पूर्व पीएम एच.डी. देवगौड़ा ने Congress के हंगामे पर जताई चिंता
भोपाल | मार्च, 2026
संसद की हालिया कार्यवाही के दौरान विपक्ष के विरोध-प्रदर्शन ने देशभर में राजनीतिक चर्चा छेड़ दी है। इस विषय पर पूर्व प्रधानमंत्री और राज्यसभा सांसद एच.डी. देवगौड़ा ने Congress अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने संसद और उसके परिसर में विपक्ष द्वारा फैलाई गई अराजकता और अनुशासनहीनता पर गंभीर चिंता व्यक्त की है।
देवगौड़ा ने कहा कि संसद में बिना सोचे-समझे, अनियंत्रित विरोध करने की घटनाओं से लोकतंत्र की नींव कमजोर हो सकती है। उन्होंने पत्र में यह स्पष्ट किया कि विपक्ष चाहे जितना विरोध करे, उसे ऐसा तरीका अपनाना चाहिए जिससे संसदीय मर्यादा और लोकतांत्रिक संरचना सुरक्षित रहे।
Congress के हंगामे और देवगौड़ा की चिंता
देवगौड़ा ने पत्र में उल्लेख किया कि हाल के दिनों में संसद में नारेबाजी, तख्तियां दिखाना और गाली-गलौज जैसी घटनाएं बढ़ गई हैं। उन्होंने लिखा:
“मुझे नहीं पता कि आप इस अनियंत्रित गतिविधि और नकारात्मक ऊर्जा के प्रसार के परिणामों को समझ पा रही हैं या नहीं। मुझे ईमानदारी से लगता है कि इससे हमारे लोकतंत्र की नींव को बहुत नुकसान पहुंच सकता है। इस कड़वाहट का एक अमिट निशान छूट सकता है।”
पूर्व पीएम ने यह भी बताया कि उन्होंने पहले पत्र न लिखने का कारण यह माना कि समय के साथ चीजें शांत हो जाएंगी, लेकिन अब उन्होंने महसूस किया कि विपक्ष के सुधार के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं।
देवगौड़ा ने इस पत्र के माध्यम से विपक्ष को चेतावनी दी है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं और संसदीय प्रक्रियाओं का सम्मान करना हर राजनीतिक दल का कर्तव्य है। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से अपील की कि सदन में विरोध प्रदर्शन करते समय संयम और विवेक बनाए रखा जाए।
लोकतंत्र की रक्षा के लिए संयम की आवश्यकता
पूर्व प्रधानमंत्री ने पत्र में जोर देकर कहा कि संसद में विरोध करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन इसे सदन की गरिमा और लोकतांत्रिक परंपराओं का उल्लंघन किए बिना किया जाना चाहिए। उन्होंने लिखा कि विपक्ष की गतिविधियों से संसदीय लोकतंत्र की नींव कमजोर हो सकती है।
देवगौड़ा ने कहा:
“विपक्ष चाहे जितना विरोध करे, लेकिन उसे ऐसा विरोध करना चाहिए जिससे हमारे लोकतंत्र का आधार सुरक्षित रहे। 75 वर्षों में हमने जो कुछ बनाया है, उसे नष्ट होने से बचाना हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी है।”
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि संसद में विरोध प्रदर्शन हमेशा संवेदनशील और जवाबदेह तरीके से होना चाहिए। विपक्ष का कर्तव्य है कि वह सरकार की गलतियों को उजागर करे, लेकिन ऐसा करते समय संसदीय नियमों और मर्यादा का पालन अनिवार्य है।
आदर्श संस्थापकों का हवाला
एच.डी. देवगौड़ा ने पत्र में भारत के लोकतंत्र के स्थापकों का उदाहरण देते हुए लिखा कि संसदीय लोकतंत्र के उनके विचार पंडित जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, बी.आर. अंबेडकर, और मौलाना अब्दुल कलाम आजाद जैसे संस्थापकों के उपदेशों और मार्गदर्शन पर आधारित हैं।
उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने लंबे अनुभव में संसद को हाल ही में देखी गई अराजकता और लापरवाही जैसी स्थिति में कभी नहीं देखा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अपने पूरे राजनीतिक करियर में, यहां तक कि अत्यधिक उकसावे की स्थिति में भी, उन्होंने कभी भी राज्य विधानसभा या संसद में विरोध प्रदर्शन करने के लिए सदन के वेल में प्रवेश नहीं किया।
इस उदाहरण से यह स्पष्ट होता है कि लोकतंत्र में विरोध करना और संसदीय मर्यादा बनाए रखना दोनों एक साथ संभव हैं। देवगौड़ा ने कांग्रेस को यह संदेश दिया कि सदन में अनुशासन और शिष्टाचार का पालन करना प्रत्येक सांसद की नैतिक जिम्मेदारी है।
विरोध प्रदर्शन और संसदीय मर्यादा
संसद में विरोध प्रदर्शन के लिए नियम स्पष्ट हैं। सांसदों को अपने अधिकार का उपयोग करते हुए भी सदन की गरिमा बनाए रखने की आवश्यकता होती है। देवगौड़ा ने अपने पत्र में यह मुद्दा उठाया कि हाल की घटनाओं में कई सांसदों ने नियमों का उल्लंघन किया, जिससे संसद की कार्यवाही प्रभावित हुई।
पूर्व पीएम ने इस बात पर जोर दिया कि लोकतंत्र केवल बहस और विचार-विमर्श से मजबूत होता है, और अनियंत्रित हंगामा और अनुशासनहीनता से लोकतंत्र कमजोर पड़ता है। उनका मानना है कि विरोध की शक्ति तभी टिकाऊ और प्रभावशाली होती है जब उसे जिम्मेदारी और विवेक के साथ किया जाए।
लोकतंत्र की 75 वर्षों की विरासत और जिम्मेदारी
देवगौड़ा ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि भारत के लोकतंत्र ने पिछले 75 वर्षों में कई चुनौतियों और कठिनाइयों का सामना किया है। इस दौरान संसद ने बहस और सहमति के माध्यम से देश की प्रगति और नीति निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उन्होंने कहा:
“विपक्ष चाहे कितना भी विरोध करे, लेकिन उसे इस तरह से विरोध करना चाहिए जिससे लोकतंत्र और संसदीय व्यवस्था को कोई नुकसान न पहुंचे। हम जो संरचना और प्रक्रिया 75 वर्षों में बनाए हैं, उसे नष्ट होने से बचाना हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी है।”
इस बात से स्पष्ट होता है कि देवगौड़ा का पत्र केवल एक आलोचना नहीं है, बल्कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए एक चेतावनी और मार्गदर्शन भी है।
निष्कर्ष
एच.डी. देवगौड़ा का पत्र लोकतंत्र और संसदीय मर्यादा की रक्षा पर केंद्रित है। इसमें उन्होंने विपक्ष की गतिविधियों से लोकतंत्र को होने वाले संभावित नुकसान, जिम्मेदार विरोध की आवश्यकता, और संस्थापकों के आदर्शों पर जोर दिया है।
पूर्व पीएम ने स्पष्ट किया कि संसद में विरोध प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन इसे अनुशासन और विवेक के साथ किया जाना चाहिए। उनका पत्र कांग्रेस नेतृत्व को चेतावनी और मार्गदर्शन दोनों के रूप में देखा जा सकता है।
इस पत्र से यह संदेश भी जाता है कि लोकतंत्र में हर राजनीतिक दल का कर्तव्य है कि वह संसद और लोकतांत्रिक संस्थाओं का सम्मान करे। ऐसे समय में जब देश राजनीति के कई मोड़ पर खड़ा है, देवगौड़ा का यह पत्र संसद की गरिमा और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का प्रतीक है।
