MP Cyber Fraud: शिवपुरी में MSP की लाखों की राशि फर्जी खातों में ट्रांसफर,
मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में किसानों के साथ जुड़े MSP भुगतान में बड़े साइबर फ्रॉड का मामला सामने आया है, जिसने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि समर्थन मूल्य की लाखों रुपये की राशि किसानों के खातों में जाने के बजाय फर्जी बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी गई। इस गड़बड़ी के सामने आने के बाद शिवपुरी साइबर सेल ने तुरंत जांच शुरू कर दी है और अब तक करीब 100 किसानों के बैंक अकाउंट को एहतियातन होल्ड कर दिया गया है।
मामले में दो किसानों की शिकायत के बाद खुलासा हुआ, जिसके आधार पर फिनो बैंक से कियोस्क आईडी और खातों से जुड़ी पूरी डिटेल मांगी गई है। जांच में गुना क्षेत्र से जुड़े एक कियोस्क आईडी नेटवर्क की भूमिका भी सामने आई है। इस पूरे मामले ने बैंकिंग सिस्टम, आधार लिंकिंग और सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस मामले की शुरुआत तब हुई जब शिवपुरी साइबर सेल को दो किसानों की ओर से शिकायत प्राप्त हुई। शिकायत में बताया गया कि उनकी MSP राशि उनके खातों में न आकर किसी अन्य संदिग्ध खातों में ट्रांसफर हो गई है।
शिकायत मिलने के बाद साइबर सेल ने तुरंत जांच शुरू की और बैंकिंग सिस्टम से जुड़े रिकॉर्ड खंगालने शुरू किए।
फिनो बैंक से मांगी गई डिटेल
जांच के दौरान साइबर सेल ने फिनो बैंक के हेड ऑफिस से विस्तृत जानकारी मांगी है। इसमें खातों की डिटेल, कियोस्क आईडी और ट्रांजेक्शन से जुड़ा पूरा रिकॉर्ड शामिल है।
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ संदिग्ध खातों का संचालन कियोस्क आईडी के जरिए किया गया था, जिससे फर्जीवाड़े की आशंका और गहरी हो गई है।
गुना से जुड़ रहा है लिंक
मामले में एक अहम कड़ी सामने आई है, जिसमें गुना जिले के चक्का इलाके के निवासी रामलाल सहरिया के नाम पर जारी कियोस्क आईडी का उपयोग होने की बात कही जा रही है।
इसी कियोस्क आईडी से संदिग्ध बैंक खाते खोले जाने की आशंका जताई जा रही है, जिनमें MSP की राशि ट्रांसफर की गई।
100 किसानों के खाते होल्ड
जांच के शुरुआती चरण में ही साइबर सेल ने सुरक्षा की दृष्टि से करीब 100 किसानों के बैंक खातों को होल्ड कर दिया है। अधिकारियों का मानना है कि इन खातों का उपयोग संदिग्ध लेन-देन में किया जा सकता है।
इस कदम का उद्देश्य आगे किसी भी प्रकार के वित्तीय नुकसान को रोकना है।
बिना दस्तावेज खुले फर्जी खाते?
जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ खातों को बिना सही दस्तावेजों और सत्यापन के खोला गया हो सकता है। साइबर सेल अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आधार लिंकिंग और बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन किसके द्वारा और कैसे किया गया।
इससे यह मामला केवल बैंकिंग गड़बड़ी नहीं बल्कि एक संगठित साइबर फ्रॉड नेटवर्क की ओर इशारा करता दिख रहा है।
कई जिलों में फैला मामला
साइबर सेल शिवपुरी, कोलारस और बदरवास क्षेत्रों से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है। इन क्षेत्रों में भी संदिग्ध लेन-देन और खातों की जानकारी खंगाली जा रही है।
अधिकारियों ने संबंधित सहकारी संस्थाओं और बैंकिंग नेटवर्क से भी डेटा एकत्र करना शुरू कर दिया है।
साइबर सेल की जांच तेज
शिवपुरी साइबर सेल इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है। अधिकारियों ने फिनो बैंक समेत अन्य संबंधित संस्थानों से सभी ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड और कियोस्क आईडी की पूरी डिटेल मांगी है।
जांच टीम यह भी पता लगाने में जुटी है कि आखिर किसानों के नाम पर जारी सरकारी राशि कैसे और किन खातों में ट्रांसफर हुई।
सरकारी योजनाओं पर उठे सवाल
इस घटना ने सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता और बैंकिंग सिस्टम की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। MSP जैसी महत्वपूर्ण योजना की राशि का इस तरह फर्जी खातों में ट्रांसफर होना गंभीर सुरक्षा चूक मानी जा रही है।
आगे क्या?
फिलहाल मामला जांच के शुरुआती चरण में है। साइबर सेल का कहना है कि सभी संदिग्ध खातों, कियोस्क आईडी और ट्रांजेक्शन की बारीकी से जांच की जा रही है।
आने वाले दिनों में इस साइबर फ्रॉड नेटवर्क से जुड़े और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
