भारतीय संविधान दिवस पर शासकीय महाविद्यालय नागदा में हुआ संविधान की उद्देशिका का सामूहिक वाचन
भारतीय संविधान दिवस के अवसर पर शासकीय महाविद्यालय नागदा में मध्यप्रदेश शासन के निर्देशानुसार विविध शैक्षिक और जागरूकता कार्यक्रमों का सफल आयोजन किया गया। महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. पी. भास्कर रेड्डी के मार्गदर्शन में आयोजित इन कार्यक्रमों का उद्देश्य विद्यार्थियों में संविधान की मूल भावना, नागरिक अधिकारों, कर्तव्यों और राष्ट्रीय एकता के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।
कार्यक्रमों का आयोजन भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ, स्वामी विवेकानंद कैरियर मार्गदर्शन योजना प्रकोष्ठ और राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। संविधान दिवस की इस शृंखला में प्रश्नमंच प्रतियोगिता और स्लोगन लेखन प्रतियोगिता ने छात्रों में विशेष उत्साह पैदा किया। प्रतिभागियों ने भारतीय संविधान, स्वतंत्रता आंदोलन, संविधान सभा और मौलिक अधिकारों से जुड़े प्रश्नों में उत्साहपूर्वक भाग लिया।
दीप प्रज्वलन से हुआ कार्यक्रमों का शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथियों द्वारा मां सरस्वती तथा भारतीय संविधान के शिल्पकार डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर की प्रतिमाओं पर दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. वासुदेव जटावन और डॉ. सुनील प्रसाद उपस्थित रहे, जिन्होंने संविधान दिवस के महत्व पर प्रकाश डाला।
अध्यक्षता महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. पी. भास्कर रेड्डी ने की। कार्यक्रम के प्रमुख वक्ताओं में डॉ. ओ.पी. परमार और सहायक प्राध्यापक प्रांजल रंजन अवस्थी शामिल रहे, जिन्होंने संविधान के विभिन्न पहलुओं पर विद्यार्थियों को जानकारी दी।
संविधान सभा और संविधान निर्माण पर विशेषज्ञ वक्ताओं का मार्गदर्शन
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. ओ.पी. परमार ने विद्यार्थियों को संविधान सभा के गठन, संविधान निर्माण की प्रक्रिया, प्रारूप समिति और भारतीय संविधान की विशेषताओं के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान दुनिया के सबसे प्रगतिशील, समावेशी और मानव-केंद्रित संविधानों में एक है, जिसमें नागरिकों के अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों को भी समान रूप से महत्व दिया गया है।
दूसरे वक्ता प्रांजल रंजन अवस्थी ने संविधान निर्माताओं की दूरदर्शिता, राष्ट्र निर्माण की भावना और भारत की एकता, अखंडता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संविधान सिर्फ एक दस्तावेज नहीं, बल्कि देश की आत्मा और भारत की विविधता का प्रतिबिंब है।
प्राचार्य ने कराया संविधान की उद्देशिका का सामूहिक वाचन
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्राचार्य डॉ. पी. भास्कर रेड्डी ने कहा कि संविधान दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि नागरिक अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूकता का महोत्सव है। उन्होंने कहा कि आज के युवा वर्ग को संविधान के सिद्धांतों को समझकर उन्हें अपने व्यवहार और जीवन में अपनाना चाहिए।
इस अवसर पर प्राचार्य के नेतृत्व में सभी उपस्थित अतिथियों, प्राध्यापकों और छात्र-छात्राओं द्वारा संविधान की उद्देशिका (Preamble) का सामूहिक वाचन किया गया। यह क्षण कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा, जिसमें पूरे परिसर में एकता, लोकतंत्र और संकल्प की भावना का संचार हुआ।
संविधान निर्माताओं का किया गया स्मरण
इस अवसर पर महाविद्यालय परिवार ने संविधान निर्माण में अहम भूमिका निभाने वाले महानायकों का स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इनमें प्रमुख रूप से
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सर बी.एन. राव,
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डॉ. राजेंद्र प्रसाद,
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पंडित जवाहरलाल नेहरू,
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सरदार वल्लभभाई पटेल,
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डॉ. बी.आर. आम्बेडकर,
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मौलाना अबुल कलाम आजाद,
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राजकुमारी अमृत कौर,
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सेठ गोविंद दास,
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हरी विष्णु कामथ,
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डॉ. हरिसिंह गौर
आदि महापुरुषों के योगदान को कृतज्ञतापूर्वक याद किया गया।
प्रतियोगिताओं में छात्रों की रही उत्साही भागीदारी
संविधान दिवस के अंतर्गत आयोजित प्रश्नमंच प्रतियोगिता और स्लोगन लेखन प्रतियोगिता में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने भाग लिया। विद्यार्थियों ने “संविधान सर्वोपरि”, “नागरिक अधिकार हमारी पहचान”, “एकता में ही भारत की शक्ति” जैसे प्रभावशाली स्लोगन प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम का संचालन रासेयो कार्यक्रम अधिकारी श्री सचिन तिवारी ने किया। अंत में डॉ. शिवशंकर पटेल ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
बड़ी संख्या में प्राध्यापकों व विद्यार्थियों की उपस्थिति
कार्यक्रम में डॉ. के.सी. मिश्रा, डॉ. एम.एस. मंसूरी, डॉ. आशाराम चौहान, सुश्री अंजू ठाकुर, डॉ. महेशचंद्र पड़ीहार, सी.एल. डोडिया सहित समस्त स्टाफ और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं शामिल हुए। सभी ने संविधान दिवस को राष्ट्रीय गौरव और प्रेरणा के रूप में मनाया।
संवाददाता : जीवन लाल जैन


