मानसरोवर मेडिकल कॉलेज एवं एमजीयू अस्पताल परिसर में गूंजे ‘हर-हर महादेव’ के जयकारे, भव्य प्राण-प्रतिष्ठा एवं हवन अनुष्ठान में उमड़ा आस्था का सैलाब
संवाददाता: संदीप सिंह
भोपाल। राजधानी भोपाल स्थित मानसरोवर मेडिकल कॉलेज एवं एमजीयू (MGU) अस्पताल परिसर सोमवार को भक्ति, आध्यात्मिक ऊर्जा और वैदिक परंपराओं के रंग में पूरी तरह सराबोर नजर आया। संस्थान के नवनिर्मित मंदिर में देवाधिदेव भगवान शिव की प्रतिमा की शास्त्रोक्त विधि-विधान से प्राण-प्रतिष्ठा संपन्न हुई। इसके उपरांत वैदिक मंत्रोच्चार, हवन, पूर्णाहुति और प्रसाद वितरण के साथ एक भव्य धार्मिक आयोजन आयोजित किया गया, जिसमें कॉलेज प्रबंधन, चिकित्सकों, शिक्षकों, नर्सिंग स्टाफ, छात्र-छात्राओं, कर्मचारियों एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की।
कार्यक्रम में संस्थान के संस्थापक एवं संचालक गौरव तिवारी की गरिमामयी उपस्थिति रही। उनके नेतृत्व में आयोजित इस धार्मिक आयोजन ने पूरे परिसर को आध्यात्मिक वातावरण से भर दिया। भगवान शिव के जयकारों, वैदिक मंत्रों और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच उपस्थित लोगों ने संस्थान की निरंतर प्रगति, मरीजों के उत्तम स्वास्थ्य, समाज की सुख-समृद्धि और विश्व कल्याण की कामना की।
वैदिक विधि-विधान से संपन्न हुई भगवान शिव की प्राण-प्रतिष्ठा
कार्यक्रम की शुरुआत प्रातःकाल शुभ मुहूर्त में वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार हुई। विद्वान आचार्यों एवं पंडितों ने शास्त्रों में वर्णित विधियों के अनुरूप भगवान शिव की प्रतिमा का पूजन-अर्चन कर प्राण-प्रतिष्ठा संस्कार संपन्न कराया।
प्राण-प्रतिष्ठा हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान माना जाता है। इसके माध्यम से किसी भी देव प्रतिमा में विधिवत मंत्रोच्चार और वैदिक अनुष्ठानों के द्वारा दिव्य चेतना का आवाहन किया जाता है। इस अवसर पर मंदिर परिसर में उपस्थित श्रद्धालुओं ने पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा-अर्चना में भाग लिया।
जैसे ही प्राण-प्रतिष्ठा पूर्ण हुई, पूरा परिसर “हर-हर महादेव”, “बम-बम भोले” और “ॐ नमः शिवाय” के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह ने कार्यक्रम को और भी भव्य बना दिया।
हवन एवं पूर्णाहुति से वातावरण हुआ भक्तिमय

प्राण-प्रतिष्ठा के बाद परिसर में विशाल हवन एवं यज्ञ अनुष्ठान आयोजित किया गया। वैदिक मंत्रों, ऋचाओं और स्वस्तिवाचन के साथ यज्ञ प्रारंभ हुआ। विद्वान आचार्यों ने सभी श्रद्धालुओं को आहुतियां दिलाईं और धार्मिक महत्व की जानकारी भी दी।
हवन के दौरान भगवान शिव एवं अन्य देवी-देवताओं का आह्वान कर संस्थान, मरीजों, विद्यार्थियों और समाज के कल्याण की कामना की गई। पूर्णाहुति के समय उपस्थित सभी लोगों ने श्रद्धापूर्वक यज्ञ में भाग लेकर सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा की प्रार्थना की।
पूरे आयोजन के दौरान वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक बना रहा और मंत्रोच्चार से परिसर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार महसूस किया गया।
संस्थापक गौरव तिवारी की उपस्थिति ने बढ़ाया आयोजन का गौरव
इस धार्मिक आयोजन में संस्थान के संस्थापक एवं संचालक गौरव तिवारी विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने पूजा-अर्चना एवं हवन में भाग लेकर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त किया।
उन्होंने कहा कि चिकित्सा केवल शरीर का उपचार नहीं बल्कि सेवा, संवेदना और सकारात्मक सोच का भी माध्यम है। ऐसे धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम संस्थान के कर्मचारियों, चिकित्सकों, विद्यार्थियों और मरीजों के बीच सकारात्मक वातावरण बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि आध्यात्मिक मूल्यों और आधुनिक चिकित्सा सेवाओं का समन्वय समाज के लिए प्रेरणादायी है।
मानसरोवर परिवार ने दिखाई एकजुटता
इस अवसर पर पूरा मानसरोवर परिवार एक साथ नजर आया। कार्यक्रम में कॉलेज एवं अस्पताल के—
- वरिष्ठ चिकित्सक
- मेडिकल फैकल्टी
- नर्सिंग स्टाफ
- प्रशासनिक अधिकारी
- छात्र-छात्राएं
