MP News: निलंबित पटवारियों की बहाली की मांग को लेकर Indore में आंदोलन तेज, सामूहिक अवकाश पर 335 पटवारी
Indore जिले में निलंबित पटवारियों की बहाली को लेकर मध्यप्रदेश पटवारी संघ का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। संघ के आह्वान पर जिलेभर के पटवारी सामूहिक अवकाश पर चले गए हैं, जिसके चलते राजस्व विभाग से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित होने लगे हैं। जमीन से संबंधित कार्य, नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन और अन्य राजस्व सेवाएं लगभग ठप हो गई हैं, जिससे आम जनता को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
जिले में 335 पटवारी, 13 पर हुई कार्रवाई
Indore जिले में कुल 335 पटवारी पदस्थ हैं, जिनमें से 13 पटवारियों पर हाल ही में विभागीय कार्रवाई की गई है। इनमें से 8 पटवारियों को निलंबित कर दिया गया है। पटवारी संघ का कहना है कि इन निलंबनों में प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और कई मामलों में बिना सुनवाई के ही कार्रवाई कर दी गई, जो पूरी तरह नियमों के विरुद्ध है।
संघ ने स्पष्ट किया है कि उनकी प्राथमिक और मुख्य मांग इन 8 निलंबित पटवारियों की शीघ्र बहाली है। जब तक यह मांग पूरी नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
बिना जांच पूरी हुए निलंबन का आरोप
पटवारी संघ ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि कई निलंबित पटवारियों के मामलों में अभी तक जांच पूरी नहीं हुई है। इसके बावजूद उन्हें निलंबित कर दिया गया, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। संघ का कहना है कि यदि किसी पटवारी पर आरोप हैं, तो पहले निष्पक्ष जांच पूरी की जाए और फिर नियमों के तहत निर्णय लिया जाए।
संघ के पदाधिकारियों का आरोप है कि कुछ मामलों में राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव में आकर जल्दबाजी में कार्रवाई की गई, जिससे पटवारियों का मनोबल टूट रहा है।
प्रशासन और संघ के बीच हुई बातचीत बेनतीजा
बीते दिन तहसीलदार महेंद्र गौड़ और एसडीएम कल्याण पांडे ने पटवारी संघ के पदाधिकारियों से बातचीत की। अधिकारियों ने संघ को आश्वासन दिया कि निलंबन से जुड़े प्रकरणों का निराकरण एक माह के भीतर कर दिया जाएगा।
हालांकि, पटवारी संघ ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया। संघ का कहना है कि जिन मामलों में बहाली की मांग की जा रही है, उनमें दो दिनों के भीतर निर्णय लिया जा सकता है। यदि प्रशासन वास्तव में गंभीर है, तो सामूहिक अवकाश की अवधि में ही संबंधित तहसीलदारों और एसडीएम को बुलाकर प्रकरणों पर तुरंत निर्णय लिया जाना चाहिए।
संघ का स्पष्ट संदेश – मांगें नहीं मानी तो आंदोलन जारी
पटवारी संघ ने दो टूक कहा है कि जब तक निलंबित पटवारियों की बहाली नहीं होती, तब तक वे सामूहिक अवकाश पर रहेंगे। संघ का यह भी कहना है कि यह आंदोलन किसी व्यक्तिगत हित के लिए नहीं, बल्कि पूरे पटवारी समुदाय के सम्मान और न्याय के लिए है।
संघ के पदाधिकारियों के अनुसार, यदि आज इस तरह बिना सुनवाई के निलंबन स्वीकार कर लिया गया, तो भविष्य में किसी भी पटवारी के साथ ऐसा हो सकता है। इसलिए सभी पटवारी एकजुट होकर इस कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं।
राजस्व कार्यों पर पड़ा सीधा असर
पटवारियों के सामूहिक अवकाश पर चले जाने से जिले में राजस्व से जुड़े कई काम प्रभावित हो गए हैं। किसानों को फसल बीमा, खसरा-खतौनी, नामांतरण, बंटवारा और अन्य दस्तावेजों के लिए भटकना पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और भी गंभीर बनी हुई है।
आम नागरिकों का कहना है कि यदि यह आंदोलन लंबा चला, तो जमीन से जुड़े विवाद और प्रशासनिक कार्यों में देरी बढ़ सकती है।
प्रशासन पर बढ़ता दबाव
पटवारी संघ के इस आंदोलन से जिला प्रशासन पर भी दबाव बढ़ता जा रहा है। एक ओर जहां आम जनता को हो रही परेशानी को देखते हुए प्रशासन आंदोलन समाप्त करवाना चाहता है, वहीं दूसरी ओर संघ अपनी मांगों पर अड़ा हुआ है।
संघ का कहना है कि यदि प्रशासन जल्द निर्णय नहीं लेता है, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा और प्रदेश स्तर पर भी इस मुद्दे को उठाया जाएगा।
निष्कर्ष
Indore जिले में निलंबित पटवारियों की बहाली को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब एक बड़े आंदोलन का रूप ले चुका है। 335 पटवारियों के सामूहिक अवकाश पर चले जाने से राजस्व व्यवस्था चरमरा गई है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन कितनी जल्दी संघ की मांगों पर निर्णय लेता है और क्या निलंबित पटवारियों को न्याय मिल पाता है या नहीं।

Comments are closed.