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इंदौर में दोस्त और डॉक्टर बनकर साइबर ठगी: बिल्डिंग मटेरियल सप्लायर से करीब 1.5 लाख रुपए ट्रांसफर कराए

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Published On: 26 August 2026
opipoi

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इंदौर में दोस्त और डॉक्टर बनकर साइबर ठगी: बिल्डिंग मटेरियल सप्लायर से करीब 1.5 लाख रुपए ट्रांसफर कराए

इंदौर। शहर के परदेशीपुरा इलाके में साइबर ठगी का एक मामला सामने आया है, जिसमें जालसाजों ने पहले पीड़ित का दोस्त बनकर भरोसा जीता और फिर कथित डॉक्टर बनकर इलाज के नाम पर रुपये मांगे। आरोपियों ने दोस्त की मां को हार्ट अटैक आने और अस्पताल में भर्ती होने की बात कहकर ऐसी आपात स्थिति बनाई कि बिल्डिंग मटेरियल सप्लायर संजय उनके झांसे में आ गए। उन्होंने अलग-अलग ट्रांजैक्शन के जरिए करीब डेढ़ लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए।

कुछ समय बाद जब संजय को बातचीत और लगातार रुपये मांगने के तरीके पर संदेह हुआ तो उन्होंने अपने दोस्त धर्मेंद्र जाट के वास्तविक मोबाइल नंबर पर संपर्क किया। दोस्त ने बताया कि न तो उसकी मां अस्पताल में भर्ती है और न ही उसे किसी तरह की आर्थिक मदद की जरूरत है। इसके बाद पीड़ित को पता चला कि वह साइबर ठगी का शिकार हो चुका है।

संजय ने मामले की शिकायत साइबर हेल्पलाइन पर की। इसके साथ ही परदेशीपुरा पुलिस को भी घटनाक्रम की जानकारी दी गई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

15 अगस्त की शाम आया था पहला फोन

पीड़ित संजय ने पुलिस को बताया कि घटना की शुरुआत 15 अगस्त की शाम करीब 6 बजे हुई। उनके मोबाइल पर एक कॉल आया। फोन करने वाले व्यक्ति ने खुद को उनका दोस्त धर्मेंद्र जाट बताया और कहा कि वह CHL अपोलो अस्पताल में मौजूद है।

कॉल करने वाले ने दावा किया कि उसकी मां को अचानक हार्ट अटैक आया है और अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है। इस खबर से संजय चिंतित हो गए। कथित दोस्त ने बातचीत को विश्वसनीय बनाने के लिए एक अन्य व्यक्ति से भी बात कराई, जिसे उसने अपना बेटा बताया।

मामला मेडिकल इमरजेंसी से जुड़ा होने और बातचीत जल्दबाजी में होने के कारण संजय आवाज को ठीक से पहचान नहीं सके। इसी बात का फायदा उठाकर आरोपियों ने आगे की ठगी को अंजाम दिया।

फिर कथित डॉक्टर की हुई एंट्री

दोस्त बनकर फोन करने के बाद ठगी के दूसरे चरण में एक अन्य व्यक्ति सामने आया। उसने खुद को डॉक्टर उमंग सिंह बताते हुए संजय से संपर्क किया। कथित डॉक्टर ने कहा कि मरीज की स्थिति को देखते हुए इलाज के लिए तत्काल करीब डेढ़ लाख रुपये की आवश्यकता है।

इसके बाद संजय को एक नंबर दिया गया और उस पर रुपये ट्रांसफर करने के लिए कहा गया। चूंकि इससे पहले उन्हें दोस्त की मां के हार्ट अटैक की कहानी बताई जा चुकी थी, इसलिए उन्हें लगा कि वास्तव में अस्पताल में इमरजेंसी की स्थिति बनी हुई है।

आरोपियों ने कथित तौर पर इसी भावनात्मक दबाव और जल्दबाजी का फायदा उठाया।

पहले भेजे 15 हजार, फिर लगातार बढ़ती गई रकम

संजय ने सामने वाले व्यक्ति को बताया कि उनके पास तत्काल डेढ़ लाख रुपये उपलब्ध नहीं हैं। इस पर कथित डॉक्टर ने कहा कि जितनी राशि उपलब्ध है, उतनी ही तुरंत भेज दें।

इसके बाद संजय ने सबसे पहले करीब 15 हजार रुपये फोन-पे के माध्यम से ट्रांसफर कर दिए। पहली रकम मिलने के बाद भी आरोपियों ने फोन करना बंद नहीं किया। लगातार मेडिकल इमरजेंसी का हवाला देकर और रुपये की मांग की जाती रही।

