फिल्म टॉक्सिक के टीज़र पर उठे सवाल: अश्लीलता के आरोपों को लेकर भारतीय मानव अधिकार सहकार Trust का तीखा विरोध
यश स्टारर फिल्म टॉक्सिक: ए फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स के हाल ही में जारी किए गए टीज़र को लेकर देश के विभिन्न हिस्सों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। टीज़र में दिखाए गए कुछ दृश्य अश्लील, आपत्तिजनक और सामाजिक मर्यादाओं के विपरीत बताए जा रहे हैं। इस मामले में भारतीय मानव अधिकार सहकार Trust ने सार्वजनिक रूप से कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए इसे समाज, महिलाओं और बच्चों की गरिमा पर सीधा हमला बताया है। ट्रस्ट का कहना है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर ऐसी सामग्री को बढ़ावा देना, जो सामाजिक मूल्यों को ठेस पहुँचाती हो, स्वीकार्य नहीं है। Trust ने इस मुद्दे पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ में अश्लीलता अस्वीकार्य: Trust
भारतीय मानव अधिकार सहकार Trust के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री सुनील सिंह यादव ने जारी अपने आधिकारिक बयान में कहा कि रचनात्मक स्वतंत्रता का अर्थ यह नहीं है कि समाज में अश्लीलता फैलाई जाए या महिलाओं को वस्तु की तरह प्रस्तुत किया जाए। उन्होंने कहा, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर समाज में अश्लीलता फैलाना, महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुँचाना और बच्चों के मानसिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव डालना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। फिल्म ‘टॉक्सिक’ के टीज़र में दिखाए गए दृश्य न केवल नैतिक मूल्यों के विरुद्ध हैं, बल्कि भारतीय संस्कृति और सामाजिक मर्यादाओं पर भी गंभीर प्रहार करते हैं। उन्होंने आगे कहा कि भारत जैसे सांस्कृतिक रूप से समृद्ध देश में सिनेमा केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि सामाजिक दिशा तय करने वाला माध्यम भी है। ऐसे में फिल्म निर्माताओं की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है।
बच्चों और युवाओं पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंता
Trust ने अपने बयान में इस बात पर भी विशेष जोर दिया कि आज के डिजिटल युग में बच्चे और युवा सोशल मीडिया तथा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से इस प्रकार के कंटेंट तक आसानी से पहुँच बना लेते हैं। ऐसे में अश्लील और सेक्सुअली एक्सप्लिसिट दृश्यों का प्रसार उनके मानसिक और नैतिक विकास के लिए घातक सिद्ध हो सकता है। Trust का कहना है कि इस तरह की सामग्री बच्चों के चरित्र निर्माण को प्रभावित करती है और समाज में विकृत सोच को बढ़ावा देती है। ट्रस्ट ने सरकार और सेंसर बोर्ड को इस दिशा में और अधिक सतर्कता बरतने की आवश्यकता पर बल दिया है।
CBFC और कानूनों का हवाला
भारतीय मानव अधिकार सहकार Trust ने स्पष्ट किया कि सिनेमैटोग्राफ एक्ट और CBFC की गाइडलाइंस में अश्लील एवं आपत्तिजनक कंटेंट को लेकर स्पष्ट प्रावधान मौजूद हैं। इसके बावजूद इस तरह की सामग्री का सार्वजनिक मंचों पर आना गंभीर चिंता का विषय है। Trustके पदाधिकारियों का कहना है कि कानून किसी भी रूप में महिलाओं को केवल मनोरंजन की वस्तु के रूप में प्रस्तुत करने की अनुमति नहीं देता। इससे समाज में गलत संदेश जाता है और महिला सम्मान को गहरा आघात पहुँचता है।
संगठन के पदाधिकारियों ने रखी एकजुट राय
इस मुद्दे पर संगठन के शिवम तिवारी, कृष्णा यादव, प्रेम कुमार वैद्य, साधना सेठी, सौंपा चटर्जी, अनीता दुबे, मनीष गुप्ता, युवराज सिंह राठौर, गोकुल सोलंकी, जीवन लाल जैन, सोना जैन, भावेश नाहर, अंकित जैन और अनिल जैन ने भी एक स्वर में विरोध जताया। उन्होंने संयुक्त रूप से कहा कि CBFC को फिल्म के टीज़र की तत्काल समीक्षा करनी चाहिए और आपत्तिजनक अंशों को बिना विलंब हटाया जाना चाहिए। साथ ही, उन्होंने निर्माता और संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों पर कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की।
Trust की प्रमुख मांगें
भारतीय मानव अधिकार सहकार Trust ने इस मामले में चार प्रमुख मांगें सामने रखी हैं:
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फिल्म “टॉक्सिक” के टीज़र की तत्काल उच्च स्तरीय समीक्षा कराई जाए।
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टीज़र में शामिल सभी आपत्तिजनक और अश्लील दृश्यों को तुरंत हटाया जाए।
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भविष्य में इस प्रकार की सामग्री पर रोक लगाने के लिए और अधिक सख्त नियम लागू किए जाएं।
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नियमों का उल्लंघन करने वाले निर्माता एवं जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
समाजहित और महिला सम्मान के लिए प्रतिबद्ध संगठन
Trust ने दोहराया कि भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट समाजहित, महिला सम्मान और बाल संरक्षण के मुद्दों पर हमेशा सजग और सक्रिय रहा है। संगठन ने स्पष्ट किया कि वह भविष्य में भी ऐसे मामलों पर मजबूती से आवाज उठाता रहेगा और जरूरत पड़ने पर लोकतांत्रिक एवं कानूनी तरीकों से संघर्ष करेगा। इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर सिनेमा, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन को लेकर गंभीर बहस को जन्म दे दिया है। अब यह देखना होगा कि सेंसर बोर्ड और संबंधित प्राधिकरण इस मामले में क्या कदम उठाते हैं।
