एम.पी. लेखक संघ की मासिक साहित्यिक गोष्ठी सम्पन्न—गीता जयंती, रवींद्र जैन स्मृति, डॉ. अंबेडकर जयंती और वंदे मातरम् के राष्ट्रीय भाव ने बढ़ाया आयोजन का गौरव
चन्देरी | 5 दिसम्बर।
मध्यप्रदेश लेखक संघ द्वारा आयोजित मासिक साहित्यिक गोष्ठी इस बार एक विशेष और बहुआयामी सांस्कृतिक आयोजन के रूप में सम्पन्न हुई। गीता जयंती सप्ताह, महान गीतकार रवींद्र जैन की पुण्यस्मृति, भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की 150वीं जयंती तथा राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के भावों को समर्पित इस कार्यक्रम का आयोजन चन्देरी के श्री विवेकानंद विद्यालय में अत्यंत गरिमामय वातावरण में किया गया। साहित्य, संस्कृति, राष्ट्रभाव और चिंतन का यह अनूठा संगम उपस्थित जनों के लिए अत्यंत प्रेरणादायी रहा। कार्यक्रम की अध्यक्षता संघ के सम्मानित संरक्षक डॉ. रामदास शर्मा ने की।
माँ सरस्वती के समक्ष आरंभ—आध्यात्मिक व साहित्यिक चेतना से गुंजायमान हुआ वातावरण
कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।
इस अवसर पर संघ के उपाध्यक्ष एवं वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. महेश तिवारी, तथा मंत्री परमलाल परम ने सामूहिक रूप से सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। उनकी मधुर वंदना ने न केवल कार्यक्रम को आध्यात्मिक ऊँचाई प्रदान की, बल्कि उपस्थित श्रोताओं में साहित्यिक ऊर्जा और राष्ट्रीय चेतना का वातावरण भी निर्मित किया।
गोष्ठी का सफल संयोजन—जयेन्द्र जैन ‘निप्पू’ का उल्लेखनीय योगदान
गोष्ठी का संयोजन चन्देरी के युवा साहित्यकार जयेन्द्र जैन ‘निप्पू’ द्वारा किया गया।
उन्होंने पूरे कार्यक्रम को सुचारु, व्यवस्थित और प्रभावशाली ढंग से संचालित करते हुए साहित्यप्रेमियों को एक मंच पर जोड़ने का सार्थक प्रयास किया। उनके संचालन में ऊर्जा, सहजता और साहित्यिक परंपरा के प्रति गहरा सम्मान दिखाई दिया।
युवा रचनाकारों से वरिष्ठ साहित्यकारों तक—विविध विषयों पर सारगर्भित प्रस्तुतियाँ
आशीष श्रोतिया: यांत्रिकी विषय पर रचनात्मक प्रयोग
कार्यक्रम की शुरुआत उभरते रचनाकार आशीष श्रोतिया की प्रस्तुति से हुई।
उन्होंने यांत्रिकी जैसे तकनीकी विषय पर आधारित अपनी पहली रचना प्रस्तुत की, जो श्रोताओं के लिए एक नया और रोचक प्रयोग साबित हुई। उनकी रचना ने दिखाया कि साहित्य केवल भावनाओं तक सीमित नहीं, बल्कि विज्ञान, तकनीक और आधुनिकता को भी अभिव्यक्ति प्रदान कर सकता है।
जयेन्द्र जैन ‘निप्पू’: सामाजिक संवेदनाओं व प्रेम का गीतात्मक प्रवाह
इसके बाद संयोजक जयेन्द्र जैन ‘निप्पू’ ने सामाजिक मुद्दों और प्रेम सम्बन्धी भावनाओं पर आधारित अपने गीत प्रस्तुत किए।
उनकी रचनाओं में सहज भाषा, भावपूर्ण अभिव्यक्ति और सामाजिक सरोकारों का गहरा स्पर्श दिखाई दिया। दर्शकों ने इस प्रस्तुति को अत्यंत सराहा।
परमलाल परम: सामाजिक बुराइयों पर प्रहार और अंबेडकर संकल्प
संघ के मंत्री परमलाल परम ने समाज में व्याप्त शराबखोरी, कुप्रथाओं और सामाजिक अव्यवस्था के खिलाफ प्रभावशाली रचना प्रस्तुत की।
उनकी पंक्तियों में सामाजिक सुधार का स्पष्ट संदेश था।
इसके साथ ही उन्होंने डॉ. भीमराव अंबेडकर के संविधान निर्माण, शिक्षा तथा सामाजिक समरसता में योगदान पर आधारित एक समर्पण गीत भी प्रस्तुत किया, जिसने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
डॉ. महेश तिवारी: बेटी बचाओ, नारी सम्मान और सामाजिक व्यवस्था पर सशक्त प्रस्तुति
वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. महेश तिवारी ने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुति में बेटी बचाओ, नारी सम्मान, और सामाजिक व्यवस्था जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण विषयों पर प्रकाश डाला।
उनकी रचना केवल साहित्यिक नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता का संदेश भी बनकर सामने आई।
श्रोताओं ने इसे कार्यक्रम की सबसे दमदार और सार्थक प्रस्तुतियों में से एक माना।
अध्यक्षीय उद्बोधन: गीता, रामायण, रवींद्र जैन और अंबेडकर विचारधारा का अद्भुत संगम
कार्यक्रम के अंतिम चरण में अध्यक्ष डॉ. रामदास शर्मा ने एक अत्यंत प्रेरणादायक उद्बोधन दिया।
उन्होंने भारत की सांस्कृतिक धरोहर रामायण, गीता जयंती के आध्यात्मिक संदेश, रवींद्र जैन के संगीत योगदान, डॉ. अंबेडकर की विचारधारा, और राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के राष्ट्रीय भाव को एक सूत्र में पिरोते हुए सशक्त भाषण प्रस्तुत किया।
उनका वक्तव्य भारतीय साहित्य, संस्कृति और संविधान के मूल्यों को जोड़ने वाला एक अद्वितीय मिश्रण था।
सचिन पुष्प तिवारी ने किया आभार—सांस्कृतिक एकता का अद्भुत उदाहरण बना कार्यक्रम
कार्यक्रम का समापन लेखक संघ के सक्रिय सदस्य सचिन पुष्प तिवारी के आभार प्रदर्शन के साथ हुआ।
उन्होंने सभी अतिथियों, साहित्यकारों, विद्यालय प्रबंधन और उपस्थित जनों का धन्यवाद किया तथा भविष्य में भी इसी प्रकार की साहित्यिक परंपराओं को आगे बढ़ाने का संकल्प व्यक्त किया।
निष्कर्ष
मध्यप्रदेश लेखक संघ की यह मासिक साहित्यिक गोष्ठी केवल एक साधारण बैठक नहीं, बल्कि साहित्य, संस्कृति, राष्ट्रभाव और सामाजिक चेतना का जीवंत उत्सव साबित हुई।
गीता जयंती से लेकर रवींद्र जैन की स्मृति, डॉ. अंबेडकर की 150वीं जयंती से लेकर वंदे मातरम् की राष्ट्रीय भावना—इन सभी तत्वों ने कार्यक्रम को एक अनूठी दिशा प्रदान की।
चन्देरी में आयोजित यह गोष्ठी साहित्यिक संवाद, रचनात्मक अभिव्यक्ति और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रही।

