गाजा में शांति पहल: America ने भारत को ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने का न्योता दिया
वॉशिंगटन। America राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को गाजा में शांति बहाली और स्थिरता स्थापित करने के लिए बनाए जा रहे नए ‘बोर्ड ऑफ पीस’ (Board of Peace) का हिस्सा बनने का न्योता दिया है। यह पहल गाजा में चल रहे संघर्ष को समाप्त करने और शांति प्रक्रिया को मजबूत करने के उद्देश्य से बनाई जा रही है। ट्रंप की 20 सूत्रीय शांति योजना के दूसरे चरण के तहत यह बोर्ड काम करेगा और इसमें शामिल देश मानवीय सहायता, पुनर्निर्माण और क्षेत्रीय स्थिरता को सुनिश्चित करने के लिए अपनी भूमिका निभाएंगे।
भारत को यह न्योता उसकी वैश्विक साख, संतुलित विदेश नीति और मध्य पूर्व में शांति प्रयासों में योगदान को देखते हुए दिया गया है। माना जा रहा है कि यदि भारत इस बोर्ड में शामिल होता है, तो यह पश्चिम एशिया में उसकी भूमिका को और प्रभावशाली बना देगा। हालांकि, अभी तक भारत की ओर से इस न्योते पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
‘बोर्ड ऑफ पीस’ क्या है?
व्हाइट हाउस ने हाल ही में बोर्ड ऑफ पीस के सदस्यों की सूची जारी की। यह बोर्ड गाजा में शांति, स्थिरता, पुनर्निर्माण और लंबे समय तक विकास की निगरानी करेगा। बोर्ड का नेतृत्व खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप करेंगे। बोर्ड के सदस्यों में कई बड़े और प्रभावशाली अंतरराष्ट्रीय नाम शामिल हैं।
सदस्यों में प्रमुख हैं:
- America विदेश मंत्री मार्को रुबियो
- ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर
- ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ
- वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा
- ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर
- अपोलो ग्लोबल मैनेजमेंट के सीईओ मार्क रोवन
- America के उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रॉबर्ट गेब्रियल
इसके अलावा, तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान और कतर के राजनयिक अली अल थवाड़ी को गाजा एग्जीक्यूटिव बोर्ड में शामिल किया गया है।
व्हाइट हाउस के अनुसार, बोर्ड के सदस्य गाजा की स्थिति पर नजर रखेंगे, प्रशासन और शासन व्यवस्था को मजबूत करेंगे, क्षेत्रीय देशों से रिश्तों को सुधारने में योगदान देंगे, निवेश और फंडिंग जुटाने के साथ-साथ गाजा का पुनर्निर्माण और विकास सुनिश्चित करेंगे।
बोर्ड की जिम्मेदारी और कार्यक्षेत्र
बोर्ड ऑफ पीस के सदस्य कई अहम क्षेत्रों की निगरानी करेंगे। इनमें शामिल हैं:
- गाजा में प्रशासन और शासन व्यवस्था का सुदृढ़ीकरण
- स्थानीय और क्षेत्रीय देशों के साथ सहयोग और संबंधों को मजबूत करना
- गाजा के पुनर्निर्माण और बुनियादी ढांचे के विकास को प्रोत्साहित करना
- निवेश आकर्षित करना और बड़े पैमाने पर फंडिंग जुटाना
- नागरिकों के जीवन को स्थिर करना और समाजिक सेवाओं की बहाली सुनिश्चित करना
बोर्ड का यह प्रयास ट्रंप की शांति योजना के दूसरे चरण के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है। इसका उद्देश्य गाजा में दीर्घकालिक स्थिरता स्थापित करना और क्षेत्रीय संघर्ष को कम करना है।
सदस्यता और शुल्क: क्या सच है?
