ग्वालियर में भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याणक पर चढ़ेगा 123 किलो का निर्वाण लड्डू, आचार्य चैत्य सागर का 43वां दीक्षा दिवस भी मनेगा
चंपाबाग धर्मशाला में आचार्य चैत्य सागर महाराज और मुनिश्री अनुमान सागर महाराज के सानिध्य में होगा भव्य आयोजन, अभिषेक-पूजन के साथ होंगे धार्मिक अनुष्ठान
ग्वालियर। जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ का मोक्ष कल्याणक महोत्सव बुधवार, 19 अगस्त को ग्वालियर में श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक उल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर भगवान पार्श्वनाथ को 123 किलो का विशाल निर्वाण लड्डू समर्पित किया जाएगा। आयोजकों के अनुसार ग्वालियर में पहली बार इतनी बड़ी मात्रा का निर्वाण लड्डू भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याणक के अवसर पर चढ़ाया जा रहा है।
आत्म साधना पावन वर्षायोग समिति एवं सकल जैन समाज ग्वालियर की ओर से आयोजित यह धार्मिक कार्यक्रम परम पूज्य आचार्य श्री चैत्य सागर महाराज एवं मुनिश्री अनुमान सागर महाराज के सानिध्य में संपन्न होगा।
भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याणक के साथ इस अवसर पर आचार्य श्री चैत्य सागर महाराज का 43वां पावन दीक्षा दिवस भी मनाया जाएगा। इसे लेकर जैन समाज में विशेष उत्साह है और आयोजन की तैयारियां पूरी की जा रही हैं।
चंपाबाग धर्मशाला में होगा मुख्य आयोजन
मोक्ष कल्याणक महोत्सव का मुख्य आयोजन ग्वालियर के नई सड़क स्थित चंपाबाग धर्मशाला में किया जाएगा। धार्मिक कार्यक्रम सुबह से प्रारंभ होंगे।
आयोजन समिति के अनुसार भगवान पार्श्वनाथ के अभिषेक, पूजन और निर्वाण लड्डू समर्पण सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाएंगे।
कार्यक्रम में ग्वालियर सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। आयोजन को लेकर आत्म साधना पावन वर्षायोग समिति और सकल जैन समाज के पदाधिकारी एवं सदस्य तैयारियों में जुटे हुए हैं।
सुबह 7 बजे भगवान पार्श्वनाथ का अभिषेक
कार्यक्रम के संयोजक विकास गंगवाल और विनय कासलीवाल ने बताया कि धार्मिक कार्यक्रमों की शुरुआत सुबह करीब 7 बजे भगवान पार्श्वनाथ के अभिषेक से होगी।
श्रद्धालु भगवान का अभिषेक करने के साथ विधि-विधान से विशेष पूजन करेंगे। इसके बाद मोक्ष कल्याणक से जुड़े धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए जाएंगे।
भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याणक को लेकर जैन समाज के श्रद्धालुओं में विशेष धार्मिक भावना रहती है। इस अवसर पर श्रद्धालु भगवान के जीवन, तप, त्याग और मोक्ष मार्ग का स्मरण करते हुए पूजा-अर्चना करते हैं।
123 किलो का निर्वाण लड्डू बनेगा आकर्षण
इस वर्ष के आयोजन का सबसे बड़ा आकर्षण 123 किलो का निर्वाण लड्डू रहेगा।
आयोजकों के मुताबिक भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याणक पर ग्वालियर के इतिहास में पहली बार श्रद्धा और भव्यता के साथ 123 किलो का निर्वाण लड्डू समर्पित किया जाएगा।
विशेष पूजन के बाद भगवान के समक्ष निर्वाण लड्डू चढ़ाया जाएगा। इस दौरान धार्मिक मंत्रोच्चार और भगवान पार्श्वनाथ के जयकारों से पूरा परिसर भक्तिमय होने की उम्मीद है।
आयोजन समिति ने इस विशेष धार्मिक कार्यक्रम के लिए व्यापक तैयारियां की हैं।
आचार्य चैत्य सागर महाराज के सानिध्य में आयोजन
भगवान पार्श्वनाथ मोक्ष कल्याणक महोत्सव परम पूज्य आचार्य श्री चैत्य सागर महाराज के सानिध्य में आयोजित होगा।
उनके साथ मुनिश्री अनुमान सागर महाराज का भी सानिध्य श्रद्धालुओं को प्राप्त होगा।
जैन समाज के लोगों के लिए संतों के सानिध्य में भगवान का मोक्ष कल्याणक मनाने का यह अवसर विशेष माना जा रहा है। कार्यक्रम में संतों के मंगल प्रवचन के माध्यम से श्रद्धालुओं को धर्म, संयम, त्याग और आत्मकल्याण का संदेश भी मिलेगा।
आचार्य चैत्य सागर महाराज का 43वां दीक्षा दिवस
भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याणक के साथ ही आचार्य श्री चैत्य सागर महाराज का 43वां पावन दीक्षा दिवस भी आयोजित किया जाएगा।
