भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज में रेडिएशन सुविधा बंद होने से हर महीने 1500 से अधिक कैंसर मरीजों को इलाज के लिए एम्स और निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है।
भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज में रेडिएशन सुविधा ठप, हर महीने 1500 से ज्यादा कैंसर मरीज इलाज के लिए भटकने को मजबूर
राजधानी भोपाल के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में से एक गांधी मेडिकल कॉलेज भोपाल रेडिएशन सुविधा के अभाव के कारण गंभीर स्वास्थ्य संकट का सामना कर रहा है। हर महीने यहां लगभग 1500 से अधिक कैंसर मरीज इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं, लेकिन रेडिएशन थेरेपी की सुविधा उपलब्ध नहीं होने से उन्हें केवल ओपीडी में सलाह देकर वापस भेज दिया जाता है।यह स्थिति न केवल मरीजों के लिए परेशानी का कारण बन रही है बल्कि मेडिकल छात्रों की पढ़ाई और प्रशिक्षण पर भी इसका असर पड़ रहा है।
गांधी मेडिकल कॉलेज भोपाल रेडिएशन सुविधा क्यों ठप
गांधी मेडिकल कॉलेज में कैंसर के मरीजों के लिए रेडिएशन थेरेपी बेहद जरूरी मानी जाती है। लेकिन यहां की पुरानी कोबाल्ट मशीन लंबे समय से खराब पड़ी हुई है।इसके अलावा अस्पताल में मौजूद ब्रेकी थेरेपी मशीन भी करीब एक साल से बंद है, जिससे सर्जरी के बाद मरीजों को जरूरी रेडिएशन उपचार नहीं मिल पा रहा है।कॉलेज प्रशासन के अनुसार नई डुअल एनर्जी लीनेक मशीन लगाने की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन अब तक मशीन का ऑर्डर जारी नहीं किया गया है।
हर महीने 1500 से अधिक कैंसर मरीज प्रभावित
गांधी मेडिकल कॉलेज भोपाल में हर महीने करीब 1500 से ज्यादा कैंसर मरीज उपचार की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं।लेकिन रेडिएशन सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण मरीजों को सिर्फ जांच और सलाह देकर वापस भेज दिया जाता है।कई मरीज ऐसे होते हैं जिनकी सर्जरी यहां हो चुकी होती है, लेकिन आगे के उपचार के लिए उन्हें दूसरे अस्पतालों में जाना पड़ता है।इससे मरीजों और उनके परिवारों पर मानसिक और आर्थिक दोनों तरह का दबाव बढ़ जाता है।
कोबाल्ट और ब्रेकी थेरेपी मशीन बंद
गांधी मेडिकल कॉलेज में कैंसर उपचार के लिए पहले कोबाल्ट मशीन और ब्रेकी थेरेपी यूनिट का उपयोग किया जाता था।
लेकिन
- कोबाल्ट मशीन लंबे समय से खराब है
- ब्रेकी थेरेपी मशीन भी बंद पड़ी है
- नई लीनेक मशीन अभी तक स्थापित नहीं हुई
कॉलेज की डीन डॉ. कविता एन सिंह के अनुसार नई मशीन लगाने की प्रक्रिया जारी है और जल्द ही रेडिएशन सुविधा शुरू करने की योजना है।
मरीजों को एम्स और निजी अस्पतालों में इलाज
गांधी मेडिकल कॉलेज में रेडिएशन सुविधा न होने के कारण मरीजों को मजबूरी में
- एम्स भोपाल
- निजी कैंसर अस्पताल
का सहारा लेना पड़ रहा है।एम्स में पहले से ही मरीजों की लंबी कतार रहती है, जिससे इलाज के लिए कई हफ्तों तक इंतजार करना पड़ता है।दूसरी ओर निजी अस्पतालों में इलाज कराने पर मरीजों को डेढ़ से दो लाख रुपए तक अतिरिक्त खर्च करना पड़ सकता है।यह खर्च गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों के लिए बेहद कठिन साबित होता है।
मेडिकल छात्रों की पढ़ाई पर असर
गांधी मेडिकल कॉलेज भोपाल रेडिएशन सुविधा बंद होने का असर मेडिकल शिक्षा पर भी पड़ रहा है।नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने पिछले सत्र में कॉलेज के ऑन्कोलॉजी विभाग की चार पीजी सीटों की मान्यता रद्द कर दी थी।बाद में कॉलेज प्रशासन द्वारा नई लीनेक मशीन लगाने का आश्वासन देने पर सीटों को फिर से बहाल कर दिया गया।लेकिन मशीन अभी तक स्थापित नहीं होने के कारण
- पीजी छात्रों को रेडिएशन थेरेपी का व्यावहारिक अनुभव नहीं मिल रहा
- कैंसर उपचार की पढ़ाई अधूरी रह रही है
प्रदेश के अन्य कॉलेजों में मशीन, यहां देरी
मध्य प्रदेश सरकार ने प्रदेश के पांच मेडिकल कॉलेजों में डुअल लीनेक मशीन लगाने का प्रस्ताव तैयार किया था।
सूत्रों के अनुसार
- चार कॉलेजों में मशीनों के ऑर्डर जारी हो चुके हैं
- लेकिन गांधी मेडिकल कॉलेज के लिए अब तक ऑर्डर नहीं दिया गया
राजधानी के सबसे बड़े सरकारी मेडिकल कॉलेज में यह स्थिति स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए चिंता का विषय बन गई है।
तैयार है रेडिएशन बंकर
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि कैंसर उपचार को बेहतर बनाने के लिए रेडिएशन बंकर तैयार कर लिया गया है।यह बंकर एटॉमिक एनर्जी रेगुलेटरी बोर्ड (AERB) के मानकों के अनुसार बनाया गया है।
इसमें
- तीन मीटर मोटी कंक्रीट की दीवारें
- विशेष सुरक्षा शील्डिंग
- आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था
लगाई गई है।जल्द ही AERB की टीम निरीक्षण करेगी और अनुमति मिलने के बाद मशीन स्थापित की जाएगी।
मध्य प्रदेश में बढ़ रहे कैंसर के मामले
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) की कैंसर रजिस्ट्री के अनुसार
- मध्य प्रदेश में लगभग 1,54,567 कैंसर मरीजों को तत्काल उपचार की जरूरत है
- भोपाल में ही करीब 4350 मरीज कैंसर से प्रभावित हैं
- प्रदेश में हर महीने करीब 3500 लोगों की मौत कैंसर के कारण हो रही है
ऐसे में राजधानी के प्रमुख सरकारी मेडिकल कॉलेज में रेडिएशन सुविधा का अभाव गंभीर चिंता का विषय बन गया है।
निष्कर्ष
गांधी मेडिकल कॉलेज भोपाल रेडिएशन सुविधा का ठप होना न केवल मरीजों के लिए बल्कि प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए भी गंभीर समस्या बन गया है।हर महीने हजारों मरीज इलाज की उम्मीद लेकर आते हैं, लेकिन सुविधा के अभाव में उन्हें दूसरे अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है।यदि जल्द ही नई रेडिएशन मशीन स्थापित नहीं की गई, तो यह स्थिति और गंभीर हो सकती है।सरकार और अस्पताल प्रशासन को मिलकर जल्द से जल्द इस सुविधा को शुरू करना चाहिए ताकि कैंसर मरीजों को समय पर और सस्ती चिकित्सा उपलब्ध हो सके।
