समंदर का किंग कौन? 14 देशों के पास Aircraft कैरियर्स और भारत की स्थिति
दुनिया में नौसेना की ताकत केवल युद्धक जहाजों तक सीमित नहीं है। किसी भी देश की समुद्री प्रभुत्व क्षमता उसके Aircraft कैरियर्स से मापी जाती है। ये जहाज हजारों क्रू मेंबर्स, फाइटर जेट और हेलीकॉप्टर ले जाते हैं, और समुद्र में शक्ति प्रदर्शन, क्षेत्रीय नियंत्रण, डिटरेंस और आपदा राहत जैसी भूमिकाओं में अहम भूमिका निभाते हैं। 2026 में कुल 14 देशों के पास एयरक्राफ्ट कैरियर्स हैं। इनमें पारंपरिक, न्यूक्लियर पावर्ड, STOBAR और CATOBAR कैरियर्स शामिल हैं। कुछ जहाज केवल हेलीकॉप्टर और STOVL विमान ले जाने में सक्षम हैं।
1. USA: समुद्र का असली बादशाह (11 कैरियर्स)
अमेरिका का Aircraft कैरियर बेड़ा दुनिया में सबसे ताकतवर माना जाता है। इसमें निमित्ज और फोर्ड क्लास न्यूक्लियर कैरियर्स शामिल हैं, साथ ही वास्प, तारावा और अमेरिका क्लास एम्फीबियस शिप्स। ये जहाज F/A-18E/F, EA-18G, E-2D, F-35B/C जैसे फाइटर जेट और हेलीकॉप्टर लॉन्च कर सकते हैं। अमेरिका के पास कुल 11 कैरियर्स हैं, जो इसे वैश्विक समुद्री शक्ति में शीर्ष पर रखते हैं। ये जहाज समुद्र में लंबे समय तक संचालन कर सकते हैं और पावर प्रोजेक्शन के साथ-साथ ह्यूमैनिटेरियन मिशन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग में भी काम आते हैं।
2. चीन: तेजी से बढ़ता बेड़ा (3 कैरियर्स)
पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवी (PLAN) के पास तीन Aircraft कैरियर्स हैं: लियाओनिंग, शैंडॉन्ग और फुजियान। फुजियान में मैग्नेटिक लॉन्चिंग सिस्टम है, जो विमान को तेजी से लॉन्च करने में सक्षम बनाता है। ये जहाज J-15 फाइटर जेट, हेलीकॉप्टर और अन्य एयरक्राफ्ट ले जाते हैं। चीन इनका इस्तेमाल साउथ चाइना सी में क्षेत्रीय प्रभुत्व और इंडो-पैसिफिक में अपनी रक्षा आवश्यकताओं के लिए करता है।
3. यूनाइटेड किंगडम: क्वीन एलिजाबेथ क्लास (2 कैरियर्स)
यूके के पास HMS क्वीन एलिजाबेथ और HMS प्रिंस ऑफ वेल्स कैरियर्स हैं। ये दोनों जहाज F-35B STOVL फाइटर और हेलीकॉप्टर ले जाते हैं। इनका इस्तेमाल कैरियर स्ट्राइक ग्रुप्स, नाटो ऑपरेशंस और ग्लोबल पावर प्रोजेक्शन के लिए होता है।
4. भारत: हिंद महासागर में ताकत (2 कैरियर्स)
भारत के पास दो Aircraft कैरियर्स हैं: INS विक्रमादित्य और INS विक्रांत।
- INS विक्रमादित्य: रूस से खरीदा गया, MIG-29K/UB फाइटर जेट और हेलीकॉप्टर ले सकता है।
- INS विक्रांत: भारत का पहला स्वदेशी निर्मित कैरियर, कोचिन शिपयार्ड में बना।
ये कैरियर्स हिंद महासागर में भारत की उपस्थिति बनाए रखते हैं और डिटरेंस, रीजनल स्ट्राइक और मैरीटाइम कंट्रोल में सक्षम हैं। भविष्य में भारत और नए कैरियर्स बनाने की योजना बना रहा है।
