संतों के आशीर्वाद और सत्संग से जीवन में आती है सकारात्मक ऊर्जा, कृष्णा माँ ने दिया धन-समय के सदुपयोग का संदेश
संवाददाता :अनीस कुमार
Ashta । ब्रह्मानंद जन सेवा संघ के तत्वावधान एवं श्रद्धेय कृष्णा माँ के पावन सानिध्य में आयोजित पांच दिवसीय श्री गुरु पूर्णिमा अमृत महोत्सव का चौथा दिवस श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर हजारों गुरु भक्तों ने अपनी आराध्य गुरु माँ कृष्णा जी का जन्मदिन बड़े ही धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया।
गुरु पूर्णिमा अमृत महोत्सव के तहत आयोजित कार्यक्रम में आष्टा नगर भक्ति और आस्था के रंग में रंगा नजर आया। गुरु माँ के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में नगर में भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें ढोल-बाजों, धार्मिक झांकियों और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की सहभागिता रही। शोभायात्रा में राधा-कृष्ण की मनमोहक झांकी आकर्षण का केंद्र रही।
नगर के विभिन्न स्थानों पर समाज समितियों, धार्मिक संगठनों और भक्तों द्वारा शोभायात्रा का स्वागत किया गया। श्रद्धालुओं ने गुरु माँ कृष्णा जी के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। पूरे नगर में उत्साह और धार्मिक वातावरण देखने को मिला।
हजारों श्रद्धालुओं ने लिया सत्संग का लाभ
शोभायात्रा के बाद दोपहर 1 बजे से 4 बजे तक आश्रम परिसर में विशेष सत्संग का आयोजन किया गया। देश के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने सत्संग में भाग लेकर गुरु माँ कृष्णा जी की अमृतवाणी का लाभ प्राप्त किया।
सत्संग के दौरान पूज्य कृष्णा माँ ने अपने प्रेरणादायी प्रवचनों में जीवन को धर्म, सेवा और सदाचार के मार्ग पर चलाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि संतों का आशीर्वाद जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाला होता है। श्रद्धा और विश्वास के साथ की गई सेवा मनुष्य के जीवन में सुख, शांति और कल्याण का मार्ग प्रशस्त करती है।
संतों के आशीर्वाद से टल जाती है विपत्ति
कृष्णा माँ ने अपने प्रवचन में एक प्रसंग सुनाते हुए कहा कि संतों के आशीर्वाद में अद्भुत शक्ति होती है। उन्होंने बताया कि एक महिला ने एक ज्योतिषी से अपने भविष्य के बारे में पूछा। ज्योतिषी ने उसे बताया कि सातवें दिन उसके पति की मृत्यु हो जाएगी। यह सुनकर महिला अत्यंत दुखी हो गई।
उसी समय गांव में एक संत का आगमन हुआ। महिला ने श्रद्धा और भक्ति भाव से संत की सेवा की। महिला की सेवा से प्रसन्न होकर संत ने उसे आशीर्वाद दिया—”सौभाग्यवती भव।”
महिला ने संत से कहा कि जब उसके पति की मृत्यु सातवें दिन निश्चित बताई गई है, तो यह आशीर्वाद कैसे संभव होगा। संत ने कहा कि आशीर्वाद दे दिया गया है, अब चिंता मत करो।

इसके बाद महिला दोबारा ज्योतिषी के पास पहुंची और पूरी बात बताई। ज्योतिषी ने विचार करने के बाद कहा कि निश्चित रूप से कोई बड़ी घटना होने वाली थी, लेकिन संत के आशीर्वाद से वह संकट टल गया।
उन्होंने बताया कि जिस दिन घटना होनी थी, उस दिन महिला ने पति के स्नान के लिए गर्म पानी रखा था। पति ने गलती से वह पानी गिरा दिया, जिससे वहां पत्थर के नीचे छिपी नागिन मर गई, जो उसे डसने वाली थी। इस प्रकार एक बड़ा संकट टल गया।
कृष्णा माँ ने कहा कि संतों की कृपा, सेवा और आशीर्वाद मनुष्य के जीवन में सुरक्षा और मार्गदर्शन का माध्यम बनते हैं।
धन और समय का करें सदुपयोग
सत्संग में कृष्णा माँ ने श्रद्धालुओं को धन और समय के सही उपयोग का महत्व भी समझाया। उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपनी कमाई और समय दोनों का सदुपयोग करना चाहिए। धन केवल स्वयं के सुख के लिए नहीं, बल्कि जरूरतमंदों की सहायता और धर्म कार्यों में भी लगाना चाहिए।
उन्होंने एक किसान का उदाहरण देते हुए बताया कि एक राजा ने किसान से पूछा कि वह एक दिन में कितना कमाता है और अपनी आय का उपयोग किस प्रकार करता है। किसान ने बताया कि वह प्रतिदिन चार आने कमाता है।
किसान ने कहा कि पहला हिस्सा वह अपने परिवार के पालन-पोषण में खर्च करता है। दूसरा हिस्सा माता-पिता की सेवा और उनके ऋण को चुकाने में लगाता है। तीसरा हिस्सा वह दान-पुण्य के कार्यों में खर्च करता है और चौथा हिस्सा भविष्य के लिए सुरक्षित रखता है।
कृष्णा माँ ने इस प्रसंग के माध्यम से बताया कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी आय का कुछ भाग सेवा, दान और धार्मिक कार्यों में अवश्य लगाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार धन का सदुपयोग आवश्यक है, उसी प्रकार जीवन के अमूल्य समय का भी सही उपयोग करना चाहिए।
उन्होंने श्रद्धालुओं से प्रतिदिन कुछ समय ईश्वर भक्ति, ध्यान और सत्संग के लिए निकालने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक साधना से मन को शांति मिलती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
गुरु दीक्षा और पूजन कार्यक्रम आज
श्री गुरु पूर्णिमा अमृत महोत्सव के अंतर्गत आगामी कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए आयोजकों ने बताया कि बुधवार सुबह 7 बजे गुरु दीक्षा एवं नाम दान कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसके बाद दोपहर 2 बजे पादुका पूजन एवं गुरु पूजन का आयोजन होगा।
दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक विशेष सत्संग भी आयोजित किया जाएगा। आयोजकों ने सभी धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर सत्संग, गुरु पूजन और धार्मिक आयोजनों में शामिल होकर धर्म लाभ प्राप्त करें।
गुरु पूर्णिमा अमृत महोत्सव के आयोजन से आष्टा क्षेत्र में लगातार आध्यात्मिक वातावरण बना हुआ है। श्रद्धालुओं का कहना है कि गुरु माँ के प्रवचन जीवन को सही दिशा देने और आत्मिक शांति प्राप्त करने का मार्ग दिखाते हैं।
