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NEET Paper Leak Protest: गीतांजलि आंग्मो ने कांग्रेस पर उठाए सवाल, बोलीं- जंतर-मंतर पर छात्रों के साथ होना चाहिए था, आंदोलन गैर-राजनीतिक है

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Published On: 23 July 2026
Geetanjali Angmo addresses the media during the NEET paper leak protest, emphasizing that the student movement is non-political and urging leaders to join protesters at Jantar Mantar in New Delhi
— Geetanjali Angmo addresses the media during the NEET paper leak protest, emphasizing that the student movement is non-political and urging leaders to join protesters at Jantar Mantar in New Delhi

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NEET Paper Leak Protest: गीतांजलि आंग्मो ने कांग्रेस पर उठाए सवाल, बोलीं- जंतर-मंतर पर छात्रों के साथ होना चाहिए था, आंदोलन गैर-राजनीतिक है

नई दिल्ली। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में जारी विरोध-प्रदर्शन के बीच आंदोलन ने एक नया राजनीतिक मोड़ ले लिया है। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन में उनकी पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो ने कांग्रेस के हालिया विरोध प्रदर्शन पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि पार्टी वास्तव में छात्रों के साथ खड़ी थी, तो उसे प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन करने के बजाय जंतर-मंतर पर छात्रों के बीच पहुंचना चाहिए था।

गीतांजलि आंग्मो ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आंदोलन का उद्देश्य किसी राजनीतिक दल को लाभ पहुंचाना नहीं है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और छात्रों के भविष्य की रक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने दोहराया कि यह आंदोलन पूरी तरह गैर-राजनीतिक है और इसमें केवल वही लोग स्वागत योग्य हैं जो बिना किसी राजनीतिक एजेंडे के छात्रों के समर्थन में आगे आते हैं।

NEET पेपर लीक आंदोलन के बीच कांग्रेस की रणनीति पर सवाल

गीतांजलि आंग्मो ने कांग्रेस द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक आवास 7, लोक कल्याण मार्ग के बाहर किए गए विरोध प्रदर्शन को लेकर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस प्रकार का प्रदर्शन आंदोलन की मूल भावना से मेल नहीं खाता।

उनका कहना था कि यदि कांग्रेस छात्रों के संघर्ष को गंभीरता से लेती, तो उसके वरिष्ठ नेताओं को जंतर-मंतर पहुंचकर छात्रों और आंदोलनकारियों के साथ बैठना चाहिए था। उन्होंने कहा कि केवल प्रतीकात्मक प्रदर्शन करने से छात्रों का भरोसा नहीं जीता जा सकता।

आंग्मो ने कहा कि देश की युवा पीढ़ी पहले की तुलना में कहीं अधिक जागरूक हो चुकी है और अब केवल राजनीतिक बयानबाजी या प्रतीकात्मक विरोध से संतुष्ट नहीं होगी।

“जनता अब पहले जैसी नहीं रही”

एक मीडिया बातचीत में गीतांजलि आंग्मो ने कहा कि आज का भारत पहले जैसा नहीं है। उन्होंने कहा कि लोग अब नेताओं के वास्तविक इरादों को समझने लगे हैं और केवल राजनीतिक लाभ के लिए किए जा रहे प्रयासों को आसानी से पहचान लेते हैं।

उन्होंने कहा कि जनता और विशेष रूप से युवा वर्ग अब ईमानदारी और जवाबदेही चाहता है। यदि कोई राजनीतिक दल केवल अवसर देखकर आंदोलन से जुड़ने की कोशिश करेगा, तो युवा उसे स्वीकार नहीं करेंगे।

आंग्मो ने कहा कि छात्रों का आंदोलन किसी पार्टी का मंच नहीं बल्कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग का मंच है।

सोनम वांगचुक की लड़ाई को आगे बढ़ा रहीं गीतांजलि

सोनम वांगचुक पिछले कई दिनों से शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे सहित विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे थे। स्वास्थ्य खराब होने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से उन्होंने अपना अनशन जारी रखा।

ऐसे समय में उनकी पत्नी गीतांजलि आंग्मो आंदोलन का नेतृत्व संभाल रही हैं। वे लगातार छात्रों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों से संवाद कर रही हैं तथा आंदोलन की दिशा और उद्देश्य को स्पष्ट कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष का नहीं बल्कि देश के लाखों छात्रों के भविष्य का आंदोलन है।

जंतर-मंतर बना छात्रों के संघर्ष का केंद्र

28 जून से जंतर-मंतर पर छात्रों और विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा लगातार प्रदर्शन किया जा रहा है। प्रदर्शनकारी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, परीक्षा प्रणाली में सुधार तथा पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

आंदोलन में देश के विभिन्न राज्यों से छात्र शामिल हुए हैं। उनका कहना है कि बार-बार होने वाले पेपर लीक से मेहनती छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है और परीक्षा प्रणाली पर जनता का भरोसा कमजोर पड़ रहा है।

