Hormuz स्ट्रेट के पास तनाव बढ़ा: भारतीय जहाज पर हमले के बाद एक और जहाज पर कब्जे की खबर, ईरान की ओर ले जाने की आशंका
पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब समुद्री व्यापार मार्गों पर साफ दिखाई देने लगा है। रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ Hormuz क्षेत्र में लगातार घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय शिपिंग सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता बढ़ गई है। इसी बीच भारतीय झंडे वाले जहाज पर हुए हमले के एक दिन के भीतर ही एक और बड़ी घटना सामने आई है, जिसमें एक अन्य जहाज को कथित तौर पर कब्जे में लेकर ईरान की दिशा में ले जाया जा रहा है।
UKMTO ने दी जहाज कब्जे की सूचना
ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी United Kingdom Maritime Trade Operations (UKMTO) ने गुरुवार को जानकारी दी कि उसे एक जहाज पर कब्जे की रिपोर्ट मिली है। यह घटना संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के फुजैराह बंदरगाह से लगभग 38 नॉटिकल मील (करीब 70 किलोमीटर) उत्तर-पूर्व दिशा में हुई बताई जा रही है।
रिपोर्ट के अनुसार, यह जहाज स्ट्रेट ऑफ Hormuz के पास समुद्र में लंगर डाले खड़ा था, तभी कुछ अज्ञात और अनधिकृत लोग उस पर सवार हो गए और जहाज को अपने नियंत्रण में ले लिया। प्रारंभिक जानकारी में यह भी दावा किया गया है कि जहाज को अब ईरान की समुद्री सीमा की ओर ले जाया जा रहा है।
हालांकि, अभी तक जहाज के नाम, स्वामित्व या उसमें सवार क्रू मेंबर्स के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। इस घटना ने समुद्री सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।
भारतीय जहाज पर ड्रोन हमला और डूबने की घटना
इस नई घटना से ठीक एक दिन पहले, बुधवार (13 मई, 2026) को ओमान के तट के पास एक भारतीय झंडे वाले कार्गो जहाज पर ड्रोन हमला हुआ था। यह जहाज गुजरात से जुड़ा बताया जा रहा है और इसका नाम “हाजी अली” बताया गया है।
जानकारी के अनुसार, यह हमला उस समय हुआ जब जहाज ओमान के उत्तरी तट के पास लीमा क्षेत्र से गुजर रहा था। हमला तड़के करीब 3:30 बजे हुआ, जिसमें ड्रोन के जरिए जहाज को निशाना बनाया गया। हमले के बाद जहाज में भीषण आग लग गई और स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि जहाज समुद्र में डूब गया।
इस घटना ने समुद्री मार्गों पर सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर उस क्षेत्र में जहां पहले से ही भू-राजनीतिक तनाव बना हुआ है।
भारतीय विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया
भारतीय जहाज पर हमले के बाद भारत सरकार ने इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इसे पूरी तरह अस्वीकार्य बताया है।
उन्होंने कहा कि भारतीय झंडे वाले जहाज पर इस तरह का हमला न केवल निंदनीय है बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों और सुरक्षा मानकों का भी उल्लंघन है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत इस तरह की घटनाओं की कड़ी निंदा करता है, जिसमें आम वाणिज्यिक जहाजों को भी निशाना बनाया जा रहा है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, जहाज पर सवार सभी भारतीय क्रू सदस्य सुरक्षित हैं, जो एक बड़ी राहत की बात है। भारत ने ओमान के अधिकारियों का धन्यवाद भी व्यक्त किया है, जिन्होंने बचाव और राहत कार्यों में सहयोग किया।
स्ट्रेट ऑफ Hormuz : क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
स्ट्रेट ऑफ Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। यह फारस की खाड़ी को अरब सागर और हिंद महासागर से जोड़ता है। वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है।
ऐसे में यहां किसी भी तरह की अस्थिरता या सुरक्षा संकट का असर पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है। हाल के घटनाक्रमों ने इस क्षेत्र में जोखिम को और बढ़ा दिया है।
क्षेत्र में बढ़ता तनाव और चिंता
विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव का सीधा असर इस समुद्री क्षेत्र में देखने को मिल रहा है। लगातार हो रही घटनाओं ने शिपिंग कंपनियों और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक संगठनों की चिंता बढ़ा दी है।
जहां एक ओर ड्रोन हमले जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं, वहीं दूसरी ओर जहाजों के अपहरण या कब्जे की खबरें स्थिति को और गंभीर बना रही हैं। इससे यह आशंका भी जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में समुद्री मार्गों पर सुरक्षा और कड़ी करनी पड़ सकती है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया की संभावना
इन घटनाओं के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिक्रिया तेज हो सकती है। समुद्री सुरक्षा से जुड़े संगठन और प्रमुख देश इस क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की मांग कर सकते हैं। साथ ही, जहाजों की आवाजाही पर अतिरिक्त निगरानी और सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किए जा सकते हैं।
निष्कर्ष
Hormuz स्ट्रेट के पास लगातार हो रही घटनाएं न केवल क्षेत्रीय तनाव को दर्शाती हैं बल्कि वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए भी बड़ा खतरा बनती जा रही हैं। भारतीय जहाज पर हमला और उसके बाद एक अन्य जहाज पर कब्जे की खबर ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। फिलहाल अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें इस क्षेत्र पर टिकी हुई हैं और आगे की कार्रवाई पर सभी की निगाहें बनी हुई हैं।