मीडिया में यह खबर आई थी कि गाजा शांति बोर्ड में शामिल होने के लिए देशों को एक अरब अमेरिकी डॉलर का भुगतान करना पड़ सकता है। हालांकि, व्हाइट हाउस ने इसे भ्रामक बताया। उसने स्पष्ट किया कि बोर्ड में शामिल होने के लिए किसी न्यूनतम शुल्क की आवश्यकता नहीं है। व्हाइट हाउस ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि यह पहल उन देशों को स्थायी सदस्यता देती है जो शांति, सुरक्षा और स्थिरता के लिए प्रतिबद्धता दिखाते हैं।
बोर्ड के सदस्यों का कार्यकाल तीन वर्षों से अधिक नहीं होगा और सदस्यता के नवीनीकरण का अधिकार बोर्ड के अध्यक्ष को होगा।

भारत के लिए क्या मायने रखता है?
भारत के लिए इस न्योते का बहुत महत्व है। देश की संतुलित विदेश नीति और मध्य पूर्व में शांति स्थापना में उसकी भूमिका को देखते हुए इसे बोर्ड ऑफ पीस में शामिल किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत इस पहल में शामिल होता है, तो यह पश्चिम एशिया में उसकी भूमिका और साख को और मजबूत करेगा।
भारत गाजा में मानवीय सहायता, पुनर्निर्माण और शांति प्रक्रिया में अपनी तकनीकी और प्रशासनिक विशेषज्ञता का योगदान दे सकता है। इसके अलावा, यह कदम भारत की वैश्विक कूटनीतिक स्थिति को भी मजबूत करेगा।
जमीन पर काम कौन देखेगा?
गाजा में बोर्ड के पहलू की निगरानी और कार्यान्वयन के लिए निकोलाय म्लादेनोव को हाई रिप्रेजेंटेटिव नियुक्त किया गया है। वे बोर्ड और नेशनल कमेटी फॉर द एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ गाजा (NCAG) के बीच कड़ी का काम करेंगे।
एनसीएजी का नेतृत्व अली शाअथ करेंगे। उनकी जिम्मेदारी गाजा में जरूरी सार्वजनिक सेवाओं की बहाली, नागरिक संस्थानों के पुनर्निर्माण, आम लोगों के जीवन को स्थिर करना और भविष्य में आत्मनिर्भर शासन की नींव रखना है।
सुरक्षा व्यवस्था
गाजा में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मेजर जनरल जैस्पर जेफर्स को इंटरनेशनल स्टेबलाइजेशन फोर्स (ISF) का कमांडर नियुक्त किया गया है। वे सुरक्षा संचालन, हथियारों से मुक्त माहौल, मानवीय मदद और निर्माण सामग्री की सुरक्षित आपूर्ति सुनिश्चित करेंगे।
बोर्ड का महत्व
बोर्ड ऑफ पीस का मुख्य उद्देश्य गाजा में स्थिरता और विकास को सुनिश्चित करना है। यह स्थानीय प्रशासन, क्षेत्रीय देशों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के बीच सहयोग का सेतु बनेगा। इसके माध्यम से निवेश आकर्षित किया जाएगा और मानवीय सहायता को प्रभावी ढंग से वितरित किया जा सकेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल गाजा में लंबे समय तक स्थिरता और शांति स्थापित करने में मदद करेगी। इसके अलावा, यह क्षेत्रीय देशों और वैश्विक शक्तियों के बीच विश्वास और सहयोग बढ़ाने का माध्यम भी बनेगा।
निष्कर्ष
America द्वारा भारत को बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का न्योता देना एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम है। यह न केवल भारत की वैश्विक छवि को मजबूती देगा, बल्कि पश्चिम एशिया में शांति प्रक्रिया में उसके योगदान को भी बढ़ावा देगा।
यदि भारत इस पहल में सक्रिय रूप से शामिल होता है, तो यह गाजा में शांति और स्थिरता की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित हो सकता है। बोर्ड के कार्यान्वयन से न केवल गाजा में पुनर्निर्माण होगा, बल्कि नागरिक जीवन और सुरक्षा में सुधार भी आएगा।
इस प्रकार, ट्रंप की 20 सूत्रीय शांति योजना के दूसरे चरण का यह पहल गाजा के भविष्य और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए अहम मानी जा रही है।
