—Advertisement—

इंदौर में अंगदान की प्रेरक मिसाल: ब्रेन डेड कास्टिंग डायरेक्टर गौरव दवे ने बचाईं चार जिंदगियां, 68वें ग्रीन कॉरिडोर से पहुंचा दिल अहमदाबाद

Author Picture
Published On: 27 July 2026
"इंदौर में ब्रेन डेड घोषित 25 वर्षीय कास्टिंग डायरेक्टर गौरव दवे के अंगदान के बाद 68वें ग्रीन कॉरिडोर से हृदय अहमदाबाद भेजा गया, जबकि लिवर और दोनों किडनियों से चार मरीजों को नया जीवन मिला
— "इंदौर में ब्रेन डेड घोषित 25 वर्षीय कास्टिंग डायरेक्टर गौरव दवे के अंगदान के बाद 68वें ग्रीन कॉरिडोर से हृदय अहमदाबाद भेजा गया, जबकि लिवर और दोनों किडनियों से चार मरीजों को नया जीवन मिला

—Advertisement—

इंदौर में अंगदान की प्रेरक मिसाल: ब्रेन डेड कास्टिंग डायरेक्टर गौरव दवे ने बचाईं चार जिंदगियां, 68वें ग्रीन कॉरिडोर से पहुंचा दिल अहमदाबाद

रिपोर्ट: नरेंद्र सिरवी
मानवता की मिसाल बना इंदौर, एक निर्णय ने चार परिवारों में लौटाई उम्मीद

इंदौर शहर ने एक बार फिर मानवता, संवेदनशीलता और अंगदान के प्रति जागरूकता का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया है, जिसकी जितनी सराहना की जाए उतनी कम है। खजूरी बाजार निवासी 25 वर्षीय कास्टिंग डायरेक्टर गौरव दवे के असामयिक निधन ने जहां उनके परिवार को गहरे शोक में डुबो दिया, वहीं उनके परिजनों द्वारा लिया गया एक साहसिक और मानवीय निर्णय चार अन्य परिवारों के लिए जीवन का नया सवेरा बन गया।

ब्रेन स्ट्रोक के बाद एक दुर्लभ बीमारी से जूझ रहे गौरव दवे को डॉक्टरों ने तमाम प्रयासों के बावजूद ब्रेन डेड घोषित कर दिया। इस कठिन परिस्थिति में परिवार ने अंगदान का निर्णय लिया। उनके हृदय, लिवर और दोनों किडनियों का सफलतापूर्वक प्रत्यारोपण अलग-अलग मरीजों में किया जाएगा। इस महादान से चार लोगों को नया जीवन मिलने की उम्मीद है।

ब्रेन स्ट्रोक के बाद बिगड़ी हालत

जानकारी के अनुसार, इंदौर के खजूरी बाजार निवासी गौरव दवे पेशे से कास्टिंग डायरेक्टर थे और मनोरंजन जगत में अपनी पहचान बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रहे थे। कुछ दिन पहले उन्हें अचानक ब्रेन स्ट्रोक आया, जिसके बाद परिजन तत्काल उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे।

विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने उनका इलाज शुरू किया, लेकिन जांच के दौरान पता चला कि वे एक दुर्लभ न्यूरोलॉजिकल बीमारी से भी पीड़ित हैं। लगातार इलाज और गहन चिकित्सा के बावजूद उनकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ और अंततः मेडिकल प्रोटोकॉल के तहत विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया।

परिवार ने लिया सबसे कठिन लेकिन सबसे बड़ा निर्णय

किसी भी परिवार के लिए अपने युवा बेटे को खोने का दर्द शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता। ऐसे कठिन समय में अधिकांश परिवार भावनात्मक रूप से टूट जाते हैं, लेकिन गौरव दवे के परिजनों ने समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए अंगदान का निर्णय लिया।

डॉक्टरों ने जब परिवार को अंगदान की प्रक्रिया और उससे मिलने वाले लाभों के बारे में विस्तार से बताया, तब उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के गौरव के अंग दान करने की सहमति दी।

यह निर्णय केवल चिकित्सा की दृष्टि से महत्वपूर्ण नहीं था, बल्कि यह समाज के लिए भी एक प्रेरणादायक संदेश बन गया कि किसी व्यक्ति का जीवन समाप्त होने के बाद भी उसके अंग कई लोगों को नया जीवन दे सकते हैं।

68वें ग्रीन कॉरिडोर से अहमदाबाद पहुंचा हृदय

गौरव दवे का हृदय सुरक्षित रूप से अहमदाबाद भेजने के लिए इंदौर में 68वां ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया।

ग्रीन कॉरिडोर ऐसी विशेष यातायात व्यवस्था होती है, जिसमें ट्रैफिक पुलिस कुछ समय के लिए पूरे मार्ग को खाली कर देती है ताकि अंगों को निर्धारित समय के भीतर अस्पताल तक पहुंचाया जा सके।

इस विशेष व्यवस्था के माध्यम से गौरव का हृदय सुरक्षित रूप से अहमदाबाद स्थित यू.एन. मेहता अस्पताल भेजा गया, जहां गंभीर हृदय रोग से जूझ रहे एक मरीज का हार्ट ट्रांसप्लांट किया जाएगा।

