श्रावण के अंतिम सोमवार को देवरा महादेव में विशाल भंडारा, 900 साल पुरानी धरोहर के संरक्षण की उठी मांग
सांझा लोकतंत्र | योगेश ज़ख्मी
मो. 9981721501
मनावर। ग्राम देवरा स्थित प्राचीन एवं ऐतिहासिक देवरा महादेव मंदिर में श्रावण माह के अंतिम सोमवार को श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। नर्मदा नदी के पावन तट के समीप स्थित इस प्राचीन शिव मंदिर में श्रावण के अंतिम सोमवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। क्षेत्र के विभिन्न गांवों से शिवभक्त कांवड़ में नर्मदा जल लेकर देवरा महादेव पहुंचेंगे और भगवान शिव का जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना करेंगे। धार्मिक आस्था से जुड़े इस आयोजन को लेकर ग्रामीणों और श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह है।
देवरा महादेव मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि क्षेत्र की प्राचीन ऐतिहासिक और पुरातात्विक विरासत का भी महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार मंदिर करीब 900 वर्ष पुराना है और इसका निर्माण परमारकालीन स्थापत्य परंपरा से जुड़ा माना जाता है। मंदिर परिसर में आज भी प्राचीन शिवलिंग, जलाधारी, मूर्तियां, पत्थरों पर उकेरी गई कलात्मक आकृतियां तथा स्थापत्य के अनेक बिखरे अवशेष मौजूद हैं। ये अवशेष इस स्थान के गौरवशाली अतीत और इसकी ऐतिहासिक महत्ता की कहानी बयां करते हैं।
हालांकि समय के साथ उचित संरक्षण के अभाव में इस प्राचीन धरोहर की स्थिति चिंता का विषय बनती जा रही है। मंदिर पुरातत्व विभाग के अभिलेखों में दर्ज होने के बावजूद लंबे समय से संरक्षण और जीर्णोद्धार की प्रतीक्षा कर रहा है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि समय रहते वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण कार्य नहीं किया गया तो मंदिर के प्राचीन स्थापत्य और परिसर में बिखरे पुरातात्विक अवशेषों को अपूरणीय नुकसान पहुंच सकता है।
सर्वेक्षण के बाद जगी थी संरक्षण की उम्मीद
देवरा महादेव मंदिर को लेकर क्षेत्रवासियों में उस समय उम्मीद जगी थी, जब 28 अगस्त 2024 को संबंधित विभाग द्वारा मंदिर का सर्वेक्षण किया गया था। सर्वेक्षण के बाद लोगों को लगा था कि अब मंदिर की प्राचीन विरासत के संरक्षण, जीर्णोद्धार और परिसर के विकास की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे। लेकिन सर्वेक्षण के करीब दो वर्ष बीतने के बाद भी अपेक्षित संरक्षण कार्य शुरू नहीं हो सका है।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि किसी ऐतिहासिक धरोहर का केवल अभिलेखों में दर्ज होना पर्याप्त नहीं है। उसके संरक्षण के लिए नियमित निगरानी, विशेषज्ञों की सलाह, वैज्ञानिक तरीके से जीर्णोद्धार और पुरातात्विक अवशेषों की सुरक्षा भी आवश्यक है। ग्रामीणों ने शासन और पुरातत्व विभाग से मांग की है कि सर्वेक्षण के आधार पर तैयार रिपोर्ट और प्रस्ताव को सार्वजनिक किया जाए तथा संरक्षण कार्य को जल्द जमीन पर उतारा जाए।
विधायक की कांवड़ यात्रा से मांग को मिला बल
देवरा महादेव मंदिर के संरक्षण और पुनर्निर्माण की मांग को मनावर विधायक डॉ. हीरालाल अलावा की पहल से भी बल मिला है। विधायक ने मनावर स्थित बंकनाथ मंदिर से देवरा महादेव मंदिर तक करीब 12 किलोमीटर की कांवड़ यात्रा निकाली और नर्मदा जल लेकर देवरा महादेव पहुंचे। यहां उन्होंने भगवान शिव का जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना की।
विधायक की इस कांवड़ यात्रा को धार्मिक आस्था के साथ-साथ मंदिर के संरक्षण की मांग से जोड़कर देखा जा रहा है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों द्वारा इस ऐतिहासिक मंदिर की ओर ध्यान दिए जाने से वर्षों से चली आ रही संरक्षण की मांग को नई ऊर्जा मिली है। लोगों को उम्मीद है कि शासन स्तर पर भी इस प्राचीन मंदिर की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
श्रावण में उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़
श्रावण माह में देवरा महादेव मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। नर्मदा तट से जल लेकर आने वाले कांवड़िए भगवान देवरा महादेव का अभिषेक कर अपनी मनोकामनाओं के लिए पूजा-अर्चना करते हैं। श्रावण के प्रत्येक सोमवार को मंदिर में विशेष धार्मिक वातावरण देखने को मिलता है। अंतिम सोमवार को श्रद्धालुओं की संख्या और अधिक बढ़ने की संभावना है।
इसी अवसर पर आयोजित होने वाला विशाल भंडारा श्रद्धालुओं के लिए सेवा और प्रसादी का महत्वपूर्ण आयोजन होगा। ग्रामीणों एवं आयोजन से जुड़े लोगों द्वारा दूर-दराज से आने वाले शिवभक्तों के लिए भोजन और प्रसादी की व्यवस्था की जाएगी। महाशिवरात्रि और श्रावण मास के दौरान भी मंदिर में विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं, जिसके चलते पूरे वर्ष यह स्थान श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना रहता है।