पीड़ित के अनुसार उन्होंने इसके बाद अलग-अलग ट्रांजैक्शन में करीब 96 हजार रुपये भेजे। बाद में लगभग 40 हजार रुपये की एक और राशि ट्रांसफर कर दी। इस तरह अलग-अलग भुगतान के जरिए उनसे करीब डेढ़ लाख रुपये ठग लिए गए।

लगातार कॉल आने पर संजय को हुआ शक

रुपये भेजने के बावजूद जब लगातार और रकम की मांग होने लगी तो संजय को पूरे घटनाक्रम पर संदेह हुआ। उन्हें लगा कि जिस तरह बार-बार फोन करके तत्काल पैसे भेजने का दबाव बनाया जा रहा है, उसमें कुछ गड़बड़ हो सकती है।

इसके बाद उन्होंने उस नंबर पर भरोसा करने के बजाय सीधे अपने दोस्त धर्मेंद्र जाट के वास्तविक मोबाइल नंबर पर फोन करने का फैसला किया।

यहीं से ठगी की पूरी कहानी सामने आ गई।

असली दोस्त ने कहा- मां अस्पताल में भर्ती ही नहीं

संजय ने धर्मेंद्र को फोन कर उनकी मां की तबीयत और अस्पताल में चल रहे इलाज के बारे में पूछा। इस पर धर्मेंद्र ने ऐसी किसी घटना से साफ इनकार कर दिया। उसने बताया कि वह अस्पताल में नहीं बल्कि अपने घर पर है और उसकी मां को हार्ट अटैक आने जैसी कोई बात नहीं हुई है।

यह सुनते ही संजय समझ गए कि उनके साथ साइबर फ्रॉड हुआ है। जिस व्यक्ति से वे अब तक दोस्त समझकर बात कर रहे थे, वह वास्तव में कोई जालसाज था।

इसके बाद पीड़ित ने तुरंत साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई ताकि संबंधित ट्रांजैक्शन और खातों के संबंध में कार्रवाई की जा सके।

परदेशीपुरा पुलिस ने दर्ज किया मामला

पीड़ित की शिकायत के बाद परदेशीपुरा पुलिस ने मंगलवार को धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी। पुलिस अब उन मोबाइल नंबरों और बैंक अथवा डिजिटल पेमेंट खातों से संबंधित जानकारी जुटा रही है, जिनका इस्तेमाल रुपये मंगाने के लिए किया गया था।

जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि रकम किन खातों में पहुंची और बाद में उसे कहां ट्रांसफर या निकाला गया। आरोपियों तक पहुंचने के लिए कॉल से संबंधित तकनीकी जानकारी भी जांच में महत्वपूर्ण हो सकती है।

मेडिकल इमरजेंसी के नाम पर बनाया भावनात्मक दबाव

इस मामले में साइबर ठगों द्वारा अपनाया गया तरीका खास तौर पर ध्यान देने योग्य है। आरोपियों ने किसी इनाम, लॉटरी या निवेश का लालच देने के बजाय पीड़ित के परिचित व्यक्ति की पहचान का इस्तेमाल किया। दोस्त की मां को हार्ट अटैक आने की कहानी सुनाकर तत्काल मदद की जरूरत बताई गई।

इसके बाद कथित डॉक्टर को बातचीत में शामिल कर कहानी को और विश्वसनीय बनाने की कोशिश की गई। मेडिकल इमरजेंसी जैसी स्थिति में व्यक्ति के पास जानकारी सत्यापित करने के लिए कम समय होने का फायदा ठगों ने उठाया।

पैसे भेजने से पहले सीधे परिचित से करें पुष्टि

यह घटना एक बार फिर ऑनलाइन और फोन कॉल के जरिए होने वाली ठगी से सावधान रहने की जरूरत बताती है। यदि कोई परिचित बनकर मेडिकल इमरजेंसी, दुर्घटना या किसी अन्य संकट के नाम पर अचानक पैसे मांगे तो राशि भेजने से पहले उसके पहले से सेव किए गए नंबर पर कॉल कर पुष्टि करना जरूरी है।

सिर्फ कॉल करने वाले की ओर से बताए गए नाम, रिश्ते या परिस्थिति के आधार पर तुरंत डिजिटल भुगतान करना जोखिम भरा हो सकता है। खासकर जब सामने वाला बार-बार जल्दी पैसे भेजने का दबाव बना रहा हो तो अतिरिक्त सावधानी जरूरी है।

फिलहाल परदेशीपुरा पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। पुलिस जांच के बाद ही आरोपियों की पहचान, रकम किन खातों में गई और इस वारदात में कितने लोग शामिल थे, इसकी पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

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