- कर्मचारीगण
- सामाजिक एवं धार्मिक क्षेत्र से जुड़े अतिथि
बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
सभी ने पूरे श्रद्धाभाव से पूजा-अर्चना एवं हवन में सहभागिता कर आयोजन को सफल बनाया।
मरीजों के स्वास्थ्य एवं जनकल्याण की हुई विशेष प्रार्थना
चूंकि आयोजन एक चिकित्सा संस्थान के परिसर में आयोजित किया गया था, इसलिए विशेष रूप से मरीजों के उत्तम स्वास्थ्य, शीघ्र स्वास्थ्य लाभ और समाज के कल्याण की कामना की गई।
वैदिक मंत्रों के बीच आचार्यों ने विश्व शांति, रोगमुक्त समाज, मानव सेवा और चिकित्सा क्षेत्र में निरंतर प्रगति के लिए विशेष आहुतियां अर्पित कराईं।
संस्थान से जुड़े लोगों ने भी भगवान शिव से प्रार्थना की कि अस्पताल में आने वाले प्रत्येक मरीज को बेहतर स्वास्थ्य और जीवन का आशीर्वाद प्राप्त हो।
धार्मिक आयोजन से मिला सकारात्मक संदेश
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि आधुनिक जीवन की भागदौड़ में मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का महत्व लगातार बढ़ता जा रहा है। ऐसे आयोजनों से न केवल धार्मिक आस्था मजबूत होती है बल्कि संस्थान में कार्यरत प्रत्येक व्यक्ति को सकारात्मक ऊर्जा और नई प्रेरणा भी मिलती है।
उन्होंने कहा कि चिकित्सा सेवा करुणा, सेवा और समर्पण का क्षेत्र है तथा आध्यात्मिक वातावरण इन मूल्यों को और अधिक मजबूत करता है।
चिकित्सा और आध्यात्मिकता का सुंदर समन्वय
मानसरोवर मेडिकल कॉलेज एवं एमजीयू अस्पताल लंबे समय से स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में भी सक्रिय भूमिका निभाता रहा है।
संस्थान का मानना है कि बेहतर स्वास्थ्य केवल आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से ही नहीं बल्कि सकारात्मक वातावरण, मानसिक संतुलन और आध्यात्मिक ऊर्जा से भी जुड़ा होता है। इसी सोच के साथ परिसर में मंदिर की स्थापना और भगवान शिव की प्राण-प्रतिष्ठा का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने इसे चिकित्सा और आध्यात्मिकता के संतुलित समन्वय का प्रेरणादायक उदाहरण बताया।
प्रसाद वितरण के साथ हुआ कार्यक्रम का समापन
धार्मिक अनुष्ठान की पूर्णाहुति के बाद उपस्थित सभी श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया।
श्रद्धालुओं ने भगवान शिव के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया और आयोजन की सफलता पर संस्थान प्रबंधन को शुभकामनाएं दीं। पूरे कार्यक्रम के दौरान अनुशासन, श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला।
संस्थान ने बताए आयोजन के उद्देश्य
कार्यक्रम के समापन पर संस्थान के संचालकों ने बताया कि ऐसे धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों का उद्देश्य केवल परंपराओं का निर्वहन करना नहीं है, बल्कि परिसर में सकारात्मक, शांतिपूर्ण और प्रेरणादायक वातावरण का निर्माण करना भी है।
उन्होंने कहा कि अस्पताल और मेडिकल कॉलेज जैसे संस्थानों में कार्यरत चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ, विद्यार्थी एवं कर्मचारी लगातार सेवा कार्य में लगे रहते हैं। ऐसे अवसर उन्हें मानसिक शांति, आध्यात्मिक ऊर्जा और आपसी सौहार्द का अनुभव कराते हैं।
संचालकों ने भविष्य में भी इसी प्रकार के सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
निष्कर्ष
मानसरोवर मेडिकल कॉलेज एवं एमजीयू अस्पताल परिसर में आयोजित भगवान शिव की प्राण-प्रतिष्ठा एवं भव्य हवन अनुष्ठान केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि सेवा, संस्कार, आस्था और सकारात्मक ऊर्जा का संगम बनकर सामने आया। संस्थापक गौरव तिवारी की उपस्थिति, वैदिक मंत्रोच्चार, भगवान शिव के जयकारे, श्रद्धालुओं की सहभागिता और जनकल्याण की भावना ने पूरे आयोजन को विशेष बना दिया।
इस आयोजन ने यह संदेश भी दिया कि आधुनिक चिकित्सा और आध्यात्मिक मूल्यों का समन्वय समाज में सकारात्मक सोच, मानवीय संवेदनाओं और सेवा भावना को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है। ऐसे कार्यक्रम न केवल धार्मिक आस्था को सुदृढ़ करते हैं, बल्कि संस्थान के प्रत्येक सदस्य में नई ऊर्जा, आत्मविश्वास और सामूहिकता की भावना का भी संचार करते हैं।
