‘हस्तिनापुर के वीर’ में बदलेगा अर्जुन-अश्वत्थामा की दोस्ती का रिश्ता, दुर्योधन की चाल से बढ़ेंगी दूरियां
Hastinapur Ke Veer Upcoming Twist: सोनी सब के शो ‘हस्तिनापुर के वीर’ में अब अर्जुन और अश्वत्थामा की दोस्ती एक मुश्किल मोड़ पर पहुंचने वाली है। गुरु द्रोणाचार्य का अर्जुन पर बढ़ता विश्वास अश्वत्थामा के मन में असुरक्षा और ईर्ष्या पैदा कर रहा है। इसी भावनात्मक कमजोरी का फायदा उठाकर दुर्योधन उसे अर्जुन के खिलाफ करने की कोशिश करेगा। आने वाले एपिसोड्स में दोनों दोस्तों के रिश्ते में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।
मुंबई। सोनी सब का शो ‘हस्तिनापुर के वीर’ पांडवों और कौरवों के बचपन से जुड़े प्रसंगों को पर्दे पर पेश कर रहा है। जैसे-जैसे हस्तिनापुर के राजकुमार बड़े हो रहे हैं, उनके बीच दोस्ती, प्रतिस्पर्धा और पारिवारिक रिश्तों के समीकरण भी बदलते दिखाई दे रहे हैं।
शो के आगामी एपिसोड्स में कहानी का केंद्र अर्जुन और अश्वत्थामा की दोस्ती बनने वाली है। अब तक एक-दूसरे के करीब रहे दोनों किरदारों के बीच गलतफहमियां पैदा होने लगेंगी। अश्वत्थामा को महसूस होगा कि उसके पिता और गुरु द्रोणाचार्य अर्जुन को उससे अधिक महत्व दे रहे हैं।
यही भावना धीरे-धीरे उसके भीतर असुरक्षा और ईर्ष्या को जन्म देती है। दूसरी तरफ दुर्योधन उसकी इसी कमजोरी को समझकर परिस्थितियों को अपने पक्ष में मोड़ने का प्रयास करता दिखाई देगा।
गुरु द्रोणाचार्य का अर्जुन पर भरोसा बढ़ाएगा अश्वत्थामा की बेचैनी

आगामी कहानी में अश्वत्थामा का किरदार निभा रहे धवल त्रिपाठी के सामने भावनात्मक संघर्ष दिखाई देगा। वह अपने पिता गुरु द्रोणाचार्य से बेहद लगाव रखता है और उनका सम्मान करता है।
लेकिन जब उसे महसूस होता है कि द्रोणाचार्य अर्जुन की प्रतिभा, लगन और क्षमता पर अधिक विश्वास कर रहे हैं, तो उसके मन में कई सवाल पैदा होने लगते हैं।
अश्वत्थामा को लगने लगता है कि पिता के जीवन में जो स्थान उसका होना चाहिए था, वह धीरे-धीरे अर्जुन को मिल रहा है। यही सोच उसकी दोस्ती को प्रभावित करने लगती है।
दुर्योधन उठाएगा अश्वत्थामा की असुरक्षा का फायदा
अश्वत्थामा के मन में चल रही उथल-पुथल से दुर्योधन भी अनजान नहीं रहेगा। दुर्योधन का किरदार निभा रहे आयुध भानुशाली कहानी के इस मोड़ पर महत्वपूर्ण भूमिका में नजर आएंगे।
अश्वत्थामा की भावनाओं और अर्जुन के प्रति बढ़ती नाराजगी को समझकर दुर्योधन धीरे-धीरे उसे अर्जुन के खिलाफ करने का प्रयास करता है।
दुर्योधन उसकी असुरक्षा को और बढ़ाता है और उसके मन में यह बात मजबूत करने की कोशिश करता है कि अर्जुन उसके पिता की नजरों में उससे अधिक महत्वपूर्ण बन चुका है।
यहीं से अर्जुन और अश्वत्थामा की मजबूत दोस्ती में दरार पड़नी शुरू होती है।
अर्जुन और अश्वत्थामा के बीच होगा टकराव


कहानी आगे बढ़ने के साथ अश्वत्थामा के भीतर दबा हुआ गुस्सा सामने आ जाएगा। दोनों दोस्तों के बीच टकराव की स्थिति बनेगी और भावनाओं में बहकर अश्वत्थामा अर्जुन से ऐसी बात कह देगा, जो उनके रिश्ते को गहराई से प्रभावित करेगी।
अश्वत्थामा अर्जुन से कहेगा कि उसे उनकी दोस्ती पर अफसोस है और अर्जुन को अपना दोस्त मानना उसकी गलती थी।
अश्वत्थामा के अचानक बदले व्यवहार से अर्जुन हैरान रह जाएगा। उसके लिए यह समझना मुश्किल होगा कि जिस दोस्ती को वह बेहद खास मानता था, उसमें अचानक इतनी कड़वाहट कैसे आ गई।
अर्जुन के लिए दोस्ती कभी प्रतियोगिता नहीं थी
अर्जुन के किरदार में नजर आ रहे उर्वा सवालिया के अनुसार उनके किरदार के लिए अश्वत्थामा केवल साथी नहीं, बल्कि करीबी दोस्त है।
