गुरुदेव की हस्तचित्र प्रदर्शनी: नागदा बना श्रद्धा-का केंद्र
नागदा (ब्रजेश बोहरा) – मध्य प्रदेश के नगर नागदा में आज एक अद्वितीय आयोजन हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं और जैन समुदाय ने समर्पण भाव से भाग लिया। यह आयोजन था आचार्य राजेन्द्रसूरीजी महाराजा (गुरुदेव) की जन्म द्विशताब्दी वर्ष 2027 के उपलक्ष्य में आयोजित उनकी हस्तनिर्मित 421 चित्रों की एक दिवसीय रथयात्रा-प्रदर्शनी का। इस प्रकार हाथ की रचना अर्थात हस्तचित्रों के माध्यम से गुरुभक्ति का अद्भुत अनुपम स्वरूप सामने आया।
उद्घाटन एवं मुख्य कार्यक्रम
प्रातः 9:15 बजे रानी लक्ष्मीबाई मार्ग स्थित पार्श्व प्रधान पाठशाला भवन में स्थित सभा स्थल पर यह भव्य उद्घाटन हुआ। वरिष्ठ समाजसेवी श्री विरेंद्रकुमार सकलेचा द्वारा उद्घाटन लाभार्थी के रूप में किया गया। वासक्षेप पूजन का लाभ संघ अध्यक्ष श्री मनीष कुमार प्रकाशचंदजी सालेचा (ओरा) परिवार द्वारा लिया गया, जबकि आरती-विधान का लाभ संघ सचिव श्री हर्षित विमल कुमारजी नागदा परिवार द्वारा लिया गया।
प्रदर्शनी के दौरान मुनिभक्तों द्वारा गुरुदेव के जीवनकाल में किए गए कृत्यों, योगदान तथा सामाजिक-धार्मिक改革ों पर मार्मिक प्रवचन दिए गए। मुनिराज श्री (प्रत्यक्षरत्न विजयजी म. सा.) ने गुरुदेव के जीवन की झलक प्रस्तुत की, तथा मुनिराज श्री पवित्ररत्न जी ने कहा कि “गुरुदेव की सिद्धि नहीं — शुद्धि पहचानने की आवश्यकता है।”
प्रदर्शनी संयोजक श्री राजुभाई नाणेशा (पुना निवासी) ने रथयात्रा-प्रदर्शनी का उपदेश रूप में महत्व समझाया।
इस मौके पर बाहर से पधारे राजुभाई व मुनिराज श्री के पारिवारिक सदस्यों का भी श्वेताम्बर मूर्तिपूजक जैन श्रीसंघ नागदा द्वारा सम्मान किया गया। शाम को आरती का लाभ राजमलजी-राकेश ओरा प्रेमभाव परिवार ने लिया। कार्यक्रम का संचालन मनोज वागरेचा द्वारा हुआ, आभार सुन्दर कांकरिया ने माना। रंगोली द्वारा इस आयोजन को और भी आकर्षक बनाया गया।
आयोजन का धार्मिक-सामाजिक महत्व
इस आयोजन ने नागदा को गुरुभक्ति एवं श्रद्धा का केंद्र बनाने की दिशा में एक ठोस कदम उठाया है। गुरुदेव आचार्य राजेन्द्रसूरीजी महाराजा की 421 हस्तनिर्मित चित्रों की रथयात्रा-प्रदर्शनी ने न सिर्फ नगर की धार्मिक सजीवता को बढ़ावा दिया, बल्कि जैन समुदाय एवं अन्य धर्मप्रेमियों में जागरूकता और उत्साह को भी प्रेरित किया।
विभिन्न प्रदेशों—कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र एवं मध्य प्रदेश—से इस आयोजन में आगंतुक शामिल होंगे। इस श्रृंखला का समापन महत्त्वपूर्ण रूप से मोहनखेडा तीर्थ पर गुरूसप्तमी पर्व के अवसर पर होगा।
नागदा-नगर और जैन धर्मसंघ की सक्रिय भागीदारी
नगर के समस्त धर्मप्रेमी-श्रद्धालुओं ने इस भव्य रथयात्रा-प्रदर्शनी में भाग लिया, दर्शन-वंदन कर पुण्यप्राप्ति की भावना से अभिभूत हुए। श्वेतांबैर मूर्तिपूजक जैन श्रीसंघ नागदा द्वारा आयोजन का सुचारु संचालन सुनिश्चित किया गया। नगरवासियों एवं आगंतुकों को श्रद्धा-भक्ति एवं कला-संयोग का अनुभव प्राप्त हुआ।
यह आयोजन दर्शाता है कि पारंपरिक मूल्यों, अध्यात्मिक जीवन और कला-माध्यम (गुरुदेव के हस्तनिर्मित चित्र) का संयोजन किस प्रकार प्रभावशाली रूप से संभव है।
आगे की रूपरेखा और अपेक्षित प्रभाव
आगामी दिनों में इस रथयात्रा-प्रदर्शनी को अन्य नगरों में ले जाने की योजना है। इसके साथ ही गुरुदेव आचार्य राजेन्द्रसूरीजी महाराजा के द्विशताब्दी-जन्मोत्सव को व्यापक रूप से मनाने के लिए अध्ययन-सत्र, पुस्तक-प्रकाशन एवं संवाद-प्लेटफार्म की व्यवस्था की जाएगी। नागदा में ही भविष्य में युवा-संगोष्ठियाँ, प्रवचन-मालाएँ और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित होंगे।
इस तरह का आयोजन न सिर्फ स्थापत्य-कला एवं हस्तचित्रों के माध्यम से आध्यात्मिक दृष्टि को सुदृढ़ करता है, बल्कि नगर को धार्मिक-सामूहीक जीवन में प्रमुख स्थान दिलाता है।
निष्कर्ष
आज नागदा में आयोजित इस अद्वितीय आयोजन ने जैन धर्म तथा गुरुभक्ति की भावना को एक नए आयाम पर स्थापित किया। गुरुदेव आचार्य राजेन्द्रसूरीजी महाराजा के हस्तचित्रों की रथयात्रा-प्रदर्शनी ने नगर एवं समुदाय को एक साथ जोड़ा और श्रद्धालुओं को प्रेरणा दी। नागदा आज केवल एक स्थल नहीं, बल्कि श्रद्धा-भक्ति का केंद्र बन चुका है।



