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“मनुष्य जीवन अनमोल, एक का महत्त्व अमूल्य” — आचार्य विशुद्धसागर जी ने मधुर वाणी और मंगल भावों को बताया जीवन का आधार

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Published On: 24 August 2026
“मनुष्य जीवन अनमोल, एक का महत्त्व अमूल्य” — आचार्य विशुद्धसागर जी ने मधुर वाणी और मंगल भावों को बताया जीवन का आधार

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*”एक का महत्त्व अमूल्य है, मनुष्य जीवन दुर्लभता से प्राप्त है” : आचार्य विशुद्धसागर जी*

*ऋषभ विहार में विशुद्ध देशना – वास्तु ठीक करना है तो भाव मंगल करो, कटु वचन ही वास्तु खराब करता है*

राजेश जैन दद्दू
*नई दिल्ली।* दिल्ली स्थित श्री ऋषभोदय तीर्थ क्षेत्र, *ऋषभ विहार* में विराजित दिगम्बर जैन श्रमण संस्कृति के उन्नायक *पट्टाचार्य श्री 108 विशुद्धसागर जी गुरुदेव* ने दिनांक 24 अगस्त 2026 की धर्मसभा में अद्भुत प्रवचन दिया।

*मनुष्य जीवन अनमोल है*

गुरुदेव ने कहा – *”मनुष्य-जीवन अनमोल है। दुर्लभता से प्राप्त है। व्यक्ति को प्रतिक्षण जाग्रत रहना चाहिए। हमेशा कुशल-कार्य करना चाहिए। आपका एक प्रयास किसी की जिंदगी को रोशन कर सकता है।”*

*एक का महत्त्व : अमूल्य*

एक के महत्त्व को समझाते हुए गुरुदेव ने कहा –
*एक सूर्य की किरण अंधकार को नष्ट कर देती है। गुरु की एक लकीर जिंदगी बदल देती है। अग्नि की एक चिंगारी विशाल ईंधन को जलाकर भस्म कर देती है। एक शत्रु जीवन को अशांत कर देता है। एक भूल जीवन में शूल बन जाती है। एक चूक जीवन का अंत कर देती है। एक निर्णय जीवन की धारा को बदल देता है।*धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि सभा को

संबोधित करते हुए कहा कि
– *एक वोट से नेता चुनाव हार सकता है। एक अंक से विद्यार्थी अनुत्तीर्ण हो जाता है। एक बूँद विष भोजन को विषाक्त कर देती है। एक मल की कणिका से भोजन अशुद्ध हो जाता है। कषाय की एक कणिका साधक की साधना को भंग कर देती है। एक बूँद से ही इंसान का जन्म होता है। एक बूंद सीप में गिरकर मोती बन जाती है। एक क्षण की कषाय व्यक्ति को कलंकित कर देती है।* इसलिए एक-एक क्षण का सदुपयोग करो।

*सत्य जानो, सत्य मानो*

गुरुदेव ने कहा *”सत्य जानने के लिए पुरुषार्थ आवश्यक है। सत्य जानना कठिन है। व्यक्ति सत्य को नहीं जानकर ही दुःखी होता है। सत्य जानना, सत्य मानना अत्यंत दुर्लभ है। जो सत्य को जानता है, वह कभी दुःखी नहीं होता।”*

*वास्तु कैसे ठीक करें*

वास्तु पर विलक्षण उपदेश देते हुए गुरुदेव ने कहा – *”जिस घर में गुरु का आशीष नहीं, बुजुर्ग जनक-जननी का सम्मान नहीं, उस घर का वास्तु कभी ठीक नहीं होता है। जो कटु वचन है, वही तुम्हारे घर का वास्तु खराब करता है।”*

*”घर को स्वर्ग बनाना है, तो परस्पर विनय करो, मिश्री-से मधुर वचन बोलो, संतुलित शाकाहार करो। भोजन सही होगा, तो घर का वास्तु भी ठीक होगा। परस्पर का प्रेम-वात्सल्य ही वास्तु ठीक करता है।”*

गुरुदेव ने कहा कषाय जन्य अशुभ भाव, अशुभ भाषा, अशुभ वेष ही अमंगल है। *भाव-मंगल ही प्रधान-मंगल है। जब भाव-मंगल होता है, तो सब मंगल-ही-मंगल होता है।* जीवन मंगलमय करना है तो भावों को मंगल करो।

*स्वादिष्ट भोजन, मधुर विनयपूर्ण वाणी, सादा वस्त्र, पूरक आहार, स्वच्छ वायु, आकर्षक मुख-मुद्रा से भी वास्तु ठीक होता है।*

*उत्साह महान शक्ति*

अंत में गुरुदेव ने कहा – *”व्यक्ति को अपना बनाना हो, तो उसकी प्रशंसा करो। उत्साह शक्ति महान शक्ति है। प्रशंसा, पुरस्कार से उत्साह का संचार होता है। सफलता के लिए उमंग, उत्साह बहुत आवश्यक है। उत्साह पूर्वक जो कार्य करोगे, वह विशिष्ट-फल प्रदान करता है।”*

*रिपोर्ट – राजेश जैन दद्दू, इंदौर*

“आज की गुरुवाणी के 5 सूत्र”*

1. मनुष्य जीवन अनमोल – कुशल कार्य करो
2. एक वोट, एक अंक, एक निर्णय – जीवन बदल देता है
3. सत्य को जानो और मानो
4. कटु वचन ही वास्तु दोष है, मधुर वचन से घर स्वर्ग बनता है
5. उत्साह से किया कार्य विशिष्ट फल देता है

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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