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Gwalior में 9 साल के मासूम ने अपने खून से लिखा पत्र, केंद्रीय मंत्री से मांगा न्याय

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Published On: 14 February 2026
Gwalior Child’s Heart-Wrenching Plea: Minister Scindia Promises Immediate Action
— Gwalior Child’s Heart-Wrenching Plea: Minister Scindia Promises Immediate Action

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Gwalior में 9 साल के मासूम ने अपने खून से लिखा पत्र, केंद्रीय मंत्री से मांगा न्याय

Gwalior, मध्य प्रदेश – फरवरी 2026। Gwalior से एक बेहद ही संवेदनशील और हैरतअंगेज खबर सामने आई है। 9 साल के मासूम यशवर्धन राठौर ने अपने खून से पत्र लिखकर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से न्याय की गुहार लगाई है। बच्चे और उसके पिता का आरोप है कि शहर के एक नामी डॉक्टर ने बिना डिग्री डिप्लोमा के दवाओं का अत्यधिक डोज देकर यशवर्धन के शरीर को गंभीर बीमारी के कगार पर पहुंचा दिया है।

केंद्रीय मंत्री ने इस मामले में तुरंत कार्रवाई का आश्वासन दिया है। पिता और पुत्र ने साफ कर दिया है कि अगर न्याय नहीं मिला, तो वे आत्मदाह करने को मजबूर होंगे।

केंद्रीय मंत्री ने न्याय दिलाने का आश्वासन दिया

Gwalior के रहने वाले यशवर्धन राठौर थर्ड क्लास में पढ़ते हैं। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के ग्वालियर आगमन की जानकारी मिलने पर यशवर्धन अपने पिता मोनू राठौर के साथ ग्वालियर एयरपोर्ट पहुंचे।

मासूम ने अपने खून से लिखा न्याय की गुहार वाला पत्र मंत्री को सौंपा। सिंधिया ने पत्र को पढ़ा और पिता-पुत्र को न्याय दिलाने का भरोसा दिलाया। जब मंत्री अपने काफिले के साथ रवाना हो रहे थे, पिता-पुत्र ने फिर से उनका रास्ता रोका। इस पर मंत्री ने काफिला रोककर आश्वासन दिया कि वह बच्चे को न्याय जरूर दिलाएंगे।

बच्चे की गंभीर स्थिति: आंखों की रोशनी और दांतों की समस्या

मासूम के पिता मोनू राठौर का आरोप है कि यशवर्धन के सिर पर बाल उम्र के हिसाब से कम थे। बालों की कम ग्रोथ को देखकर वे शिंदे की छावनी स्थित डर्मेटोलॉजिस्ट की क्लिनिक गए। यहां 2020 से 2024 तक बच्चे का इलाज हुआ।

इस दौरान बच्चे की स्थिति और बिगड़ गई। बाल पूरी तरह गायब हो गए, आंखों की रोशनी कम हो गई और दांत टेढ़े होने लगे। बाद में बच्चे को भोपाल एम्स के मेडिकल कैम्प में दिखाया गया, और फिर दिल्ली एम्स रेफर किया गया। दिल्ली में हाई लेवल जांच के बाद डॉक्टरों ने बच्चे की स्थिति को क्रिटिकल बताया।

कुछ जांचें अमेरिका भेजी गई हैं ताकि बच्चे की हालत का पूरी तरह पता लगाया जा सके।

उम्र बढ़ने के साथ स्वास्थ्य और कमजोर होगा

पिता मोनू राठौर का कहना है कि जैसे-जैसे यशवर्धन की उम्र बढ़ेगी, उसकी शारीरिक स्थिति और कमजोर होती जाएगी। आरटीआई के जरिए निकाले गए रिकॉर्ड के अनुसार, डॉक्टर के पास डर्मेटोलॉजिस्ट से जुड़ी कोई डिग्री या डिप्लोमा नहीं है।

डॉक्टर अपनी पत्नी के नाम से रजिस्टर्ड क्लिनिक में ही प्रैक्टिस करता रहा और यशवर्धन को हाई लेवल दवाओं के डोज दिए। इनमें कुछ स्टेरॉयड दवाएं भी शामिल थीं। इन दवाओं के साइड इफेक्ट्स ने बच्चे के जीवन को खतरे में डाल दिया है।

पिता-पुत्र ने कई अधिकारियों को शिकायत दी

मोनू राठौर ने ग्वालियर CMHO, स्वास्थ्य मंत्री, जिले के प्रभारी मंत्री, डिप्टी CM, मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जीतू पटवारी समेत स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायत भेजी। उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार केवल जाँच और आश्वासन दिया गया, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

इस वजह से अब पिता-पुत्र ने खून से लिखे पत्र के माध्यम से केंद्रीय मंत्री को न्याय की गुहार लगाई। उनका कहना है कि यदि अब भी न्याय नहीं मिला, तो वे आत्मदाह करने को मजबूर होंगे।

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का संदेश

सिंधिया ने पिता-पुत्र से कहा कि बच्चे को न्याय जरूर दिलाया जाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि मामले की तत्काल जांच और कार्रवाई कराई जाएगी। केंद्रीय मंत्री का यह कदम बच्चों और आम लोगों के लिए सशक्त संदेश है कि उनके जीवन और अधिकारों की रक्षा प्राथमिकता है।

निष्कर्ष

Gwalior का यह मामला केवल एक बाल स्वास्थ्य संकट नहीं है, बल्कि सिस्टम में मौजूद कमजोरियों और अवैध प्रैक्टिस का भी प्रतीक है। मासूम यशवर्धन के पिता-पुत्र की हिम्मत और खून से लिखे पत्र ने केंद्रीय मंत्री तक न्याय की आवाज पहुँचाई।

इस घटना ने यह भी रेखांकित किया है कि सुपरविजन, मेडिकल लाइसेंस और जवाबदेही कितनी महत्वपूर्ण हैं। मध्यप्रदेश और केंद्र सरकार के लिए यह एक जिम्मेदारी और चेतावनी दोनों है कि बच्चे की जान और भविष्य को सुरक्षित किया जाए।

 

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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