सफाई अभियान में सामने आए थे प्राचीन अवशेष
देवरा महादेव मंदिर की ऐतिहासिक महत्ता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि कुछ वर्ष पूर्व पुरातत्व विभाग द्वारा यहां सफाई अभियान चलाया गया था। इस दौरान मलबे और मिट्टी में दबे प्राचीन शिवलिंग सहित कई अन्य पुरातात्विक अवशेष सामने आए थे। इन अवशेषों ने मंदिर परिसर के प्राचीन इतिहास को लेकर स्थानीय लोगों की जिज्ञासा और आस्था दोनों को और मजबूत किया।
ग्रामीणों का कहना है कि परिसर में अभी भी कई प्राचीन अवशेष बिखरे हुए हैं। यदि इनका व्यवस्थित दस्तावेजीकरण, संरक्षण और सुरक्षित स्थान पर रखरखाव किया जाए तो आने वाली पीढ़ियों को इस क्षेत्र के इतिहास से परिचित कराया जा सकता है। इसके लिए पुरातत्व विशेषज्ञों की देखरेख में विस्तृत सर्वेक्षण और संरक्षण योजना तैयार किए जाने की आवश्यकता है।
मूलभूत सुविधाओं के विकास की भी मांग
क्षेत्रवासियों ने मंदिर के संरक्षण के साथ-साथ श्रद्धालुओं के लिए मूलभूत सुविधाओं के विकास की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि मंदिर परिसर में स्थायी सूचना बोर्ड लगाया जाना चाहिए, जिसमें मंदिर के इतिहास, स्थापत्य और पुरातात्विक महत्व की जानकारी उपलब्ध हो। इससे यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को इस प्राचीन धरोहर के बारे में जानकारी मिल सकेगी।
इसके अलावा मंदिर परिसर की सुरक्षा के लिए स्थायी चौकीदार की नियुक्ति, प्राचीन अवशेषों को सुरक्षित रखने के लिए उचित व्यवस्था, साफ-सफाई, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था तथा श्रद्धालुओं के लिए अन्य आवश्यक सुविधाओं का विकास भी जरूरी बताया गया है।
लोगों का मानना है कि देवरा महादेव मंदिर को केवल धार्मिक स्थल के रूप में नहीं, बल्कि धार्मिक और ऐतिहासिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है। नर्मदा नदी की निकटता, प्राचीन मंदिर और यहां मौजूद पुरातात्विक अवशेष इसे पर्यटन की दृष्टि से विशेष बनाते हैं। यदि योजनाबद्ध तरीके से संरक्षण और विकास कार्य किए जाएं तो यह क्षेत्र स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा कर सकता है।
संरक्षण में देरी पर चिंता
क्षेत्रवासियों की सबसे बड़ी चिंता मंदिर के संरक्षण में हो रही देरी को लेकर है। उनका कहना है कि करीब 900 वर्ष पुरानी धरोहर समय की मार और प्राकृतिक क्षरण के कारण लगातार कमजोर हो सकती है। प्राचीन पत्थरों, मूर्तियों और स्थापत्य अवशेषों को सुरक्षित रखने के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत है।
लोगों ने मांग की है कि मंदिर के संरक्षण का कार्य किसी सामान्य निर्माण एजेंसी के बजाय पुरातत्व एवं संरक्षण विशेषज्ञों की निगरानी में किया जाए। मंदिर की मूल संरचना और ऐतिहासिक स्वरूप को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिक पद्धति से संरक्षण किया जाना चाहिए, ताकि जीर्णोद्धार के नाम पर इसकी प्राचीन पहचान प्रभावित न हो।
भंडारे के साथ फिर उठेगी विरासत बचाने की आवाज
श्रावण के अंतिम सोमवार को देवरा महादेव मंदिर में आयोजित होने वाला विशाल भंडारा जहां श्रद्धालुओं के लिए आस्था, सेवा और प्रसादी का अवसर बनेगा, वहीं यह आयोजन मंदिर की प्राचीन विरासत के संरक्षण की मांग को भी एक बार फिर मजबूती से सामने लाएगा।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक विरासत दोनों को साथ लेकर चलने की आवश्यकता है। भगवान देवरा महादेव के प्रति लोगों की गहरी श्रद्धा इस मंदिर की पहचान है, वहीं करीब 900 वर्ष पुरानी मानी जाने वाली इसकी ऐतिहासिक संरचना पूरे क्षेत्र की साझा धरोहर है। इसलिए इसके संरक्षण की जिम्मेदारी केवल स्थानीय ग्रामीणों की नहीं, बल्कि शासन और संबंधित विभागों की भी है।
अब लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सर्वेक्षण के बाद शासन और पुरातत्व विभाग कब तक ठोस संरक्षण योजना तैयार करते हैं और कब से मंदिर परिसर में वास्तविक काम शुरू होता है। यदि समय रहते मंदिर का वैज्ञानिक संरक्षण, पुरातात्विक अवशेषों की सुरक्षा और श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक सुविधाओं का विकास किया जाता है, तो देवरा महादेव आने वाले समय में नर्मदा क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण धार्मिक, ऐतिहासिक और पुरातात्विक पर्यटन केंद्र बन सकता है।
श्रावण के अंतिम सोमवार का भंडारा इसलिए केवल धार्मिक आयोजन नहीं होगा, बल्कि इस प्राचीन धरोहर को बचाने और आने वाली पीढ़ियों तक इसकी विरासत पहुंचाने के संकल्प का अवसर भी बनेगा।
