गुरु मां स्वस्तिभूषण माता जहाजपुर मंगल विहार के साथ पीपलू क्षेत्र में भव्य जिन मंदिर शिलान्यास समारोह, अतिशय चमत्कार, दीक्षा उत्सव और श्रद्धा का ऐतिहासिक संगम।
गुरु मां स्वस्तिभूषण माता जहाजपुर मंगल विहार का पावन शुभारंभ
गुरु मां स्वस्तिभूषण माता जहाजपुर मंगल विहार से पीपलू (टोंक, राजस्थान) की ओर एक ऐसा आध्यात्मिक अध्याय प्रारंभ हुआ है, जो केवल एक यात्रा नहीं बल्कि श्रद्धा, संयम और धर्म चेतना का जीवंत संदेश है। भारत गौरव, परम विदुषी लेखिका एवं जहाजपुर स्वस्तिधाम तीर्थ प्रणेत्री गणिनी आर्यिका 105 स्वस्तिभूषण माता का यह मंगल विहार क्षेत्र के जैन समाज के लिए ऐतिहासिक और अविस्मरणीय बन गया है।
प्यावड़ी का अतिप्राचीन चंद्रप्रभु दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र
श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर, प्यावड़ी
प्यावड़ी क्षेत्र में स्थित यह अतिप्राचीन जैन अतिशय स्थल श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है। यहाँ भगवान चंद्रप्रभु की मनोहारी प्रतिमा विराजमान है, जिनके दर्शन मात्र से मन को अद्भुत शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव होता है।
चमत्कार, आस्था और अनुभूत दिव्यता
स्थानीय श्रद्धालुओं एवं पत्रकार पारस जैन ‘पार्श्वमणि’ (कोटा) के अनुसार, पूर्णिमा के अवसर पर प्रातःकालीन अभिषेक के समय कई बार चांदी के सिक्कों का स्वतः वेदी पर प्रकट होना एवं केसर के दिव्य चिन्ह दिखाई देना आस्था को और दृढ़ करता है।
यह घटनाएँ अनेक जैन पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं और श्रद्धालुओं के विश्वास को नई ऊँचाई देती हैं।
पीपलू जैन समाज की सक्रिय भूमिका
प्यावड़ी से लगभग 6 किलोमीटर दूर स्थित पीपलू ग्राम में लगभग 400 जैन परिवार निवासरत हैं। यहाँ की युवा पीढ़ी प्रतिदिन इस अतिशय क्षेत्र में आकर अभिषेक एवं सेवा कार्य करती है। यही सामूहिक समर्पण इस क्षेत्र को जीवंत तीर्थ बनाता है।
भव्य जिन मंदिर शिलान्यास समारोह की रूपरेखा
गुरु मां स्वस्तिभूषण माता जहाजपुर मंगल विहार के पुण्य अवसर पर प्यावड़ी में भव्य जिन मंदिर शिलान्यास समारोह का आयोजन किया जा रहा है।
इस ऐतिहासिक आयोजन को इंद्रनंदी जी गुरुदेव ससंघ का पावन सान्निध्य प्राप्त होगा।
प्रतिष्ठाचार्य एवं अनुष्ठाचार्य का मार्गदर्शन
इस मंगल अवसर को विधिपूर्वक संपन्न कराने हेतु
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प्रतिष्ठाचार्य पंडित मनोज शास्त्री बगरोही
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अनुष्ठाचार्य कपिल भैया (इंदौर)
का मार्गदर्शन प्राप्त होगा। इनके निर्देशन में संपूर्ण वातावरण भक्ति, विधि और उल्लास से परिपूर्ण रहेगा।
गुरु मां का 30वां दीक्षा दिवस – संयम की प्रेरणा
इसी पावन अवसर पर गुरु मां स्वस्तिभूषण माता जी का 30वां दीक्षा समारोह भी श्रद्धा और गरिमा के साथ मनाया जाएगा। यह अवसर साधना, त्याग और आत्मकल्याण की भावना को और प्रबल करेगा।
श्रद्धालुओं में उल्लास और आध्यात्मिक ऊर्जा
देश-प्रदेश से अपार संख्या में श्रद्धालु इस समारोह में सहभागिता करेंगे। संपूर्ण वातावरण हर्षोल्लास, भक्ति और मंगल भावनाओं से ओत-प्रोत रहेगा।
निष्कर्ष
गुरु मां स्वस्तिभूषण माता जहाजपुर मंगल विहार केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और भविष्य की आध्यात्मिक नींव रखने वाला ऐतिहासिक क्षण है। प्यावड़ी का यह आयोजन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगा।


