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हिंदू सम्मेलन देपालपुर: 7 शक्तिशाली विचार जिन्होंने समाज को नई दिशा दी

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Published On: 11 January 2026
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हिंदू सम्मेलन देपालपुर में प्रांत प्रचारक राजमोहन सिंह ने संगठन, शक्ति और विश्व कल्याण का संदेश दिया। जानिए पूरे कार्यक्रम की खास बातें।

हिंदू सम्मेलन देपालपुर: समाज जागरण का ऐतिहासिक आयोजन

हिंदू सम्मेलन देपालपुर एक ऐसा आयोजन रहा जिसने समाज को संगठन, शक्ति और समरसता का नया संदेश दिया। देपालपुर के श्री चौबीस अवतार मंदिर परिसर में आयोजित इस भव्य हिंदू सम्मेलन में बड़ी संख्या में समाजजन, युवा, महिलाएं और वरिष्ठ नागरिक उपस्थित रहे। वातावरण पूरी तरह राष्ट्रभक्ति, संस्कृति और सामाजिक एकता के रंग में रंगा हुआ दिखाई दिया।

इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मालवा प्रांत प्रचारक राजमोहन सिंह ने जो विचार रखे, वे केवल भाषण नहीं बल्कि समाज को दिशा देने वाले सूत्र थे।

हिंदू सम्मेलन देपालपुर में राजमोहन सिंह का ओजस्वी उद्बोधन

हिंदू सम्मेलन देपालपुर में प्रांत प्रचारक राजमोहन सिंह ने कहा—

“जब जब हिंदू संगठित होता है, तब तब भारत समर्थ बनता है।”

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विश्व कल्याण की बात वही कर सकता है जो स्वयं शक्तिशाली हो। इतिहास इसका साक्षी है कि जब भारत शक्तिशाली था, तब उसने पूरी दुनिया को ज्ञान, संस्कृति और शांति का मार्ग दिखाया।

उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा केवल मनुष्य तक सीमित नहीं है, बल्कि—

  • नदी में भगवान का दर्शन
  • पेड़ में जीवन की पूजा
  • पशुओं में करुणा
  • चंद्रमा को मामा कहना

यह सब भारतीय संस्कृति की विशेषता है।

“सर्वे भवन्तु सुखिनः” की भावना

हिंदू सम्मेलन देपालपुर में राजमोहन सिंह ने कहा कि भारत की आत्मा “सर्वे भवन्तु सुखिनः” में बसती है। यानी—

  • सभी सुखी हों

  • सभी निरोग हों

  • सभी का कल्याण हो

लेकिन यह भावना तभी साकार होती है जब समाज संगठित और शक्तिशाली हो।

उन्होंने कहा कि—

“कल्याण की बात उसी को शोभा देती है जो ताकतवर होता है।”

समाज में समरसता का संकल्प

हिंदू सम्मेलन देपालपुर का सबसे भावुक क्षण तब आया जब राजमोहन सिंह ने सभी उपस्थित लोगों को समाज में समरसता बनाए रखने का संकल्प दिलवाया। उन्होंने कहा—

  • ऊँच-नीच का भेद न हो
  • जाति-पांति से ऊपर उठकर सोचना
  • हर व्यक्ति को अपना मानना

सभी ने हाथ उठाकर यह संकल्प लिया कि समाज में कभी भेदभाव नहीं करेंगे।

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अन्य वक्ताओं के प्रेरक विचार

पुजारी राजेश शास्त्री

श्री चौबीस अवतार मंदिर के पुजारी राजेश शास्त्री ने कहा कि मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं, बल्कि संस्कार और संस्कृति का केंद्र होता है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपनी जड़ों से जुड़े रहें।

राष्ट्र सेविका समिति की वीणा सोनी

श्रीमती वीणा सोनी ने कहा कि नारी शक्ति समाज की रीढ़ है। जब महिलाएं जागरूक होती हैं, तो पूरा समाज जागृत हो जाता है। उन्होंने महिलाओं से सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में आगे आने का आह्वान किया।

मंच और संचालन की भूमिका

हिंदू सम्मेलन देपालपुर में मंच पर कर रानी बुआजी भी विशेष रूप से उपस्थित रहीं। उनका सान्निध्य कार्यक्रम को गरिमा प्रदान कर रहा था।

कार्यक्रम का संचालन शिक्षक अनिल सोलंकी ने अत्यंत प्रभावी ढंग से किया। उनके शब्दों में सरलता, भाव और अनुशासन झलक रहा था।

आयोजन की झलकियाँ

हिंदू सम्मेलन देपालपुर में—

  • ढोल-नगाड़ों की गूंज
  • पारंपरिक वेशभूषा
  • भगवा ध्वज
  • देशभक्ति और सांस्कृतिक गीत

पूरा वातावरण आध्यात्मिक और राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत दिखाई दिया।

युवाओं और समाज पर प्रभाव

हिंदू सम्मेलन देपालपुर ने विशेष रूप से युवाओं को नई सोच दी—

  • अपने धर्म और संस्कृति पर गर्व
  • समाज सेवा की भावना
  • संगठन की ताकत को समझना

कई युवाओं ने कहा कि यह सम्मेलन उनके जीवन की सोच बदलने वाला साबित हुआ।

निष्कर्ष: संगठित समाज, समर्थ भारत

हिंदू सम्मेलन देपालपुर केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज को जाग्रत करने का अभियान था। राजमोहन सिंह, राजेश शास्त्री, वीणा सोनी, कर रानी बुआजी और अनिल सोलंकी जैसे व्यक्तित्वों की उपस्थिति ने इसे ऐतिहासिक बना दिया।

यह सम्मेलन यह संदेश देकर गया कि—

  • संगठन में शक्ति है
  • शक्ति में कल्याण है
  • कल्याण में भारत का भविष्य है
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