Guru Saptami Mahotsav Daund में मुनिश्री रजतचंद्र विजयजी म.सा. ने कहा—घर, परिवार और समाज सद्भावना से समृद्ध बनता है। 3 दिवसीय भव्य आयोजन, प्रवचन, वरघोड़ा, गुरुपूजन और स्वामीवात्सल्य का आयोजन।
Guru Saptami Mahotsav Daund के पावन अवसर पर महाराष्ट्र के दौन्ड नगर की दिव्य धरा पर आध्यात्मिक उल्लास और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। मोहनखेड़ा महातीर्थ विकास प्रेरक आचार्यप्रवर गुरुदेव श्रीमद्विजय ऋषभचंद्र सूरीश्वरजी महाराजा साहेब के आज्ञानुवर्ती, प्रवचनदक्ष मुनिप्रवर श्री रजतचंद्र विजयजी म.सा. का यह दौन्ड नगर में प्रथम नगर प्रवेश 21 दिसंबर को ऐतिहासिक रूप से संपन्न हुआ।
नगर प्रवेश के दौरान सामैया सह साजन महाजन के साथ वाजते-गाजते भव्य शोभायात्रा निकाली गई। सकल श्रीसंघ की उपस्थिति में नगर के सेठ प्रेमसुखजी कटारिया एवं संघ अध्यक्ष घिसुलालजी ओसवाल ने भावपूर्ण आगवानी की। महिलाएं सिर पर कलश लेकर चल रही थीं और जगह-जगह गहूंलीया कर मुनिश्री के प्रथम आगमन का स्वागत किया गया।

प्रवचन का सार: “कांटा चुभेगा ही”
अहिंसा भवन उपाश्रय में आयोजित धर्मसभा में Guru Saptami Mahotsav Daund के अंतर्गत मुनिश्री ने “कांटा चुभेगा ही” विषय पर अत्यंत प्रभावशाली प्रवचन दिया। उन्होंने कहा—
“आंख में पड़ा छोटा सा तिनका भी हिमालय देखने में बाधक बन जाता है और पांव में लगा छोटा सा कांटा आगे बढ़ने से रोक देता है। वैसे ही जीवन में कुछ छोटे-छोटे कांटे परिवार, समाज और रिश्तों में कड़वाहट घोल देते हैं।”
मुनिश्री ने परिवार को स्वर्ग बनाने के लिए चार ‘कांटों’ को जीवन से निकालने का संदेश दिया—
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दुर्भावना का कांटा
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दोष-दृष्टि का कांटा
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दुख में दुखी होने का कांटा
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द्वेष-दृष्टि का कांटा
इन चारों कांटों को हटाकर ही व्यक्ति सुखी परिवार, सशक्त समाज और संतुलित जीवन की ओर बढ़ सकता है। उनकी सुमधुर वाणी, तार्किक उदाहरणों और प्रभावी प्रसंगों ने सैकड़ों श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

Guru Saptami Mahotsav Daund: त्रिदिवसीय भव्य आयोजन
Guru Saptami Mahotsav Daund के अंतर्गत अहिंसा भवन को दुल्हन की तरह सजाया गया। जिनालय में पारसनाथ पंचकल्याणक पूजन महिला मंडलों द्वारा विधिपूर्वक संपन्न हुआ।
🔹 प्रमुख कार्यक्रम:
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26 दिसंबर
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प्रातः भव्य प्रवचन सभा
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दोपहर 12:15 बजे श्री राजेंद्रसूरि गुरुपद महापूजन (संगीतमय आयोजन)
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27 दिसंबर (पौष सुदी सातम)
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प्रातः सकल संघ नवकारसी
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भव्यतम वरघोड़ा व धर्मसभा
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सकल श्री स्वामीवात्सल्य
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रात्रि में 108 दीपकों से सामूहिक गुरुदेव आरती
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प्रतिदिन प्रत्येक कार्यक्रम में प्रभावना वितरण किया जा रहा है।

क्षेत्रीय सहभागिता और समाजिक प्रभाव
पुणे, तलेगांव, बारामती सहित आसपास के क्षेत्रों से श्रद्धालु बड़ी संख्या में पधारकर धर्मलाभ ले रहे हैं। क्षेत्रीय श्रीसंघों की सक्रिय भागीदारी से Guru Saptami Mahotsav Daund सामाजिक एकता, सद्भाव और आध्यात्मिक चेतना का सशक्त मंच बन गया है। दौन्ड श्रीसंघ द्वारा उत्कृष्ट व्यवस्थाएं की जा रही हैं।

