भारतीय संस्कृति और कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर वादविवाद प्रतियोगिता: डॉ. भरत शर्मा ने व्यक्त किया विचार
इंदौर, मध्यप्रदेश – मध्यप्रदेश स्थापना के 70वें वर्ष के अवसर पर स्व. जी. पी. तिवारी (पूर्व अपर संचालक) की स्मृति में ज्ञान प्रेम एजुकेशन एंड वेलफेयर सोसाइटी द्वारा आयोजित अंतर्विद्यालीन वादविवाद प्रतियोगिता का आयोजन सी. एम. राइज़ शासकीय अहिल्या आश्रम, इंदौर में किया गया। प्रतियोगिता का विषय था, “वर्तमान परिप्रेक्ष्य में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की सार्थकता।” इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सदस्य डॉ. भरत शर्मा उपस्थित हुए।
कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय परिसर में स्थापित देवी सरस्वती माँ की मूर्ति का पूजन और माल्यार्पण करके किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत में दृष्टिबाधित छात्राओं द्वारा मध्यप्रदेश गान प्रस्तुत किया गया, जिसने भारतीयता और सांस्कृतिक रंग को और प्रगाढ़ बना दिया।
डॉ. भरत शर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का वास्तविक उद्देश्य मानवता के कल्याण और नैतिक मूल्यों के अनुसार होना चाहिए, न कि केवल लाभ के लिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जब AI में मानवीय संवेदनशीलता, संयम, संतुलन और सद्भाव को शामिल किया जाएगा, तो यह केवल “स्मार्ट मशीनें” बनाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि संवेदनशील सहयोगी भी तैयार करेगा। उन्होंने भारतीय संस्कृति के नैतिक दृष्टिकोण को AI के विकास में मार्गदर्शक बताया और कहा, “बुद्धियोगं उपाश्रित्य मच्चित्तः सततं भव,” अर्थात बुद्धि का उपयोग कल्याण के लिए होना चाहिए।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में मध्यप्रदेश शिक्षा विभाग की सहसंचालक श्रीमती अनिता चौहान उपस्थित हुईं। उन्होंने मध्यप्रदेश स्थापना दिवस और वादविवाद आयोजन की बधाई दी और विद्यार्थियों को मध्यप्रदेश की गौरवगाथा प्रस्तुत करके प्रेरित किया।
श्रीमती लिली डाबर ने प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को मार्गदर्शन प्रदान किया। इसके साथ ही ज्ञान प्रेम एजुकेशन एंड वेलफेयर सोसाइटी के मानद सचिव आशीष तिवारी ने संस्था का परिचय दिया। प्राचार्य रमेश कुमार सेन ने अतिथियों का सम्मान माला पहनाकर और स्मृति चिन्ह देकर किया। कार्यक्रम के दौरान, सी. एम. राइज़ शासकीय अहिल्या आश्रम, इंदौर और चंद्रावतीगंज कन्या उच्च माध्यमिक विद्यालय क्रमांक 1 की वार्षिक पुस्तिका का विमोचन भी अतिथियों के हाथों संपन्न हुआ।
वादविवाद प्रतियोगिता में निर्णायक मंडल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। निर्णायक मंडल में शामिल थीं:
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डॉ. भावना निगम – पीएच.डी. इन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, प्राध्यापक, IET देवी अहिल्या विश्वविद्यालय और AI सलाहकार (DEEPIOTICS)
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डॉ. अदिति खरात – प्राध्यापक, प्रेस्टीज कॉलेज एवं काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट
प्रतियोगिता में 20 विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। विद्यार्थियों ने पक्ष और विपक्ष दोनों में अपने विचार प्रस्तुत किए।
पक्ष में विजेता:
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प्रथम स्थान – कुमारी अमृता शर्मा, कक्षा 12वी, सराफा विद्या निकेतन स्कीम नंबर 71, इंदौर
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द्वितीय स्थान – कुमारी समृद्धि बघेल, कक्षा 9वी, सांदीपनी शासकीय अहिल्या आश्रम कन्या उ. मा. वि. क्र. 1, इंदौर
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तृतीय स्थान – कुमारी जया पंवार, कक्षा 12वी, सांदीपनी शासकीय अहिल्या आश्रम
विपक्ष में विजेता:
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प्रथम स्थान – कुमारी कशिश पचौरी, कक्षा 12वी, सांदीपनी शासकीय अहिल्या आश्रम
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द्वितीय स्थान – कुमारी रागिनी राजभर, कक्षा 10वी, सांदीपनी शासकीय अहिल्या आश्रम
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तृतीय स्थान – अरुण तरुण, कक्षा 10वी, सराफा विद्या निकेतन, महू

प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने प्रभावी और सटीक तर्क प्रस्तुत किए, जिससे जजों द्वारा पक्ष और विपक्ष की विचारधारा का सटीक मूल्यांकन किया गया। विजेताओं को पुरस्कार राशि और प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।
कार्यक्रम का संचालन संस्था के उप प्राचार्य श्री विपिन कुमार जैन ने किया। आभार प्रदर्शन श्री श्याम जी पांडे और श्रीमती रूपाली तिवारी द्वारा किया गया।
इस अवसर पर डॉ. भरत शर्मा ने यह भी उल्लेख किया कि AI तकनीक और भारतीय संस्कृति का संयोजन विश्व स्तर पर भारत को “वैश्विक गुरु” के रूप में प्रस्तुत करने में सहायक होगा। उन्होंने कहा कि नैतिक मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं को AI में शामिल करना अत्यंत महत्वपूर्ण है ताकि यह केवल मशीनरी और तकनीकी प्रगति तक सीमित न रहे, बल्कि समाज में सकारात्मक योगदान दे।
प्रतियोगिता का यह आयोजन न केवल विद्यार्थियों के वैचारिक विकास का माध्यम बना, बल्कि उन्हें भारत के सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों के महत्व से भी अवगत कराया। इस तरह की गतिविधियाँ शिक्षा और समाज में AI के उपयोग को नैतिक और संवेदनशील दृष्टिकोण से जोड़ने में सहायक होती हैं।
इस आयोजन ने विद्यार्थियों, शिक्षकों और संस्था के पदाधिकारियों को वास्तविक दुनिया के वाद-विवाद, तर्कशक्ति और नेतृत्व कौशल का अनुभव प्रदान किया। साथ ही यह कार्यक्रम मध्यप्रदेश स्थापना दिवस की गरिमा और उत्साह को और बढ़ाने में सफल रहा।
निष्कर्षतः, यह वादविवाद प्रतियोगिता न केवल AI और तकनीकी ज्ञान पर आधारित थी, बल्कि भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और मानवीय दृष्टिकोण को भी प्रदर्शित करने वाली एक उत्कृष्ट पहल रही। डॉ. भरत शर्मा के मार्गदर्शन और शिक्षकों के समर्थन से यह आयोजन विद्यार्थियों के लिए ज्ञान और प्रेरणा का आदर्श मंच साबित हुआ।

