पारिवारिक कानूनों के दुरुपयोग और पुरुष आत्महत्या रोकथाम के लिए भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट ने प्रधानमंत्री मोदी को भेजा पत्र
नई दिल्ली, 9 नवम्बर 2025:
भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट (Indian Human Rights Sahkar Trust) ने आज माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को एक महत्वपूर्ण पत्र प्रेषित किया है, जिसमें पारिवारिक कानूनों के दुरुपयोग, पुरुषों में मानसिक तनाव, परिवारिक विघटन और बढ़ती पुरुष आत्महत्या की घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की गई है। ट्रस्ट ने पत्र में कहा कि वर्तमान में कुछ पारिवारिक और आपराधिक कानूनों में असंतुलन के कारण कई निर्दोष पुरुष एवं उनके परिवार सामाजिक, आर्थिक और मानसिक शोषण का सामना कर रहे हैं।
पत्र में विशेष रूप से यह बताया गया कि झूठे मुकदमों और झूठी FIR की बढ़ती प्रवृत्ति ने पुरुषों में आत्महत्या की घटनाओं को बढ़ावा दिया है। न्यायिक प्रक्रिया में देरी और सामाजिक अपमान ने भी कई पुरुषों को जीवन संकट की स्थिति में ला दिया है।
ट्रस्ट द्वारा सुझाए गए पांच मुख्य सुधार
भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट ने सरकार से पाँच महत्वपूर्ण सुधार की मांग की है, ताकि कानून और समाज में संतुलन स्थापित हो सके:
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साक्ष्य आधारित कानून:
ट्रस्ट का सुझाव है कि पारिवारिक और आपराधिक कानून लिंग आधारित नहीं, बल्कि साक्ष्य आधारित बनाए जाएं। इससे निर्दोष पुरुषों पर झूठे आरोप लगाने की प्रवृत्ति कम होगी और न्याय प्रणाली अधिक पारदर्शी बनेगी। -
झूठे मामलों पर कठोर दंड:
ट्रस्ट ने कहा कि झूठे मामलों और झूठी FIR पर सख्त दंड का प्रावधान होना चाहिए। इससे कानून का दुरुपयोग करने वालों में डर पैदा होगा और न्याय की वास्तविक भावना को बल मिलेगा। -
पुरुषों के लिए हेल्पलाइन और परामर्श केंद्र:
ट्रस्ट ने सरकार से आग्रह किया है कि पुरुषों के मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए सरकारी हेल्पलाइन, परामर्श केंद्र और आश्रय गृह स्थापित किए जाएं। इससे तनावग्रस्त पुरुषों और उनके परिवारों को तत्काल सहायता उपलब्ध हो सकेगी। -
पुलिस और न्यायिक अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण:
ट्रस्ट ने सुझाव दिया कि पुलिस और न्यायिक अधिकारियों को जेंडर न्यूट्रल संवेदनशीलता प्रशिक्षण दिया जाए। यह कदम सुनिश्चित करेगा कि सभी मामलों में निष्पक्ष और संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाया जाए। -
राष्ट्रीय अध्ययन सेल का गठन:
ट्रस्ट ने यह भी मांग की कि पुरुष आत्महत्या और उससे जुड़े सामाजिक कारणों का अध्ययन करने के लिए राष्ट्रीय अध्ययन सेल का गठन किया जाए। इससे नीति निर्माण और रोकथाम के लिए ठोस डेटा उपलब्ध होगा।
ट्रस्ट के पदाधिकारियों के संदेश
राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री सुनील सिंह यादव का संदेश
“हमारा उद्देश्य किसी विशेष वर्ग के खिलाफ खड़ा होना नहीं है। हमारा उद्देश्य न्याय में संतुलन स्थापित करना है। परिवार समाज की नींव है। यदि कानूनों का उपयोग न्याय के बजाय प्रतिशोध के लिए होने लगे तो समाज का स्वरूप ही बिगड़ जाता है। प्रधानमंत्री जी से हमारी अपेक्षा है कि वे इस गंभीर विषय पर ठोस कदम उठाएँगे।”
युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष कृष्णा यादव का संदेश
“आज के युवा मानसिक तनाव और पारिवारिक विवादों के कारण टूट रहे हैं। हमें ऐसे तंत्र की आवश्यकता है जहाँ परिवार बचें, संवाद बढ़े, और न्याय सभी के लिए समान हो। केवल तभी समाज स्वस्थ और मजबूत रह सकता है।”
राष्ट्रीय सचिव शिवम तिवारी का संदेश
“कानून तभी सफल होता है जब वह निष्पक्ष हो। हमारा कर्तव्य है कि हम समाज में न्याय की समान भावना को बनाए रखें। यह सुधार केवल पुरुषों के लिए नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज के भविष्य के लिए आवश्यक हैं।”
मीडिया प्रभारी का संदेश
“मीडिया और समाज दोनों को इस मुद्दे को संवेदनशीलता और समझदारी के साथ पेश करने की आवश्यकता है। पुरुषों का दर्द अदृश्य न रहे। हम तथ्य, शोध और संवेदना पर आधारित संवाद की अपील करते हैं।”
अन्य पदाधिकारियों का संयुक्त संदेश
“समाज तभी मजबूत होता है जब पीड़ित की पहचान लिंग से नहीं, बल्कि दर्द और पीड़ा से की जाए। न्याय का पलड़ा बराबर होना चाहिए। यह सुधार केवल पुरुषों के लिए नहीं, बल्कि पूरे परिवार के कल्याण के लिए आवश्यक हैं।”
क्यों है यह पत्र महत्वपूर्ण?
भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट ने इस पत्र के माध्यम से यह स्पष्ट किया है कि पारिवारिक कानूनों का दुरुपयोग और पुरुषों में बढ़ती आत्महत्या सिर्फ व्यक्तिगत समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक और राष्ट्रीय स्तर की चिंता है। ट्रस्ट के अनुसार:
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कई पुरुष मानसिक तनाव, सामाजिक अपमान और न्यायिक प्रक्रिया में देरी के कारण जीवन संकट में पहुँच रहे हैं।
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पारिवारिक और सामाजिक संरचना को सुरक्षित रखने के लिए कानूनों में संतुलन आवश्यक है।
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मानसिक स्वास्थ्य, परामर्श और सुरक्षा तंत्र की कमी पुरुषों और उनके परिवारों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रही है।
इसलिए ट्रस्ट ने प्रधानमंत्री से अपेक्षा जताई है कि वे न्याय के संतुलन, सुरक्षित पारिवारिक ढांचे और पुरुषों के मानसिक स्वास्थ्य की रक्षा के लिए तुरंत हस्तक्षेप करेंगे।
निष्कर्ष
भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट का यह कदम समाज में न्याय और संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है। ट्रस्ट का मानना है कि कानून तभी समाज के लिए उपयोगी है जब वह निष्पक्ष, संवेदनशील और साक्ष्य आधारित हो।
यह पहल पुरुषों की बढ़ती आत्महत्या, मानसिक तनाव और पारिवारिक विघटन जैसे गंभीर सामाजिक मुद्दों पर राष्ट्रीय ध्यान आकर्षित करने का प्रयास है। ट्रस्ट ने सभी स्तरों के अधिकारियों, न्यायालय और मीडिया से अपील की है कि वे इस मुद्दे को गंभीरता से लें और समाज में न्याय और समानता सुनिश्चित करने में सहयोग दें।
