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सुखोई क्रैश में शहीद फ्लाइट लेफ्टिनेंट Purvesh Duragkar, ऑपरेशन सिंदूर में हिस्सा, 10 दिन पहले परिवार से मिले

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Published On: 6 March 2026
Indian Air Force Pilot Purvesh Duragkar Dies in Assam Sukhoi-30 Crash
— Indian Air Force Pilot Purvesh Duragkar Dies in Assam Sukhoi-30 Crash

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सुखोई क्रैश में शहीद हुए फ्लाइट लेफ्टिनेंट Purvesh Duragkar: ऑपरेशन सिंदूर के नायक

असम में हुई सुखोई-30 एमकेआई फाइटर जेट क्रैश की घटना ने पूरे देश को गहरे दुख में डुबो दिया है। इस दुखद हादसे में दो बहादुर पायलटों ने अपनी जान गंवाई, जिनमें फ्लाइट लेफ्टिनेंट Purvesh Duragkar भी शामिल थे। पुरवेश का निधन केवल उनके परिवार के लिए ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए एक व्यक्तिगत और राष्ट्रीय क्षति है। उनकी बहादुरी और समर्पण ने उन्हें भारतीय वायु सेना के गौरवशाली पायलटों की सूची में शामिल कर दिया।

हादसा और घटनाक्रम

घटना गुरुवार शाम को हुई जब भारतीय वायु सेना का सुखोई-30 एमकेआई फाइटर जेट ज़ोरहाट एयरबेस से रूटीन मिशन के लिए उड़ान भरा। थोड़ी ही देर बाद जेट रडार से गायब हो गया। खोज अभियान के दौरान असम के करबी आंगलोंग इलाके में मलबा मिला। इस हादसे में पुरवेश के साथ स्क्वाड्रन लीडर अनुज का भी निधन हुआ। यह हादसा भारतीय वायु सेना के लिए एक बड़ी क्षति है और इसकी जांच अब आधिकारिक तौर पर जारी है।

ऑपरेशन सिंदूर में योगदान

फ्लाइट लेफ्टिनेंट पुरवेश दुरागकर सिर्फ एक कुशल पायलट ही नहीं थे, बल्कि उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ भारत की महत्वपूर्ण कार्रवाइयों में हिस्सा लिया था। वे ऑपरेशन सिंदूर का हिस्सा रहे, जो जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के बाद शुरू किया गया था। इस ऑपरेशन में भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार इस अभियान में सौ से अधिक आतंकियों को समाप्त किया गया।

पुरवेश के पिता रवींद्र दुरागकर ने बताया कि उन्हें बेटे के इस योगदान का पता ऑपरेशन खत्म होने के करीब 15 दिन बाद चला। इस दौरान पुरवेश के पास फोन नहीं था और कई दिनों तक परिवार उनसे संपर्क में नहीं रह सका। ऑपरेशन में उनकी बहादुरी और समर्पण ने पूरे परिवार को गर्वित किया।

Purvesh Duragkar का परिवार और व्यक्तिगत जीवन

पुरवेश नागपुर के रहने वाले थे। उनका परिवार माता-पिता और एक बहन पर आधारित था। उनके पिता रवींद्र दुरागकर ने साझा किया कि पुरवेश अपने परिवार के प्रति बहुत स्नेही और सम्मानपूर्ण थे। वह अपने साथियों का भी अत्यधिक सम्मान करते थे। हादसे से एक दिन पहले ही पुरवेश ने अपने पिता से फोन पर बातचीत की थी। वह 10 दिन पहले ही अपने परिवार से मिलने आए थे। यह घटना परिवार के लिए अत्यंत दुखद और हृदयविदारक है।

भारतीय वायु सेना में योगदान

पुरवेश का भारतीय वायु सेना में योगदान सराहनीय था। वह न केवल एक कुशल पायलट थे बल्कि अपने अनुभव और ज्ञान को अपने साथियों के साथ साझा करने वाले भी थे। फ्लाइट लेफ्टिनेंट के रूप में उन्होंने कई कठिन मिशनों को अंजाम दिया और राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाई। उनका अनुशासन, समर्पण और बहादुरी नई पीढ़ी के पायलटों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

ऑपरेशन सिंदूर का महत्व

ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सशस्त्र बलों के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मिशन के रूप में जाना जाता है। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद यह ऑपरेशन आतंकवाद के खिलाफ भारत की निर्णायक कार्रवाई के रूप में किया गया। ऑपरेशन के दौरान भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकवादी ठिकानों पर सटीक हमले किए। इस अभियान में शहीद पुरवेश जैसे बहादुर पायलटों की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण रही।

देश और जनता की संवेदना

पुरवेश की शहादत के बाद पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई। सोशल मीडिया, समाचार चैनल और नागरिकों ने उनके योगदान और बहादुरी को याद किया। लोग उनके परिवार के प्रति संवेदना जता रहे हैं और उन्हें राष्ट्रीय नायक के रूप में सम्मानित किया जा रहा है। उनके पिता ने भी देशवासियों से अपील की कि वे अपने जवानों के साहस और समर्पण को याद रखें।

शिक्षा और करियर

पुरवेश की शिक्षा और करियर ने उन्हें एक उत्कृष्ट पायलट बनाया। उन्होंने वायु सेना में कठिन प्रशिक्षण कार्यक्रमों को पूरा किया और अपने कौशल से कई मिशनों को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। उनका समर्पण और उत्साह नए पायलटों के लिए प्रेरणास्त्रोत रहा।

निष्कर्ष

फ्लाइट लेफ्टिनेंट पुरवेश दुरागकर की शहादत केवल उनके परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरणा है। उनका योगदान, बहादुरी और समर्पण भारतीय वायु सेना और देशवासियों के लिए हमेशा यादगार रहेगा। सुखोई क्रैश की यह दुखद घटना हमें याद दिलाती है कि देश की सेवा में हमारे जवान कितनी बड़ी कुर्बानी देते हैं।

पुरवेश और उनके साथियों की याद में भारत हमेशा उन्हें सम्मान देगा। उनके कार्य और साहस नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बने रहेंगे और यह साबित करता है कि शौर्य और समर्पण कभी नहीं मरते।

 

 

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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