प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में आयोजित G20 लीडर्स समिट में भाग लेने के लिए रवाना हो गए हैं। यह समिट 3 दिनों तक चलेगा और इसकी मेजबानी दक्षिण अफ्रीका कर रहा है।
बता दे की इस समिट में विश्व के प्रमुख आर्थिक और राजनीतिक नेताओं की भागीदारी होगी। प्रधानमंत्री मोदी समिट के तीनों सत्रों में शामिल होंगे और इस दौरान वैश्विक मुद्दों पर भारत की सक्रिय भूमिका को उजागर करेंगे।
G20 समिट का उद्देश्य दुनिया के सबसे बड़े अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग और समन्वय को बढ़ावा देना है। इस बार का समिट विशेष रूप से आर्थिक स्थिरता, सतत विकास, वैश्विक व्यापार और जलवायु परिवर्तन जैसे विषयों पर केंद्रित रहेगा। प्रधानमंत्री मोदी इस अवसर पर न केवल बहुपक्षीय चर्चाओं में भाग लेंगे, बल्कि द्विपक्षीय बैठकों के माध्यम से भारत के वैश्विक हितों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करेंगे।
तीन सत्रों में मोदी की भागीदारी :

इस G20 समिट में तीन मुख्य सत्र होंगे। पहला सत्र वैश्विक आर्थिक स्थिरता और विकास पर केंद्रित होगा, जिसमें दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के नेता आर्थिक सुधार, वित्तीय स्थिरता और कोविड-19 महामारी के प्रभावों पर चर्चा करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी इस सत्र में भारत की आर्थिक उपलब्धियों, विकास योजनाओं और वैश्विक आर्थिक सहयोग की दिशा में किए गए कदमों को साझा करेंगे।
जलवायु परिवर्तन पर होगी चर्चा :
दूसरा सत्र सतत विकास, जलवायु परिवर्तन और हरित ऊर्जा पर होगा। भारत की सरकार ने हाल के वर्षों में हरित ऊर्जा और जलवायु अनुकूल नीतियों पर विशेष ध्यान दिया है। प्रधानमंत्री मोदी इस सत्र में भारत की पहल और वैश्विक साझेदारी के महत्व पर प्रकाश डालेंगे।

तीसरा सत्र अंतरराष्ट्रीय सहयोग और बहुपक्षीय संबंधों पर केंद्रित होगा। इस सत्र में वैश्विक व्यापार, वैश्विक स्वास्थ्य, सुरक्षा और टेक्नोलॉजी जैसे विषयों पर चर्चा होगी। मोदी इस सत्र में न केवल भारत की वैश्विक भूमिका को मजबूत करेंगे, बल्कि अन्य देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकों के माध्यम से सहयोग के नए अवसर तलाशेंगे।
इस बैठक से आएगी वैश्विक संबंधों में सुधार :

G20 समिट के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की कई द्विपक्षीय बैठकें भी हो सकती हैं। इनमें प्रमुख देशों के नेताओं के साथ आर्थिक और तकनीकी सहयोग, व्यापार समझौते और वैश्विक रणनीतिक मामलों पर चर्चा शामिल है। भारत इन बैठकों के माध्यम से अपने वैश्विक संबंधों को और मजबूत करने के लिए सक्रिय रहेगा। इसके अलावा, मोदी की भागीदारी से भारत की वैश्विक छवि और नेतृत्व क्षमता को भी बल मिलेगा।