आंदोलनकारियों का कहना है कि सरकार को ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए जिससे भविष्य में किसी भी राष्ट्रीय परीक्षा में इस प्रकार की अनियमितता की संभावना समाप्त हो सके।

पीएम आवास के बाहर कांग्रेस का प्रदर्शन

इसी बीच कांग्रेस ने संसद मार्च के दौरान छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद राहुल गांधी भी शामिल हुए।

प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बनी। राहुल गांधी को पुलिस ने हिरासत में लेकर वहां से हटाया। इस दौरान उनके घायल होने और नाक से खून आने की भी खबरें सामने आईं।

कांग्रेस ने इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन बताया, जबकि सरकार की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

“यह आंदोलन किसी राजनीतिक दल का नहीं”

गीतांजलि आंग्मो ने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध के लिए नहीं चलाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि उनके लिए न सरकार सबसे महत्वपूर्ण है और न विपक्ष। सबसे महत्वपूर्ण संस्था संसद है, जहां शिक्षा जैसे राष्ट्रीय मुद्दे पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य किसी सरकार को गिराना नहीं बल्कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाना है।

बिना राजनीतिक एजेंडे वालों का स्वागत

आंग्मो ने स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति या संगठन बिना किसी राजनीतिक उद्देश्य के छात्रों के समर्थन में आता है तो उसका स्वागत किया जाएगा।

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई दल या नेता अपने राजनीतिक हितों के लिए आंदोलन का उपयोग करने की कोशिश करेगा, तो उसे जनता स्वीकार नहीं करेगी।

उनके अनुसार आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत उसकी ईमानदारी और निष्पक्षता है, जिसे हर हाल में बनाए रखना जरूरी है।

राजनीतिक वर्ग को मिला स्पष्ट संदेश

गीतांजलि आंग्मो का कहना है कि इस आंदोलन ने पूरे राजनीतिक वर्ग को यह संदेश दिया है कि अब केवल भाषण देने या सोशल मीडिया पर बयान जारी करने से काम नहीं चलेगा।

उन्होंने कहा कि जनता अब नेताओं से उनके वादों पर अमल चाहती है। यदि कोई नेता शिक्षा सुधार की बात करता है तो उसे संसद और सड़क दोनों जगह उसी गंभीरता से अपनी भूमिका निभानी होगी।

उनका कहना था कि छात्र अब केवल आश्वासन नहीं बल्कि ठोस कार्रवाई चाहते हैं।

आंदोलन की प्रमुख मांगें

हाल ही में सोनम वांगचुक ने अपनी भूख हड़ताल समाप्त करने के लिए सरकार के सामने कुछ प्रमुख मांगें रखीं।

इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—

  • 20 जुलाई के मार्च में शामिल किसी भी छात्र के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाए।
  • छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों पर पुनर्विचार किया जाए।
  • शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
  • परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय बनाया जाए।
  • भविष्य में पेपर लीक रोकने के लिए मजबूत कानूनी और तकनीकी व्यवस्था लागू की जाए।

हालांकि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग इस सूची में शामिल नहीं थी। इसे कई राजनीतिक विश्लेषकों ने आंदोलन के रुख में बदलाव के रूप में देखा।

सरकार से बातचीत के संकेत

सोनम वांगचुक ने यह भी दावा किया कि केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने अस्पताल में उनसे मुलाकात की थी।

वांगचुक के अनुसार बातचीत के दौरान उन्हें भरोसा दिलाया गया कि उनकी प्रमुख मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। हालांकि सरकार की ओर से इस संबंध में विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार आंदोलनकारियों की मांगों पर क्या निर्णय लेती है।

शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग तेज

देशभर में लगातार सामने आए पेपर लीक मामलों के बाद शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग पहले से कहीं अधिक मजबूत हो गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार होने वाली गड़बड़ियां लाखों छात्रों की मेहनत और विश्वास को प्रभावित करती हैं। ऐसे में केवल दोषियों पर कार्रवाई ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि परीक्षा प्रणाली में तकनीकी और प्रशासनिक सुधार भी आवश्यक हैं।

आगे क्या?

फिलहाल जंतर-मंतर पर आंदोलन जारी है और छात्र संगठन अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। दूसरी ओर राजनीतिक दल भी इस मुद्दे पर सक्रिय हैं, जिससे आने वाले दिनों में यह मामला और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है।

गीतांजलि आंग्मो ने साफ कर दिया है कि आंदोलन का उद्देश्य राजनीति नहीं बल्कि छात्रों का भविष्य सुरक्षित करना है। उनका कहना है कि शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषय पर सभी दलों को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर समाधान की दिशा में काम करना चाहिए।

यदि सरकार और आंदोलनकारियों के बीच सकारात्मक संवाद आगे बढ़ता है तो आने वाले समय में इस विवाद का समाधान निकल सकता है। वहीं यदि मांगों पर सहमति नहीं बनती है, तो आंदोलन के और व्यापक होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

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