इंदौर BRTS मामला पर हाईकोर्ट की सख्ती, कलेक्टर और निगम कमिश्नर की पेशी, ट्रैफिक अव्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही पर कोर्ट की कड़ी टिप्पणी। पूरी रिपोर्ट पढ़ें।
इंदौर BRTS मामला: हाईकोर्ट की सख्ती पर पेश हुए कलेक्टर-कमिश्नर
इंदौर BRTS मामला एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। बीआरटीएस कॉरिडोर की रेलिंग हटाने और शहर की लगातार बिगड़ती ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने प्रशासन की धीमी कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि जनता को परेशानी में डालने का कोई औचित्य नहीं है।
Table of Contents
- इंदौर BRTS मामला क्या है
- हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
- भोपाल बनाम इंदौर: तुलना पर सवाल
- कलेक्टर-कमिश्नर की पेशी
- ट्रैफिक दबाव और आधा-अधूरा काम
- डिवाइडर और सुरक्षा व्यवस्था पर बहस
- सड़क पर मलबा और दुर्घटनाओं का खतरा
- आगे क्या होगा? अगली सुनवाई
इंदौर BRTS मामला क्या है?
इंदौर BRTS मामला शहर की प्रमुख यातायात समस्या से जुड़ा है। बीआरटीएस कॉरिडोर की रेलिंग हटाने का निर्णय ट्रैफिक सुधार के उद्देश्य से लिया गया था, लेकिन काम की धीमी गति ने हालात और बिगाड़ दिए।

हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
हाईकोर्ट ने साफ कहा कि जब भोपाल में BRTS मात्र 9 दिनों में हटाया जा सकता है, तो इंदौर में 10 महीने बाद भी काम अधूरा क्यों है?
कोर्ट ने इसे प्रशासनिक लापरवाही करार दिया।
भोपाल बनाम इंदौर: बड़ा सवाल
याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया—
“वह भोपाल है, इसलिए हो गया; यह इंदौर है, इसलिए नहीं हो पा रहा।”
इस टिप्पणी ने इंदौर BRTS मामले को और गंभीर बना दिया।
कलेक्टर-कमिश्नर की पेशी
मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) का हवाला देकर छूट मांगी गई, लेकिन कोर्ट ने इसे अस्वीकार कर दिया।
दोपहर सत्र में—
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कलेक्टर शिवम वर्मा
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निगम कमिश्नर दिलीप यादव
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ट्रैफिक DCP आनंद कलादगी
को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होना पड़ा।
आधा काम, दोगुनी परेशानी
इंदौर BRTS मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि—
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भंवरकुआं → विजय नगर मार्ग पर राहत
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विजय नगर → भंवरकुआं मार्ग पर जाम और खतरा
अधूरा काम ट्रैफिक दबाव को बढ़ा रहा है।
डिवाइडर और सुरक्षा पर बहस
याचिकाकर्ता ने अस्थाई डिवाइडर के सुझाव दिए—
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सीमेंट ब्लॉक
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पुलिस बैरिकेड
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रस्सी या खंभे
प्रशासन ने लागत और दुर्घटना का हवाला देकर आपत्ति जताई, जिस पर कोर्ट ने संतुलन बनाने की बात कही।
सड़क पर मलबा, हादसों का खतरा
कोर्ट को बताया गया कि—
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सड़क पर गिट्टी और मलबा पड़ा है
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पेंचवर्क असमतल है
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बाइक सवारों के फिसलने का खतरा है
हाईकोर्ट ने तुरंत सफाई और सुधार के निर्देश दिए।
आगे क्या होगा?
इंदौर BRTS मामला अब निर्णायक मोड़ पर है।
अगली सुनवाई 12 जनवरी को होगी, जिसमें प्रगति रिपोर्ट पेश करनी होगी।
