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India Retail Inflation: मई में बढ़ी महंगाई, 3.93% पर पहुंची, लेकिन अभी भी RBI के दायरे में

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Published On: 13 June 2026
India RBI
— मई में बढ़ी खुदरा महंगाई देश में Retail Inflation 3.93% पर पहुंची, हालांकि अभी भी RBI के लक्ष्य दायरे में बनी हुई

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India Retail Inflation: मई में बढ़ी महंगाई, 3.93% पर पहुंची, लेकिन अभी भी RBI के दायरे में

India Retail Inflation: देश की अर्थव्यवस्था से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है। भारत में खुदरा महंगाई दर (Retail Inflation) में एक बार फिर बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से खाद्य पदार्थों की कीमतों में आए उतार-चढ़ाव के कारण देखी गई है, जिसने आम लोगों के घरेलू बजट पर हल्का असर डाला है।

शुक्रवार को जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मई 2026 में भारत की खुदरा महंगाई दर बढ़कर 3.93 प्रतिशत पर पहुंच गई है। यह अप्रैल 2026 के मुकाबले अधिक है, जब महंगाई दर 3.48 प्रतिशत दर्ज की गई थी।

अप्रैल से मई तक महंगाई में बढ़ोतरी

आंकड़ों के मुताबिक, पिछले एक महीने में महंगाई दर में मामूली लेकिन स्पष्ट वृद्धि देखने को मिली है। अप्रैल की तुलना में मई में करीब आधा प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से खाद्य वस्तुओं, सब्जियों और कुछ आवश्यक उपभोक्ता उत्पादों की कीमतों में उतार-चढ़ाव की वजह से हुई है।

RBI के लक्ष्य सीमा में अभी भी महंगाई

हालांकि महंगाई दर में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन राहत की बात यह है कि यह अब भी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के तय लक्ष्य के भीतर बनी हुई है।

RBI ने देश में खुदरा महंगाई को 4 प्रतिशत के लक्ष्य (±2 प्रतिशत के दायरे के साथ) में बनाए रखने का लक्ष्य रखा है। मई का 3.93% का आंकड़ा अभी भी इस सीमा के भीतर है, जिसे अर्थशास्त्री “कम्फर्ट जोन” मानते हैं।

आम जनता पर कितना असर?

महंगाई दर में हल्की बढ़ोतरी का सीधा असर आम जनता की जेब पर देखने को मिल सकता है। खासकर रोजमर्रा की जरूरत की चीजें जैसे:

  • खाद्य सामग्री
  • सब्जियां
  • ईंधन से जुड़ी लागत
  • परिवहन खर्च

हालांकि, फिलहाल स्थिति नियंत्रण में मानी जा रही है क्योंकि वृद्धि तेज नहीं है।

क्या आगे मिलेगी राहत?

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि आने वाले महीनों में महंगाई पर कुछ नियंत्रण रह सकता है। इसके पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण हैं:

  • अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में गिरावट
  • शेयर बाजार में सकारात्मक रुझान
  • लॉजिस्टिक्स और इनपुट कॉस्ट में संभावित कमी

इन सभी कारणों से घरेलू बाजार में कीमतों पर दबाव कम होने की उम्मीद जताई जा रही है।

ग्लोबल फैक्टर्स का असर

वैश्विक स्तर पर भी आर्थिक हालात का असर भारत की महंगाई दर पर पड़ता है। तेल की कीमतें, सप्लाई चेन और अंतरराष्ट्रीय मांग जैसे फैक्टर्स सीधे तौर पर घरेलू कीमतों को प्रभावित करते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैश्विक बाजार स्थिर रहता है तो भारत में महंगाई को नियंत्रित रखने में मदद मिलेगी।

निष्कर्ष

मई 2026 में भारत की खुदरा महंगाई दर में हल्की बढ़ोतरी जरूर हुई है, लेकिन यह अभी भी RBI के तय दायरे में बनी हुई है। इसका मतलब है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, हालांकि आम लोगों को खाद्य और जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर नजर बनाए रखनी होगी।

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