Indore भागीरथपुरा दूषित पानी कांड: जांच आयोग की रिपोर्ट अब तक अधूरी, हाईकोर्ट ने दी समय-सीमा, अगली सुनवाई 20 जुलाई को
Indore के भागीरथपुरा क्षेत्र में सामने आए बहुचर्चित दूषित पानी कांड की जांच अभी तक पूरी नहीं हो सकी है। इस मामले को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में सुनवाई हुई, जिसमें जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिवीजन बेंच ने मामले की प्रगति पर विचार किया। सुनवाई के दौरान जांच आयोग ने अदालत को बताया कि जांच प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हो पाई है, जिसके चलते रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की जा सकी।
हाईकोर्ट में जांच आयोग ने मांगा और समय
सुनवाई के दौरान जांच आयोग की ओर से कहा गया कि मामले की जांच अभी जारी है और विभिन्न पहलुओं की गहनता से पड़ताल की जा रही है। आयोग ने अदालत से अतिरिक्त समय देने की मांग की। इस पर हाईकोर्ट ने पहले दी गई समय-सीमा को देखते हुए एक बार फिर विस्तार देने पर सहमति जताई। अदालत ने स्पष्ट किया कि रिपोर्ट तैयार करना आवश्यक है, लेकिन इसके लिए अंतिम अवसर दिया जा रहा है ताकि जांच निष्पक्ष और विस्तृत रूप से पूरी हो सके।
याचिका से दो नाम हटाए गए
इस मामले की सुनवाई के दौरान नगर निगम से जुड़े दो अधिकारियों ने अदालत में आवेदन प्रस्तुत कर याचिका से अपना नाम हटाने की मांग की। इनमें नगर निगम के अपर कमिश्नर रोहित सिसोनिया और जल कार्य समिति के प्रभारी बबलू शर्मा शामिल थे। दोनों अधिकारियों के आवेदन को अदालत ने स्वीकार कर लिया, जिसके बाद उन्हें इस याचिका से अलग कर दिया गया।
पहले भी बनाई गई थी जांच समिति
इस गंभीर मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने पहले ही सख्त रुख अपनाते हुए 29 जनवरी को एक जांच समिति का गठन किया था। यह समिति रिटायर्ड जज सुशील गुप्ता की अध्यक्षता में बनाई गई थी। अदालत ने समिति को प्रारंभिक रिपोर्ट चार सप्ताह के भीतर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे, लेकिन निर्धारित समय सीमा के भीतर रिपोर्ट तैयार नहीं हो सकी।
इसके बाद जांच की जटिलता को देखते हुए समय-समय पर आयोग को अतिरिक्त समय दिया गया, लेकिन अब तक अंतिम रिपोर्ट अदालत में पेश नहीं की जा सकी है। इससे मामले की सुनवाई में लगातार देरी हो रही है।
अगली सुनवाई 20 जुलाई को निर्धारित
मामले की अगली सुनवाई अब 20 जुलाई को तय की गई है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि इस तिथि तक जांच आयोग को अपनी रिपोर्ट या कम से कम प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए अब और अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी।
क्या है पूरा मामला
Indore भागीरथपुरा क्षेत्र में पिछले साल दिसंबर महीने में दूषित पानी पीने से बड़ा हादसा हुआ था। इस घटना में 36 लोगों की मौत हो गई थी, जिससे पूरे प्रदेश में हड़कंप मच गया था। घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे थे।
इस मामले में लापरवाही और जिम्मेदारी तय करने को लेकर कई याचिकाएं मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में दायर की गई थीं। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, जिसके कारण इतनी बड़ी संख्या में लोगों की जान गई।
जांच के मुख्य बिंदु
हाईकोर्ट द्वारा गठित जांच आयोग को कई महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच के निर्देश दिए गए हैं। इनमें यह शामिल है कि दूषित पानी की वास्तविक वजह क्या थी, क्या इसमें किसी रासायनिक तत्व या अन्य प्रदूषकों की मौजूदगी थी, और किस स्तर पर लापरवाही हुई।
इसके अलावा आयोग को यह भी तय करना है कि घटना के लिए कौन से अधिकारी या कर्मचारी जिम्मेदार हैं और उनकी जवाबदेही किस तरह तय की जाएगी। साथ ही पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा देने की प्रक्रिया पर भी रिपोर्ट तैयार की जानी है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर भागीरथपुरा दूषित पानी कांड की जांच प्रक्रिया अभी अधूरी है और मामला लगातार अदालत की निगरानी में चल रहा है। हाईकोर्ट ने जांच आयोग को अंतिम अवसर देते हुए रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। अब सभी की नजरें 20 जुलाई की अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां इस संवेदनशील मामले में आगे की दिशा तय हो सकती है।
