किटी पार्टी के जरिए Crypto-Forex ट्रेडिंग का जाल: महिलाओं से ढाई करोड़ रुपये की ठगी,
इंदौर। शहर में साइबर और वित्तीय धोखाधड़ी का एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसमें किटी पार्टियों को माध्यम बनाकर महिलाओं को Crypto-Forex ट्रेडिंग में निवेश के नाम पर ठगा गया। इस पूरे मामले में करीब ढाई करोड़ रुपये की ठगी का खुलासा हुआ है। आरोपियों ने कम समय में पैसा दोगुना करने और भारी मुनाफे का झांसा देकर कई महिलाओं से निवेश करवाया और बाद में फरार हो गए। फिलहाल इंदौर क्राइम ब्रांच पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है।
किटी पार्टियों से शुरू हुआ ठगी का नेटवर्क
जांच में यह सामने आया है कि आरोपी लंबे समय से शहर की किटी पार्टियों से जुड़े हुए थे। किटी पार्टियों में महिलाओं का सामाजिक नेटवर्क मजबूत होता है और इसी का फायदा उठाकर आरोपियों ने धीरे-धीरे अपना विश्वास बनाना शुरू किया।
शुरुआत में उन्होंने साधारण बातचीत और निवेश संबंधी सुझावों के जरिए महिलाओं को प्रभावित किया। बाद में उन्होंने क्रिप्टो और फॉरेक्स ट्रेडिंग में पैसा लगाने का प्रस्ताव रखा।
आरोपियों ने दावा किया कि उनकी एक “अंतरराष्ट्रीय ट्रेडिंग टीम” है, जो विदेशी बाजारों में निवेश करती है और बेहद कम समय में रकम को दोगुना कर देती है। इसी झांसे में आकर कई महिलाओं ने अपने परिवार की बचत इस योजना में लगा दी।
100 दिनों में पैसा दोगुना करने का लालच
इस पूरे ठगी रैकेट का सबसे बड़ा हथियार लालच था। आरोपियों ने निवेशकों को भरोसा दिलाया कि केवल 100 दिनों के भीतर उनकी रकम दोगुनी कर दी जाएगी।
इस तरह के दावों ने उन लोगों को भी आकर्षित किया जो पहले से निवेश के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं रखते थे। महिलाओं को बताया गया कि यह एक सुरक्षित और गारंटीड रिटर्न देने वाली योजना है, जिसमें जोखिम लगभग न के बराबर है।
कई मामलों में तो यह भी कहा गया कि यह निवेश विदेशी प्लेटफॉर्म पर किया जा रहा है, जिससे लोगों का भरोसा और बढ़ गया।
शुरुआती रिटर्न देकर बनाया गया भरोसा
पुलिस जांच में यह महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है कि आरोपियों ने शुरुआत में कुछ निवेशकों को छोटे-छोटे रिटर्न दिए।
यह एक सोची-समझी रणनीति थी, ताकि अन्य लोगों का विश्वास भी मजबूत हो सके। जैसे ही कुछ महिलाओं को शुरुआती लाभ मिला, उन्होंने अपने परिचितों को भी इस योजना में शामिल करना शुरू कर दिया।
धीरे-धीरे यह नेटवर्क फैलता गया और निवेश की रकम बढ़ती गई। कई महिलाओं ने तो अपनी पूरी बचत, गहने और अन्य संसाधन भी इस स्कीम में लगा दिए।
करीब ढाई करोड़ रुपये का घोटाला
अब तक की जांच में अनुमान लगाया गया है कि इस ठगी का कुल आंकड़ा करीब 2.5 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है।
क्राइम ब्रांच के अनुसार, निवेशकों से जुटाई गई रकम को किसी भी वैध ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म या अधिकृत वित्तीय योजना में नहीं लगाया गया था। यह पूरी तरह से एक फर्जी निवेश योजना थी, जिसका उद्देश्य केवल लोगों को धोखा देकर पैसा ऐंठना था।
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस रैकेट में और कितने लोग शामिल हैं और कितने निवेशक अभी तक इसके शिकार हुए हैं।
आरोपी हरप्रीत कौर और अन्य लोगों पर शक
इस मामले में हरप्रीत कौर सहित कई अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
