कटनी। 1 फरवरी को पेश होने वाले केंद्रीय Budget से देश के किसानों में खासा उत्साह और उम्मीदें देखी जा रही हैं। किसानों का मानना है कि यदि बजट में कृषि को केंद्र में रखकर ठोस निर्णय लिए गए, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। सोमवार को कृषि उपज मंडी पहरुआ में आयोजित पत्रिका टॉक शो में किसानों ने अपनी अपेक्षाएँ खुलकर रखीं। उन्होंने कहा कि बजट में ऐसे उपाय होने चाहिए जो उन्हें सस्ती बिजली, पर्याप्त खाद, बीमा लाभ और फसलों के उचित मूल्य सुनिश्चित करें।
24 घंटे बिजली और सौर ऊर्जा की सुविधा
किसानों की प्रमुख मांगों में सबसे ऊपर बिजली की उपलब्धता है। किसानों ने कहा कि उन्हें 24 घंटे निर्बाध बिजली मिलनी चाहिए, ताकि सिंचाई और खेतों के अन्य कार्य बिना रुकावट हो सकें। इसके अलावा, सौर ऊर्जा को बढ़ावा देना जरूरी है। यदि किसानों को सस्ती दर पर सोलर पंप मिलें और सौर ऊर्जा को प्रोत्साहन मिले, तो खेती की लागत में भारी कमी आएगी।
इंद्रपाल पटेल, खिरहनी के अनुसार, “Budget में बिजली और सौर ऊर्जा के लिए ठोस प्रावधान हों, तो खेती के लिए शुरुआती निवेश कम होगा और किसान दो-तीन फसलें साल में ले सकेंगे।”
फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य और उचित दाम
किसानों का कहना है कि मेहनत के अनुसार फसलों का सही मूल्य मिलना चाहिए। वर्तमान में बाजार में फसल का मूल्य अक्सर लागत के करीब या उससे भी कम होता है, जिससे किसान लाभ नहीं कमा पाता। किसान चाहते हैं कि केंद्रीय बजट में ऐसा कानून या प्रावधान हो कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) लागत से ऊपर ही निर्धारित किया जाए।
रामकुमार यादव, कूड़ो ने कहा, “किसान मेहनत करता है, लेकिन बाजार में उचित कीमत नहीं मिलने से खेती लाभ का व्यवसाय नहीं बन पाती। बजट में यह प्रावधान होना चाहिए कि किसान की मेहनत का सही मूल्य मिले।”
सिंचाई और जल संरक्षण
किसानों ने सिंचाई साधनों के विस्तार की मांग भी रखी। उन्होंने कहा कि बजट में नहरें, तालाब, जल संरक्षण योजनाओं और ड्रिप इरिगेशन जैसी सुविधाओं के लिए पर्याप्त बजट होना चाहिए। यदि पानी की उपलब्धता सुनिश्चित होगी, तो किसान साल में दो से तीन फसलें ले सकेंगे और आय बढ़ेगी।
सिंचाई के बेहतर साधनों से न केवल फसल की पैदावार बढ़ेगी, बल्कि सूखे और बारिश पर निर्भरता भी कम होगी। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में स्थायित्व आएगा।
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फसल बीमा और प्राकृतिक आपदाओं का संरक्षण
हर साल प्राकृतिक आपदाओं के कारण किसानों को नुकसान होता है, लेकिन फसल बीमा का लाभ सही समय पर नहीं मिलता। किसानों का कहना है कि केंद्रीय बजट में ऐसा प्रावधान होना चाहिए कि नुकसान होते ही बीमा राशि मिल जाए।
शिवचरण चौधरी, चकरा ने बताया, “यदि बीमा राशि तुरंत मिल जाएगी, तो किसान दोबारा खेती कर सकेगा और जोखिम कम होगा। यह बजट में प्राथमिकता होनी चाहिए।”
खाद की समय पर और पर्याप्त उपलब्धता
खाद की कमी किसानों के लिए हर साल बड़ी समस्या बनती है। किसानों का कहना है कि खाद ब्लॉक स्तर पर ही नहीं, बल्कि राशन दुकानों के माध्यम से भी उपलब्ध कराई जाए, ताकि उन्हें अलग-अलग जगहों पर भटकना न पड़े।
समय पर और पर्याप्त मात्रा में खाद मिलने से फसल की पैदावार में सुधार होगा और किसानों को अनावश्यक परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा।
जैविक खेती और प्रशिक्षण
कृषि में रसायन मुक्त खेती को बढ़ावा देने की भी मांग की गई। किसानों ने कहा कि जैविक खेती के लिए अलग बजट, प्रशिक्षण और बाजार सुविधा का प्रावधान होना चाहिए। इससे किसान रसायन मुक्त खेती अपनाएंगे और बाजार में नई फसलें बेचने का अवसर मिलेगा।
किसानों का मानना है कि नई तकनीक जैसे ड्रोन और स्मार्ट खेती को Budget में शामिल किया जाना चाहिए, ताकि युवाओं को खेती की ओर आकर्षित किया जा सके।
कृषि उपकरणों पर सब्सिडी
किसानों ने कहा कि छोटे किसान महंगे उपकरण खरीद नहीं पाते। यदि कृषि उपकरणों पर सब्सिडी बढ़ाई जाए, तो खेती अधिक आधुनिक और उत्पादक बन सकती है।
सस्ती दर पर आधुनिक यंत्र मिलने से न केवल उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि किसानों की मेहनत और समय भी बचेगा।
भंडारण और कोल्ड स्टोरेज सुविधा
किसानों ने कोल्ड स्टोरेज और वेयरहाउस की सुविधा बढ़ाने की मांग की। बिना भंडारण सुविधा के किसान मजबूरी में अपनी फसल सस्ते दाम पर बेचने को मजबूर होते हैं। बजट में भंडारण की व्यवस्था पर ध्यान देने से किसान अपनी उपज का सही मूल्य प्राप्त कर सकेगा।
सस्ती कृषि ऋण और कर्ज राहत
किसानों का कहना है कि बजट में कृषि ऋण पर ब्याज दर कम करना और पुराने कर्ज पर राहत देने की घोषणा की जाए। इससे किसान अपनी खेती के शुरुआती खर्चों को पूरा कर सकेगा और कर्ज की वजह से परेशान नहीं होगा।
सस्ती दर पर ऋण और पर्याप्त समय मिलने से किसानों की आय और आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसान सम्मान निधि
किसानों ने यह भी उम्मीद जताई कि Budget में किसान सम्मान निधि की राशि बढ़ाई जाए। वर्तमान राशि महंगाई के दौर में पर्याप्त नहीं है। यदि सहायता बढ़ेगी, तो किसानों को खेती के शुरुआती खर्चों में राहत मिलेगी।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था के मजबूत होने से पूरे राज्य और देश की कृषि व्यवस्था पर सकारात्मक असर पड़ेगा।
निष्कर्ष
किसानों की केंद्रीय बजट से उम्मीदें स्पष्ट हैं – उन्हें चाहिए सस्ती बिजली, पर्याप्त खाद, सिंचाई सुविधाएं, न्यूनतम समर्थन मूल्य, बीमा लाभ, आधुनिक उपकरण और कोल्ड स्टोरेज। यदि बजट में इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखा जाता है, तो किसान आत्मनिर्भर बनेंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