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि आचार्यश्री के दीक्षा दिवस को लेकर विशेष धार्मिक कार्यक्रम रखे गए हैं।
इस दौरान श्रद्धालु आचार्यश्री के संयमित जीवन और धर्म प्रभावना में उनके योगदान का स्मरण करेंगे। संत दीक्षा जैन परंपरा में त्याग, तप, संयम और आत्मसाधना से जुड़ा महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है।
इसी कारण आचार्यश्री के 43वें दीक्षा दिवस को समाज की ओर से श्रद्धापूर्वक मनाने की तैयारी की गई है।
दीप प्रज्वलन से होगा कार्यक्रम का शुभारंभ
आयोजन के दौरान विभिन्न धार्मिक और मांगलिक कार्यक्रम भी संपन्न किए जाएंगे। कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ होगा।
इसके बाद शास्त्र भेंट, पाद प्रक्षालन और विशेष पूजन सहित अन्य धार्मिक क्रियाएं संपन्न की जाएंगी।
आचार्य श्री चैत्य सागर महाराज श्रद्धालुओं को मंगल प्रवचन भी देंगे। उनके प्रवचन के माध्यम से भगवान पार्श्वनाथ के जीवन और उनके द्वारा दिए गए आध्यात्मिक संदेश पर प्रकाश डाला जाएगा।
मोक्ष कल्याणक का जैन धर्म में विशेष महत्व
जैन धर्म में तीर्थंकरों के पांच कल्याणकों का विशेष महत्व माना जाता है। इनमें गर्भ, जन्म, तप, ज्ञान और मोक्ष कल्याणक शामिल हैं।
मोक्ष कल्याणक उस पावन अवसर का प्रतीक है, जब तीर्थंकर कर्म बंधनों से पूर्ण रूप से मुक्त होकर सिद्ध अवस्था को प्राप्त करते हैं।
भगवान पार्श्वनाथ जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर हैं। जैन समाज में उनकी आराधना और उनके सिद्धांतों का विशेष महत्व है।
मोक्ष कल्याणक के दिन श्रद्धालु भगवान पार्श्वनाथ का अभिषेक, शांतिधारा, पूजन और निर्वाण कांड का पाठ करते हुए निर्वाण लड्डू समर्पित करते हैं।
भगवान पार्श्वनाथ के सिद्धांतों का होगा स्मरण
धार्मिक आयोजन के दौरान भगवान पार्श्वनाथ के जीवन और उनके उपदेशों का भी स्मरण किया जाएगा। भगवान पार्श्वनाथ की शिक्षाएं अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह और संयम जैसे मूल्यों से जुड़ी हुई हैं।
जैन समाज का मानना है कि मोक्ष कल्याणक केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देने वाला अवसर भी है।
इस दिन श्रद्धालु अपने जीवन में संयम, सदाचार और अहिंसा के सिद्धांतों को अपनाने का संकल्प लेते हैं।
आत्म साधना पावन वर्षायोग समिति ने की तैयारियां
आत्म साधना पावन वर्षायोग समिति एवं सकल जैन समाज ग्वालियर की ओर से कार्यक्रम को भव्य स्वरूप देने की तैयारियां की जा रही हैं।
आयोजन समिति के सदस्य धार्मिक कार्यक्रमों की व्यवस्थाओं से लेकर श्रद्धालुओं की सुविधा तक विभिन्न जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं।
कार्यक्रम के संयोजक विकास गंगवाल एवं विनय कासलीवाल के अनुसार भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याणक को इस बार विशेष स्वरूप प्रदान किया जा रहा है।
बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद
चंपाबाग धर्मशाला में होने वाले इस धार्मिक आयोजन में ग्वालियर शहर के विभिन्न क्षेत्रों से जैन समाज के श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।
सुबह भगवान पार्श्वनाथ के अभिषेक और पूजन से शुरू होने वाला कार्यक्रम निर्वाण लड्डू समर्पण, आचार्यश्री के दीक्षा दिवस समारोह और मंगल प्रवचन सहित विभिन्न धार्मिक गतिविधियों के साथ आगे बढ़ेगा।
आयोजन समिति ने समाज के लोगों से कार्यक्रम में शामिल होकर धर्मलाभ लेने का आह्वान किया है।
धर्म, तप और संयम का संदेश देगा आयोजन
भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याणक और आचार्य श्री चैत्य सागर महाराज के 43वें दीक्षा दिवस का संयुक्त आयोजन जैन समाज के लिए विशेष अवसर रहेगा।
एक ओर श्रद्धालु भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याणक पर उनकी आराधना करेंगे, वहीं दूसरी ओर आचार्यश्री के दीक्षा दिवस पर उनके तप, त्याग और संयममय जीवन के प्रति श्रद्धा व्यक्त करेंगे।
