इंदौर BRTS कॉरिडोर का स्वरूप पूरी तरह बदल रहा है। निगम आयुक्त ने 8 स्टॉप हटाने के बाद शेष काम जल्द पूरा करने के निर्देश दिए। जानें कब खुलेगी सड़क।
इंदौर BRTS का बदलता स्वरूप: 8 बस स्टॉप हटाए गए, अब यातायात को मिलेगी राहत
इंदौर: शहर की यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने और मास्टर प्लान के तहत सड़कों को विकसित करने के लिए नगर निगम ने एक बड़ी कार्रवाई की है। इंदौर BRTS कॉरिडोर का स्वरूप पूरी तरह बदल दिया गया है। बुधवार को नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल ने बीआरटीएस मार्ग का निरीक्षण किया और बताया कि अब तक 8 प्रमुख बस स्टॉप पूरी तरह हटा दिए गए हैं।
इस बदलाव का मकसद शहर के सबसे व्यस्त मार्गों में से एक पर जाम की समस्या को हमेशा के लिए खत्म करना है। आयुक्त ने अधिकारियों को शेष काम जल्द से जल्द पूरा करने के निर्देश दिए हैं ताकि आम नागरिकों को बेहतर और चौड़ी सड़कें मिल सकें।
इंदौर BRTS कॉरिडोर: हटाए गए ये 8 बस स्टॉप
निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल ने राजीव गांधी प्रतिमा चौराहे से निरंजनपुर चौराहे तक के 10.05 किलोमीटर लंबे इंदौर BRTS कॉरिडोर की समीक्षा की। इस दौरान उन्हें बताया गया कि कॉरिडोर पर स्थित कुल 17 बस स्टॉप में से 8 को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया गया है। इन स्टॉपों पर सड़क समतलीकरण और डामरीकरण का कार्य भी पूरा कर लिया गया है।
हटाए गए बस स्टॉपों की सूची:
- राजीव गांधी चौराहा
- भोलाराम उस्ताद
- विष्णुपुरी
- भंवरकुआं
- होल्कर साइंस कॉलेज
- नवलखा
- इंदिरा गांधी प्रतिमा
- जीपीओ (GPO)
इन स्टॉपों के हटने से इस मार्ग पर यातायात का प्रवाह तेज हो गया है और लंबे समय से चली आ रही जाम की समस्या में कमी आई है।
वर्तमान में चल रहे कार्य: 3 स्टॉप हटाने की प्रक्रिया जारी
यहां काम रुका नहीं है। आयुक्त सिंघल ने निरीक्षण के दौरान स्पष्ट किया कि शेष 3 बस स्टॉपों को हटाने का कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है। ये स्टॉप हैं:
- गीता भवन
- एलआईजी चौराहा
- सिटी बस ऑफिस के सामने
आयुक्त ने संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिए कि निर्माण के दौरान नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि हो। उन्होंने कहा कि जहां भी काम चल रहा है, वहां पर्याप्त बैरिकेडिंग और चमकदार संकेतक लगाए जाएं ताकि रात के समय भी कोई दुर्घटना न हो।
नवलखा से होल्कर कॉलेज: शेष 670 मीटर की चुनौती
हालांकि ज्यादातर जगहों से रेलिंग हटा दी गई हैं, लेकिन एक छोटा सा हिस्सा अभी भी बाधा बना हुआ है। नवलखा चौराहा से होल्कर साइंस कॉलेज के बीच का 670 मीटर का हिस्सा अभी भी पूरी तरह नहीं खुल पाया है।
रिपोर्ट के अनुसार, इस हिस्से में लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा अस्थायी डिवाइडर बनाए जाने हैं। आयुक्त ने पीडब्ल्यूडी अधिकारियों से रूबरू होकर इस कार्य को प्राथमिकता देने का आग्रह किया। जैसे ही डिवाइडर का काम पूरा होगा, नगर निगम की एजेंसी यहां से रेलिंग हटाने की कार्रवाई शुरू कर देगी।
मास्टर प्लान की सड़कों का निरीक्षण: गुणवत्ता पर जोर
सिर्फ इंदौर BRTS ही नहीं, बल्कि आयुक्त ने शहर के अन्य महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं का भी गहन निरीक्षण किया। उनका फोकस मास्टर प्लान के तहत बन रही सड़कों की गुणवत्ता और समय पर डिलीवरी पर था।
निरीक्षण किए गए प्रमुख क्षेत्र:
- मुसाखेड़ी चौराहे से सांवरिया मंदिर तक सर्विस रोड: यहां काम की गति धीमी पाई गई, जिस पर नाराजगी जताई गई।
- मालवीय नगर गली नंबर 2 और जावरा कंपाउंड: आंतरिक सड़कों को चौड़ा करने का काम तेज करने के निर्देश दिए।
- एमआईजी से रिंग रोड तक लिंक रोड: इस लिंक रोड के खुलने से एमआर-10 और रिंग रोड के बीच का सफर आसान हो जाएगा।
- MR-04 भंडारी ब्रिज से बाणगंगा ब्रिज: इस मार्ग पर डामरीकरण की गुणवत्ता को लेकर सख्त निर्देश दिए गए।
निगम आयुक्त का सख्त रुख: समय-सीमा होगी पालन
निरीक्षण के दौरान निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल का रुख बेहद सख्त देखा गया। उन्होंने सभी निर्माण एजेंसियों को स्पष्ट चेतावनी दी कि समय-सीमा का पालन करना अनिवार्य होगा। किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे सतत निगरानी (Continuous Monitoring) करें। उनका कहना था कि सड़कों की गुणवत्ता में कोई समझौता न हो। यदि किसी जगह पर काम की गति धीमी मिली या सामग्री में घटिया गुणवत्ता पाई गई, तो संबंधित एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।इस निरीक्षण के दौरान अपर आयुक्त अभय राजनगांवकर, अधीक्षण यंत्री पी.एस. कुशवाह और अन्य तकनीकी अधिकारी मौजूद रहे।
इंदौर के लिए क्या बदलेगा? (What’s Next)
प्रशासन का लक्ष्य अब आने वाले कुछ ही हफ्तों में इंदौर BRTS मार्ग को सामान्य यातायात के लिए पूरी तरह सुव्यवस्थित करना है। एक बार यह प्रोजेक्ट पूरा हो जाने के बाद:
- जाम से मुक्ति: बीआरटीएस के कारण जो दो-तिहाई सड़क बंद थी, वह अब आम यातायात के लिए खुल जाएगी।
- समय की बचत: राजीव गांधी चौराहे से निरंजनपुर तक का सफर आधे समय में पूरा हो सकेगा।
- सुरक्षित यातायात: रेलिंग हटने और सड़क चौड़ी होने से दुर्घटनाओं की संभावना कम होगी।
निगम प्रशासन का दावा है कि इस बदलाव से न सिर्फ यातायात सुगम होगा, बल्कि शहर की सूरत भी बदलेगी। आयुक्त ने भरोसा दिलाया कि नागरिकों को असुविधा न हो, इसका विशेष ध्यान रखा जा रहा है।