जांच में यह सामने आया है कि आरोपी महिलाओं के बीच सक्रिय रहते थे और उन्हें लगातार निवेश के लिए प्रेरित करते थे। वे खुद को वित्तीय विशेषज्ञ और ट्रेडिंग एक्सपर्ट बताकर लोगों को प्रभावित करते थे।
जैसे-जैसे लोगों का भरोसा बढ़ता गया, वैसे-वैसे निवेश की राशि भी बढ़ती गई। बाद में अचानक सभी आरोपी गायब हो गए।
अचानक संपर्क बंद, मोबाइल फोन भी बंद
जब निवेश की रकम एक बड़े स्तर पर पहुंच गई, तो आरोपियों ने अचानक निवेशकों से संपर्क बंद कर दिया।
मोबाइल फोन बंद कर दिए गए, सोशल मीडिया अकाउंट्स गायब हो गए और मिलने-जुलने से भी बचा जाने लगा।
इस स्थिति के बाद निवेशकों को शक हुआ और उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। धीरे-धीरे पूरा मामला क्राइम ब्रांच के संज्ञान में आया।
क्राइम ब्रांच की जांच तेज
इंदौर क्राइम ब्रांच ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेज कर दी है। कई लोगों को पूछताछ के लिए बुलाया गया है, हालांकि कुछ आरोपी अभी भी फरार बताए जा रहे हैं।
पुलिस बैंक ट्रांजैक्शन, डिजिटल पेमेंट्स, मोबाइल डेटा और कॉल रिकॉर्ड्स की गहन जांच कर रही है। इसके साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि पैसा किन-किन खातों में ट्रांसफर किया गया था।
डिजिटल और साइबर एंगल से जांच
चूंकि मामला क्रिप्टो और फॉरेक्स ट्रेडिंग से जुड़ा है, इसलिए इसे साइबर फ्रॉड के एंगल से भी देखा जा रहा है।
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इन आरोपियों ने किसी विदेशी नेटवर्क या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का उपयोग किया था।
विशेषज्ञों की मदद से यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि निवेशकों का पैसा आखिर कहां गया और किस तरह से उसे निकाल लिया गया।
महिलाओं को कैसे बनाया गया शिकार
इस मामले में सबसे चिंताजनक बात यह है कि आरोपियों ने खास तौर पर महिलाओं को निशाना बनाया।
किटी पार्टियों के जरिए सामाजिक विश्वास का फायदा उठाया गया। महिलाओं को यह भरोसा दिलाया गया कि यह एक सुरक्षित और भरोसेमंद निवेश है।
कई महिलाओं ने अपने परिचितों और रिश्तेदारों को भी इसमें शामिल कर लिया, जिससे यह ठगी और तेजी से फैल गई।
वित्तीय जागरूकता की कमी भी बनी वजह
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में वित्तीय जागरूकता की कमी भी बड़ी वजह बनती है।
जब लोग बिना जांच-पड़ताल के ज्यादा मुनाफे के लालच में निवेश करते हैं, तो वे आसानी से ऐसे फ्रॉड का शिकार हो जाते हैं।
क्रिप्टो और फॉरेक्स जैसे जटिल निवेश क्षेत्रों में बिना जानकारी के पैसा लगाना बेहद जोखिमभरा होता है।
पुलिस की अपील
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की निवेश योजना में पैसा लगाने से पहले पूरी तरह से जांच करें।
अगर कोई योजना बहुत कम समय में अधिक रिटर्न का वादा करती है, तो उसमें धोखाधड़ी की संभावना अधिक होती है।
साथ ही किसी भी अनजान व्यक्ति या समूह के कहने पर निवेश करने से बचने की सलाह दी गई है।
निष्कर्ष
इंदौर में सामने आया यह किटी पार्टी आधारित क्रिप्टो-फॉरेक्स ठगी का मामला एक बड़ा वित्तीय घोटाला है, जिसमें सामाजिक नेटवर्क का गलत इस्तेमाल कर महिलाओं को निशाना बनाया गया।
करीब ढाई करोड़ रुपये की इस ठगी ने एक बार फिर यह साबित किया है कि लालच और भरोसे का गलत इस्तेमाल किस तरह लोगों को आर्थिक नुकसान पहुंचा सकता है।
क्राइम ब्रांच की जांच जारी है और उम्मीद है कि जल्द ही इस पूरे नेटवर्क का खुलासा कर आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा।
