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गुणी ज्ञानी साधु सम्मान भाव: आर्यिका यशस्विनी माताजी का प्रेरणादायक संदेश, निंदा से दूर रहने की सीख

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Published On: 14 December 2025
गुणी ज्ञानी साधु सम्मान भाव पर आर्यिका यशस्विनी माताजी का प्रवचन
— इंदौर में धर्मसभा के दौरान गणिणी आर्यिका यशस्विनी माताजी

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गुणी ज्ञानी साधु सम्मान भाव: निंदा नहीं, आत्मचिंतन का मार्ग अपनाएं

गुणी ज्ञानी साधु सम्मान भाव जीवन को शुद्ध, शांत और संस्कारित बनाता है। इसी भाव को केंद्र में रखते हुए गणिणी आर्यिका यशस्विनी माताजी ने इंदौर के छत्रपति नगर स्थित दिगंबर जैन आदिनाथ जिनालय में आयोजित धर्मसभा में अत्यंत प्रेरणादायक प्रवचन दिया।

धर्मसभा का उद्देश्य

धर्मसभा का मुख्य उद्देश्य समाज में गुणों को देखने की दृष्टि विकसित करना और दोष-दृष्टि व निंदा प्रवृत्ति से दूर रहने का संदेश देना था।

गुणी ज्ञानी साधु सम्मान भाव क्यों आवश्यक है? 

आर्यिका माताजी ने कहा कि—

“हमें गुणी, ज्ञानी, त्यागी, धर्मात्मा, साधु एवं सज्जनों के प्रति मन, वचन और काय से सम्मान और वात्सल्य का भाव रखना चाहिए।”

आज का मनुष्य दूसरों के गुणों से अधिक दोषों को देखने लगा है। यही प्रवृत्ति मानसिक अशांति और सामाजिक विघटन का कारण बन रही है।

निंदा क्यों है हिंसा के समान?

माताजी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि—

  • निंदा करना मानसिक हिंसा है
  • निंदा सुनना भी हिंसा का भागीदार बनना है
  • निंदा से आत्मा अशुद्ध होती है

“दूसरों के दोष देखने के बजाय अपने दोष देखें, वहीं से आत्म-सुधार शुरू होता है।”

सात अवस्थाओं में मौन क्यों आवश्यक है? 

आर्यिका यशस्विनी माताजी ने सात ऐसी अवस्थाओं का उल्लेख किया, जहाँ मौन अत्यंत आवश्यक बताया गया—

मौन रखने के सात अवसर 

  • स्नान करते समय
  • भोजन के समय
  • मल-मूत्र विसर्जन के समय
  • दूसरों के दोष दिखाई देने पर
  • षट आवश्यक क्रियाओं के समय
  • वमन (उल्टी) के समय
  • वाद-विवाद के समय

इन समयों में मौन रखने से मन शांत, विचार पवित्र और आत्मा संयमित रहती है।

गुणी ज्ञानी साधु सम्मान भाव से क्या लाभ? 

  • अहंकार का क्षय
  • मानसिक शांति
  • सामाजिक सौहार्द
  • आत्मिक उन्नति
  • कर्मों की निर्जरा

गुणी ज्ञानी साधु सम्मान भाव व्यक्ति को धर्म के मार्ग पर स्थिर करता है।

धर्मसभा में प्रमुख उपस्थिति 

धर्मसभा में अनेक श्रद्धालुजन उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से—

  • प्रद्युम्न पाटनी
  • भूपेंद्र जैन
  • राजेश जैन दद्दू
  • डॉ. जैनेंद्र जैन
  • अतुल जैन (चीकू)

सभा का संचालन श्रीमती सोनाली बागड़िया ने किया।

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निष्कर्ष

यदि समाज में गुणी ज्ञानी साधु सम्मान भाव विकसित हो जाए, तो निंदा स्वतः समाप्त हो जाएगी और जीवन धर्म, संयम व शांति से भर जाएगा। यही आर्यिका यशस्विनी माताजी के प्रवचन का सार है।

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