समय पर अंग पहुंचना हार्ट ट्रांसप्लांट की सफलता के लिए अत्यंत आवश्यक माना जाता है। ऐसे में ग्रीन कॉरिडोर की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही।

लिवर और दोनों किडनियों से तीन मरीजों को मिलेगा नया जीवन

गौरव दवे का लिवर इंदौर स्थित अपोलो अस्पताल में भर्ती एक मरीज को प्रत्यारोपित किया जाएगा।

वहीं उनकी दोनों किडनियां चोइथराम अस्पताल में भर्ती दो अलग-अलग मरीजों में प्रत्यारोपित की जाएंगी, जो लंबे समय से किडनी फेल होने की समस्या से जूझ रहे थे।

इस प्रकार गौरव दवे के अंगदान से कुल चार मरीजों को नया जीवन मिलने की संभावना बनी है।

अंगदान क्यों है सबसे बड़ा महादान

चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि अंगदान किसी भी व्यक्ति द्वारा मृत्यु के बाद किया जाने वाला सबसे बड़ा सामाजिक योगदान है।

भारत में हजारों मरीज हर वर्ष हार्ट, लिवर और किडनी प्रत्यारोपण का इंतजार करते हैं। दुर्भाग्यवश पर्याप्त संख्या में अंगदान नहीं होने के कारण कई मरीज समय पर उपचार नहीं मिल पाने से अपनी जान गंवा देते हैं।

यदि अधिक से अधिक लोग अंगदान के प्रति जागरूक हों और अपने परिवारों को भी इसके लिए प्रेरित करें, तो हजारों लोगों की जान बचाई जा सकती है।

ब्रेन डेड क्या होता है?

ब्रेन डेड वह स्थिति होती है जब व्यक्ति का मस्तिष्क स्थायी रूप से काम करना बंद कर देता है और उसके दोबारा सामान्य होने की कोई संभावना नहीं रहती।

हालांकि आधुनिक जीवन रक्षक उपकरणों की सहायता से कुछ समय तक हृदय की धड़कन और सांसों को कृत्रिम रूप से बनाए रखा जा सकता है, लेकिन चिकित्सकीय और कानूनी रूप से ऐसे व्यक्ति को मृत माना जाता है।

इसी अवस्था में यदि परिवार की सहमति हो तो व्यक्ति के कई महत्वपूर्ण अंग सुरक्षित निकालकर जरूरतमंद मरीजों को प्रत्यारोपित किए जा सकते हैं।

इंदौर लगातार बना रहा है नई पहचान

इंदौर केवल स्वच्छता में ही देशभर में अपनी अलग पहचान नहीं बना रहा, बल्कि अंगदान के क्षेत्र में भी शहर लगातार नई मिसालें स्थापित कर रहा है।

ग्रीन कॉरिडोर की त्वरित व्यवस्था, अस्पतालों के बीच समन्वय, चिकित्सकों की तत्परता और ट्रैफिक पुलिस की सक्रिय भूमिका ने इंदौर को देश के अग्रणी शहरों में शामिल कर दिया है।

हर सफल अंगदान अभियान कई जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन देता है और समाज में जागरूकता का संदेश भी फैलाता है।

डॉक्टरों और प्रशासन की रही महत्वपूर्ण भूमिका

गौरव दवे के अंगदान की पूरी प्रक्रिया में अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टरों, ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर, ट्रैफिक पुलिस, जिला प्रशासन और मेडिकल टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

अंगों को निर्धारित समय सीमा के भीतर सुरक्षित अस्पतालों तक पहुंचाने के लिए सभी विभागों ने समन्वित तरीके से कार्य किया, जिसके कारण प्रत्यारोपण प्रक्रिया समय पर संभव हो सकी।

परिवार के निर्णय को मिल रही सराहना

गौरव दवे के परिवार के इस निर्णय की पूरे इंदौर सहित प्रदेशभर में सराहना की जा रही है।

सामाजिक संगठनों, चिकित्सकों और नागरिकों का कहना है कि इस तरह के निर्णय समाज में अंगदान के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करते हैं। यह केवल चार लोगों को नया जीवन देने का कार्य नहीं, बल्कि हजारों लोगों को प्रेरित करने वाला संदेश भी है।

समाज के लिए प्रेरणा बना गौरव दवे का महादान

गौरव दवे भले ही आज इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनका यह महादान उन्हें हमेशा लोगों की स्मृतियों में जीवित रखेगा। उनके अंगों के माध्यम से चार लोग नई जिंदगी की शुरुआत करेंगे और उनके परिवारों में फिर से खुशियां लौटेंगी।

गौरव दवे के परिवार ने यह साबित कर दिया कि इंसान अपने जाने के बाद भी दूसरों के जीवन में उम्मीद की रोशनी बन सकता है। उनका यह निर्णय आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत रहेगा।

अंगदान केवल एक चिकित्सा प्रक्रिया नहीं, बल्कि मानवता की सबसे बड़ी सेवा है। यदि समाज का प्रत्येक व्यक्ति इस दिशा में जागरूक होकर सकारात्मक सोच अपनाए, तो हजारों मरीजों को नया जीवन मिल सकता है। गौरव दवे का महादान इसी संदेश को मजबूत करता है कि “मृत्यु अंत नहीं, किसी और के जीवन की नई शुरुआत भी बन सकती है।”

 

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp