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“106 की जगह सिर्फ 30 इंजीनियर! Indore Development Authority की बदहाली का सच | ₹3000 करोड़ के प्रोजेक्ट खतरे में”

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Published On: 3 February 2026
IDA 2

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Indore Development Authority Engineer Shortage के कारण इंदौर में ₹1000 करोड़ के काम चल रहे हैं और ₹2000 करोड़ के नए प्रोजेक्ट खतरे में हैं। जानिए कैसे स्टाफ की कमी से शहर का विकास प्रभावित हो रहा है।

Indore Development Authority Engineer Shortage अब इंदौर के विकास के लिए सबसे बड़ा खतरा बनता जा रहा है। जिस एजेंसी के कंधों पर शहर के भविष्य की जिम्मेदारी है, वही आज खुद संसाधनों और स्टाफ की भारी कमी से जूझ रही है।

Indore Development Authority (आईडीए) में इस समय करीब ₹1000 करोड़ के विकास कार्य चल रहे हैं, जबकि ₹2000 करोड़ के नए प्रोजेक्ट शुरू होने की तैयारी में हैं। लेकिन हैरानी की बात यह है कि 106 इंजीनियरों की जरूरत के मुकाबले सिर्फ 30 इंजीनियर ही बचे हैं।

Indore Development Authority Engineer Shortage की असली तस्वीर

आईडीए में स्वीकृत पदों की संख्या 386 है, जिनमें इंजीनियर, अधिकारी और बाबू शामिल हैं। लेकिन वर्तमान में सिर्फ 124 कर्मचारी ही कार्यरत हैं।
यानी करीब 70% पद खाली पड़े हैं।

सरकार को पिछले तीन वर्षों में 12 बार पत्र लिखे जा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया।

₹1000 करोड़ के काम चालू, ₹2000 करोड़ की तैयारी

वर्तमान में इंदौर शहर में:

  • सड़क निर्माण

  • आवासीय योजनाएं

  • व्यावसायिक प्रोजेक्ट

  • अधोसंरचना विकास

जैसे कार्य ₹1000 करोड़ की लागत से चल रहे हैं।

वहीं आने वाले समय में ₹2000 करोड़ के नए प्रोजेक्ट्स पाइपलाइन में हैं।
लेकिन Indore Development Authority Engineer Shortage के चलते इन प्रोजेक्ट्स की निगरानी पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा हो गया है।

106 इंजीनियर चाहिए, मौजूद सिर्फ 30

नियमों के अनुसार:

  • Junior Engineer

  • Assistant Engineer

  • Executive Engineer

का पूरा स्ट्रक्चर होना चाहिए।

लेकिन हकीकत यह है कि:

  • एक इंजीनियर के पास 5–6 साइट्स की जिम्मेदारी

  • नियमित निरीक्षण असंभव

  • गुणवत्ता से समझौता

विशेषज्ञ मानते हैं कि यही कारण है कि कई प्रोजेक्ट समय पर पूरे नहीं हो पा रहे।

घटती गुणवत्ता, बढ़ता खतरा

जब तकनीकी स्टाफ कम होता है:

  • सड़कों की उम्र घटती है

  • इमारतों में खामियां आती हैं

  • जनता का पैसा बर्बाद होता है

Indore Development Authority Engineer Shortage का सीधा असर आम नागरिक पर पड़ रहा है।

भविष्य की योजनाओं पर सवाल

सबसे बड़ा सवाल यह है कि:

जब मौजूदा ₹1000 करोड़ के कामों की मॉनिटरिंग नहीं हो पा रही,
तो ₹2000 करोड़ के नए प्रोजेक्ट कैसे संभाले जाएंगे?

प्रतिनियुक्ति पर आए अधिकारी वापस लौट चुके हैं और नई भर्ती रुकी हुई है।

निष्कर्ष

Indore Development Authority Engineer Shortage केवल एक विभागीय समस्या नहीं, बल्कि इंदौर के भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।
यदि समय रहते भर्ती और संसाधन नहीं बढ़ाए गए, तो विकास की रफ्तार फाइलों में ही सिमटकर रह जाएगी।

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