5. इटली (1 कैरियर + 1 LHD)
इटली का Cavour कैरियर और Trieste LHD एफ-35B और हेलीकॉप्टर लॉन्च कर सकते हैं। इनका इस्तेमाल नाटो ऑपरेशंस और क्राइसिस रिस्पॉन्स के लिए होता है।
6. जापान (2 कैरियर्स कन्वर्जन में)
जापान की इजुमो क्लास कैरियर्स को F-35B लॉन्च के लिए कन्वर्ट किया जा रहा है। ये जहाज इंडो-पैसिफिक में होमलैंड डिफेंस और गठबंधन सहयोग के लिए इस्तेमाल होंगे।
7. दक्षिण कोरिया (1 कैरियर)
दक्षिण कोरिया का डॉकडो-क्लास शिप हेलीकॉप्टर ऑपरेशंस के लिए है। भविष्य में इसमें F-35B या अन्य STOVL विमान शामिल किए जा सकते हैं।
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8. स्पेन (1 कैरियर)
स्पेन का जुआन कार्लोस I LHD है, जो AV-8N हैरियर II और हेलीकॉप्टर ले सकता है। यह मेडिटरेनियन और अटलांटिक में ऑपरेशंस में मदद करता है।
9. थाईलैंड (1 कैरियर)
चक्री नारुबेट एयरक्राफ्ट कैरियर अब केवल हेलीकॉप्टर लॉन्च करता है। यह डिजास्टर मैनेजमेंट और क्षेत्रीय सिग्नलिंग में इस्तेमाल होता है।
10. तुर्किये (1 कैरियर)
तुर्किये का TCG अनाडोलू हेलीकॉप्टर एविएशन और कैरियर-ओरिएंटेड ड्रोन सपोर्ट करता है।
11. रूस (1 कैरियर)
रूस का एडमिरल कुज़नेत्सोव कैरियर STOBAR ऑपरेशंस के लिए सक्षम है, लेकिन तकनीकी समस्याओं और ब्रेकडाउन की वजह से सीमित संचालन करता है।
12. फ्रांस (1 कैरियर)
फ्रांस का चार्ल्स डी गॉल कैरियर CATOBAR सिस्टम से लैस है और राफेल एम, E-2C हॉकी और हेलीकॉप्टर लॉन्च कर सकता है। यह फ्रांस की ग्लोबल ऑपरेशंस में महत्वपूर्ण है।
13. मिस्र (2 कैरियर्स)
मिस्र के पास दो मिस्ट्रल-क्लास LHD हैं: गमाल अब्देल नासर और अनवर अल-सदात। ये हेलीकॉप्टर लॉन्च कर सकते हैं और मेडिटरेनियन व रेड सी में मिस्र की समुद्री शक्ति बढ़ाते हैं।
14. ऑस्ट्रेलिया (2 कैरियर्स)
ऑस्ट्रेलिया के HMAS कैनबरा और HMAS एडिलेड हेलीकॉप्टर और कभी-कभी चिनूक लॉन्च करते हैं। ये जहाज क्षेत्रीय क्राइसिस, डिजास्टर रिलीफ और सीमित समुद्री नियंत्रण के लिए इस्तेमाल होते हैं।
निष्कर्ष
एयरक्राफ्ट कैरियर्स केवल युद्ध के लिए नहीं हैं। ये डिप्लोमेसी, मानवीय सहायता, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और समुद्री सुरक्षा में भी अहम भूमिका निभाते हैं। 2026 में कुल मिलाकर दुनिया में लगभग 25–30 ऐसे जहाज हैं, लेकिन अमेरिका की ताकत बाकी देशों से बहुत आगे है। भारत के पास 2 कैरियर्स हैं, जो हिंद महासागर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और भविष्य में स्वदेशी निर्माण के जरिए और मजबूत होंगे।
