गोबर से बने स्वदेशी दीयों ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को किया प्रभावित, इंदौर प्रशासन की नवाचार पहल को मिली सराहना
इंदौर।
राष्ट्रीय स्वच्छता दिवस के अवसर पर इंदौर में आयोजित एक विशेष प्रदर्शनी में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्वदेशी नवाचार की अनूठी झलक देखी। प्रदर्शनी में गौशाला से प्राप्त गोबर से बने स्वदेशी दीयों का प्रदर्शन किया गया। जब मुख्यमंत्री ने इन दीयों और उन्हें बनाने वाली मशीन को करीब से देखा, तो वे चकित रह गए और इंदौर प्रशासन के इस प्रयास की खुलकर प्रशंसा की।
सीएम यादव ने कहा कि यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और गौशालाओं के सशक्तिकरण में भी अहम भूमिका निभाएगी।
हातोद गौशाला में लगीं आधुनिक मशीनें
नगर निगम की हातोद स्थित गौशाला में दो नई मशीनें स्थापित की गई हैं, जिनकी मदद से बड़े पैमाने पर गोबर से दीयों का उत्पादन किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, दीपावली और आगामी त्योहारों में बढ़ती मांग को देखते हुए आने वाले समय में और भी मशीनें लगाई जाएंगी। अनुमान है कि लाखों दीयों का उत्पादन समय पर किया जा सकेगा।
यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा चलाए जा रहे स्वदेशी अभियान को भी नई गति प्रदान करेगी।
कलेक्टर शिवम वर्मा की पहल से “स्वदेशी से खुशहाली”
इस परियोजना की शुरुआत इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ने “सेवा पखवाड़ा” के अंतर्गत की है। इसका मुख्य उद्देश्य ‘स्वदेशी से खुशहाली’ के संदेश को समाज तक पहुँचाना और त्योहारों के लिए पर्यावरण-अनुकूल, स्वदेशी विकल्प उपलब्ध कराना है।
दीयों का निर्माण पूर्ण रूप से गाय के गोबर से किया जा रहा है, जिन्हें पारंपरिक और पवित्र माना जाता है।
आकर्षक पैकेजिंग के साथ आएंगे बाजार में
निर्मित स्वदेशी दीयों को केवल सरकारी और सामाजिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रखा जाएगा। इन्हें विशेष आकर्षक पैकेजिंग के साथ आम लोगों के लिए बाजार में भी उपलब्ध कराया जाएगा। इससे न केवल उपभोक्ताओं को सस्ते और पर्यावरण-मित्र दीये मिलेंगे, बल्कि ग्रामीण अंचल और गौशालाओं को अतिरिक्त आय का स्रोत भी प्राप्त होगा।
प्रशासन की सक्रिय निगरानी
कलेक्टर शिवम वर्मा स्वयं इस पूरी परियोजना की निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने जिला स्तरीय अधिकारियों को इस काम में सक्रिय रूप से शामिल किया है। पशुपालन विभाग, नगर निगम और जिला पूर्ति नियंत्रक को रोज़ाना प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
भविष्य की संभावनाएँ
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मॉडल को अन्य जिलों में भी लागू किया जाए, तो लाखों गोबर आधारित उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं। यह न केवल स्वदेशी उद्योग को बढ़ावा देगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, ग्रामीण रोजगार और गौशाला प्रबंधन में भी क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है।
👉 इस तरह इंदौर प्रशासन की यह पहल दीपावली जैसे त्योहारों को स्वदेशी रंग देने के साथ-साथ प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री मोहन यादव के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को भी मजबूती प्रदान करती दिखाई दे रही है।
