर्माण केवल इंदौर शहर के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। इसके निर्माण का सबसे ज्यादा फायदा ढाई साल बाद उज्जैन में लगने वाले सिंहस्थ मेले के दौरान देखने को मिलेगा। सिंहस्थ मेला देश का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन होता है, जिसमें करोड़ों श्रद्धालु शामिल होते हैं।

उज्जैन की ओर जाने वाला सबसे अधिक यातायात इंदौर से होकर ही गुजरता है। इस डबलडेकर ब्रिज के समय पर खुल जाने से इंदौर-उज्जैन मार्ग पर यातायात का दबाव काफी कम हो जाएगा। इससे श्रद्धालुओं को सुगम यात्रा मिल सकेगी और जाम की स्थिति से निपटने में प्रशासन को भी मदद मिलेगी।

तकनीकी चुनौतियां और सुरक्षा मानक

800 टन वजनी इस बो-स्ट्रिंग को स्थापित करना एक जोखिम भरा कार्य है। चूंकि पुल के मध्य हिस्से में मेट्रो का ट्रैक भी है, इसलिए निर्माण एजेंसी और इंदौर मेट्रो प्रोजेक्ट की टीमें मिलकर यह सुनिश्चित कर रही हैं कि किसी भी प्रकार की कोई अनहोनी न हो। विशेष सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा है और हर गतिविधि पर बारीकी से नजर रखी जा रही है।पुल के दोनों लेन पर 400-400 टन की बो-स्ट्रिंग लगाई जाएगी। एक बार जब यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी, तो इस पर ट्रैक बिछाने का काम शुरू होगा। फिर यातायात के लिए पुल को खोल दिया जाएगा। इंजीनियरों का मानना है कि एक बार मध्य हिस्सा जुड़ जाने के बाद, बाकी का काम तेजी से पूरा किया जा सकता है।

निर्माण में देरी और अब उम्मीद

इस पुल का निर्माण फरवरी 2023 तक पूरा हो जाना था, लेकिन कई तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से काम की गति धीमी रही, जिसके चलते परियोजना में देरी हुई। हालांकि, अब निर्माण एजेंसी ने कमर कस ली है। 85 प्रतिशत से अधिक काम पूरा हो चुका है और प्रशासन का दावा है कि इस पुल को वर्षाकाल से पहले यातायात के लिए खोल दिया जाएगा।

इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “यह परियोजना इंदौर के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। हम दिन-रात काम करवा रहे हैं। 800 टन की बो-स्ट्रिंग को लॉन्च करना अंतिम चरणों में से एक है। इसे सुरक्षित और समय पर पूरा करना हमारी प्राथमिकता है।”

शहर के यातायात पर पड़ने वाला प्रभाव

फिलहाल, इस पुल के निर्माण के कारण आसपास के इलाकों में यातायात प्रभावित हो रहा है। रविवार रात की तरह, जरूरत पड़ने पर ट्रैफिक को डायवर्ट किया जा रहा है। लेकिन एक बार यह पुल बनकर तैयार हो जाएगा, तो यह लवकुश चौराहे, नानाखेड़ा, सांवेर रोड और आसपास के क्षेत्रों में आने-जाने वाले हजारों लोगों के लिए वरदान साबित होगा। यह पुल न सिर्फ समय बचाएगा, बल्कि ईंधन की भी बचत करेगा और प्रदूषण कम करने में भी मदद करेगा।

निष्कर्ष

इंदौर का यह प्रदेश का पहला डबलडेकर ब्रिज आधुनिकता और विकास का प्रतीक है। 800 टन वजनी बो-स्ट्रिंग का सफल लॉन्च इस परियोजना के जल्द पूरा होने की दिशा में एक बड़ा कदम है। प्रशासन और निर्माण एजेंसी की त्वरित कार्यशैली से उम्मीद जगी है कि यह अद्भुत संरचना जल्द ही इंदौरवासियों को समर्पित कर दी जाएगी, जिससे शहर को सिंहस्थ सहित कई बड़े आयोजनों से पहले एक मजबूत बुनियादी ढांचा मिल सकेगा।

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp