अस्पतालों में इलाज के साथ सुरक्षा भी जरूरी, सीएचसी-पीएचसी में मिनी पुलिस चौकी बनाने की उठी मांग
सिराली सीएचसी में शराब के नशे में युवकों के हंगामे ने खोली सुरक्षा व्यवस्था की पोल, डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा पर उठे सवाल
Harda । अस्पतालों में मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है। लेकिन प्रदेश के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अब गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। हरदा जिले के सिराली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में शराब के नशे में दो युवकों द्वारा हंगामा करने और अस्पताल स्टाफ के साथ अभद्रता किए जाने की शिकायत सामने आने के बाद स्वास्थ्य संस्थानों में स्थायी पुलिस सहायता व्यवस्था की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
लेबर रूम में प्रवेश की कोशिश, स्टाफ से अभद्रता का आरोप
अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, घटना के दौरान दोनों युवक शराब के नशे में अस्पताल परिसर में पहुंचे और विभिन्न वार्डों एवं कार्यालयों में गाली-गलौच करते हुए हंगामा करने लगे। स्टाफ द्वारा समझाने के बावजूद उनके व्यवहार में सुधार नहीं हुआ। आरोप है कि युवकों ने लेबर रूम में प्रवेश करने का प्रयास किया। संस्था प्रभारी द्वारा रोकने पर उनके साथ अभद्रता की गई तथा धमकी देने और हाथ मरोड़ने का प्रयास भी किया गया। सूचना मिलने पर पुलिस कुछ ही मिनटों में अस्पताल पहुंची और दोनों युवकों को अपने साथ ले गई।
निजी सुरक्षा गार्डों के भरोसे कब तक रहेगी अस्पतालों की सुरक्षा?
सिराली की घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि दूरस्थ क्षेत्रों में स्थित स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सकों, महिला स्वास्थ्यकर्मियों, मरीजों और उनके परिजनों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम हैं या नहीं। कई स्वास्थ्य संस्थानों में सुरक्षा की जिम्मेदारी निजी सुरक्षा गार्डों के पास रहती है, लेकिन विवाद, मारपीट या नशे में उपद्रव जैसी परिस्थितियों में उनकी सीमाएं सामने आ सकती हैं। ऐसे में अस्पताल परिसरों में पुलिस की प्रभावी मौजूदगी की जरूरत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
सीएचसी-पीएचसी में स्थापित हों मिनी पुलिस चौकियां
स्वास्थ्य केंद्रों की सुरक्षा मजबूत करने के लिए मांग उठ रही है कि प्रदेश के सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में मिनी पुलिस चौकी अथवा पुलिस सहायता केंद्र स्थापित किए जाएं। विशेषकर उन स्वास्थ्य केंद्रों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज पहुंचते हैं और आसपास के कई गांवों की स्वास्थ्य सेवाएं निर्भर हैं। आवश्यकता के अनुसार पुलिसकर्मियों की तैनाती और त्वरित पुलिस सहायता की व्यवस्था होने से विवाद की स्थिति में तत्काल कार्रवाई संभव हो सकेगी।
सुरक्षित माहौल में ही बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं संभव
चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मी आपातकालीन परिस्थितियों में भी मरीजों का उपचार करते हैं। ऐसे में उनके साथ अभद्रता, धमकी या मारपीट की आशंका उनके कार्य को प्रभावित कर सकती है। अस्पतालों में सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना केवल कर्मचारियों की सुरक्षा का विषय नहीं, बल्कि मरीजों को निर्बाध स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने से भी जुड़ा है। विशेष रूप से प्रसूति कक्ष और अन्य संवेदनशील वार्डों में अनधिकृत प्रवेश रोकने के लिए प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था आवश्यक है।
सरकार और स्वास्थ्य विभाग करें सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा
सिराली की घटना को केवल एक स्वास्थ्य केंद्र की समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। प्रदेश के सभी सीएचसी और पीएचसी में सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा की जरूरत है। संवेदनशील स्वास्थ्य केंद्रों पर पुलिस सहायता केंद्र, नियमित गश्त और आपातकालीन संपर्क व्यवस्था उपलब्ध कराई जा सकती है। इससे किसी भी विवाद या अप्रिय स्थिति में तत्काल पुलिस सहायता मिल सकेगी। अस्पतालों में चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों, मरीजों और उनके परिजनों के लिए सुरक्षित माहौल जरूरी है। ऐसे में किसी बड़ी घटना का इंतजार किए बिना सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की दिशा में ठोस कदम उठाना आवश्यक है।
राजकुमार मौर्य
हरदा सिटी रिपोर्टर
दैनिक स्वराज वाणी, हरदा