अर्जुन ने कभी भी अपनी और अश्वत्थामा की दोस्ती को किसी प्रतियोगिता के रूप में नहीं देखा। यही कारण है कि अश्वत्थामा की नाराजगी उसे अंदर तक प्रभावित करती है।
उर्वा सवालिया ने कहा कि अर्जुन को समझ नहीं आता कि अश्वत्थामा अचानक उससे इतना नाराज क्यों हो गया। खासकर यह सुनना कि अश्वत्थामा को उनकी दोस्ती पर पछतावा है, अर्जुन के लिए बेहद दुखद अनुभव है।
उनके मुताबिक कहानी का यह हिस्सा दिखाता है कि जब कोई करीबी दोस्त बिना स्पष्ट वजह के अचानक अपना व्यवहार बदल ले, तो वह स्थिति कितनी दर्दनाक हो सकती है।
द्रोणाचार्य नहीं समझ पाए बेटे के मन की पीड़ा
गुरु द्रोणाचार्य की भूमिका निभा रहे अभिनेता जितेन लालवानी ने कहानी के इस भावनात्मक मोड़ पर अपने किरदार की स्थिति के बारे में बताया।
उनके अनुसार द्रोणाचार्य एक पिता और गुरु दोनों हैं। वे चाहते हैं कि अश्वत्थामा और अर्जुन दोनों मजबूत, योग्य और सक्षम व्यक्ति बनें।
द्रोणाचार्य अर्जुन में लगन और क्षमता देखते हैं और एक गुरु के रूप में उसकी प्रतिभा को प्रोत्साहित करते हैं। लेकिन इस दौरान वे यह समझ नहीं पाते कि उनकी बातें और अर्जुन की प्रशंसा उनके अपने बेटे अश्वत्थामा को कितनी गहराई से प्रभावित कर रही हैं।
‘दोनों के बीच फर्क करना द्रोणाचार्य का उद्देश्य नहीं’
जितेन लालवानी के अनुसार द्रोणाचार्य का उद्देश्य कभी भी अर्जुन और अश्वत्थामा के बीच अंतर पैदा करना नहीं है।
एक गुरु के रूप में वह अपने शिष्यों को सही दिशा देना चाहते हैं, लेकिन अनजाने में उनका अपना बेटा स्वयं को पीछे छूटा हुआ महसूस करने लगता है।
यही परिस्थिति कहानी को भावनात्मक बनाती है। एक तरफ गुरु के रूप में द्रोणाचार्य का कर्तव्य है और दूसरी तरफ बेटे के मन में पिता के प्रेम और स्वीकार्यता को लेकर पैदा हुई असुरक्षा।
धवल त्रिपाठी बोले- कई भावनाओं से गुजर रहा है अश्वत्थामा
अश्वत्थामा का किरदार निभा रहे धवल त्रिपाठी ने कहा कि उनका किरदार इस समय एक साथ कई भावनाओं से गुजर रहा है।
अश्वत्थामा अपने पिता से प्रेम करता है और उनका बहुत सम्मान करता है। ऐसे में जब उसे लगता है कि द्रोणाचार्य अर्जुन के भीतर उससे अधिक क्षमता देखते हैं, तो यह बात उसे भावनात्मक रूप से चोट पहुंचाती है।
धीरे-धीरे उसके मन में यह धारणा बनने लगती है कि अर्जुन ने वह स्थान हासिल कर लिया है, जिसे वह हमेशा अपने लिए चाहता था।
धवल के अनुसार यही सोच अश्वत्थामा और अर्जुन की दोस्ती में कठिन बदलाव की शुरुआत बनती है।
दोस्ती, ईर्ष्या और पिता-पुत्र के रिश्ते पर केंद्रित होगी कहानी
‘हस्तिनापुर के वीर’ के आने वाले एपिसोड्स केवल अर्जुन और अश्वत्थामा के टकराव तक सीमित नहीं होंगे। कहानी के जरिए दोस्ती में पैदा होने वाली गलतफहमियों, प्रतिस्पर्धा, पिता से अपेक्षाओं और असुरक्षा जैसी भावनाओं को भी दिखाया जाएगा।
अश्वत्थामा की नाराजगी के पीछे केवल अर्जुन से प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि अपने पिता से मिलने वाले प्रेम और स्वीकार्यता की उसकी अपेक्षा भी महत्वपूर्ण कारण बनती दिखाई देगी।
वहीं अर्जुन के सामने चुनौती होगी कि वह उस दोस्त के अचानक बदले व्यवहार को कैसे समझता है, जिसे वह हमेशा अपने करीब मानता आया है।
क्या बच पाएगी अर्जुन-अश्वत्थामा की दोस्ती?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि दुर्योधन के प्रभाव और अश्वत्थामा की बढ़ती असुरक्षा के बीच अर्जुन अपनी दोस्ती को बचा पाएगा या नहीं। क्या अश्वत्थामा को अपनी गलतफहमी का एहसास होगा या दोनों के बीच पैदा हुई दूरी आगे और बढ़ेगी?
इन्हीं सवालों के जवाब शो के आगामी एपिसोड्स में सामने आएंगे।
