नेत्रदान से दो लोगों को मिलेगी नई रोशनी: मालपानी परिवार का प्रेरणादायी निर्णय बना समाज के लिए मिसाल
नागदा (निप्र)। समाज में मानवता, करुणा और सेवा की भावना का उज्ज्वल उदाहरण प्रस्तुत करते हुए नगर के प्रतिष्ठित परिवार मालपानी परिवार ने एक प्रेरणादायक निर्णय लिया है। स्वर्गीय श्री गिरिराज मालपानी—जो नगर के सम्मानित नागरिक स्व. ताराचंदजी मालपानी के जेष्ठ पुत्र थे—के श्रीजी शरण होने के उपरांत परिजनों ने उनका नेत्रदान कराया। यह पुण्य कार्य न केवल परिवार की संवेदनशीलता को दर्शाता है, बल्कि समाज के लिए एक अनुकरणीय आदर्श भी प्रस्तुत करता है।
मंगलवार देर रात उनके निधन के बाद बुधवार सुबह जनसेवा हॉस्पिटल, बिरला ग्राम नागदा में यह नेत्रदान प्रक्रिया पूर्ण की गई। इस निर्णय से अब दो व्यक्तियों की दुनिया रोशन होने जा रही है।
नेत्रदान से मिली दो जीवनों को नई उम्मीद
नेत्रदान के महत्व और व्यापक प्रभाव को समझते हुए मालपानी परिवार ने यह निर्णय तुरंत लिया। परिजनों का कहना था कि मनुष्य अपने जीवन में चाहे जितने भी अच्छे कार्य करे, लेकिन मृत्यु के बाद किसी को रोशनी देना सबसे बड़ा दान है। स्व. गिरिराज मालपानी अब दो लोगों की आँखों की दुनिया को उजाला देने वाले “नेत्रदाता” बन चुके हैं।
इस अवसर पर परिवार के सदस्य प्रकाश मालपानी, नन्दकिशोर मालपानी (पप्पू), अखिल राठी, प्रणव मेहरा सहित शहर के कई लोग उपस्थित रहे।
जैन सोशल ग्रुप नागदा का अहम योगदान—44वां नेत्रदान सफल
जैन सोशल ग्रुप नागदा वर्षों से नेत्रदान अभियान को निरंतर आगे बढ़ा रहा है। समूह के नेत्रदान प्रभारी ब्रजेश बोहरा के प्रयास से नगर में नेत्रदान की जागरूकता तेजी से बढ़ रही है। उनकी सक्रियता से यह 44वां नेत्रदान सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।
नेत्रदान की पूरी व्यवस्था जमनालाल मालपानी द्वारा परिजनों की सहमति प्राप्त कर समय पर की गई। नागदा क्षेत्र में नेत्रदान को लेकर बढ़ते जागरूकता अभियानों में यह योगदान महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
गीता भवन न्यास समिति, बड़नगर की विशेषज्ञ टीम ने पूरी की प्रक्रिया
नेत्रदान की चिकित्सा प्रक्रिया गीता भवन न्यास समिति, बड़नगर की विशेषज्ञ टीम द्वारा सम्पन्न कराई गई। टीम का नेतृत्व डॉ. जी. एल. ददरवाल ने किया। उनके साथ मनीष तलाच और परमानंद पवार ने तत्परता से कार्य करते हुए नेत्रदान क्रमांक 859 पूर्ण किया।
विशेषज्ञों ने बताया कि नेत्रों को सुरक्षित रूप से संरक्षित कर तुरंत नेत्र बैंक के लिए भेज दिया गया है। यह सुनिश्चित किया गया कि नेत्रों की क्वालिटी और सुरक्षा मानक पूरी तरह सुरक्षित रहें। आने वाले दिनों में इसे जरूरतमंद मरीजों को प्रत्यारोपित किया जाएगा, जिससे दो लोगों को नई दृष्टि मिल सकेगी।
नेत्रदान के प्रति समाज में बढ़ती जागरूकता—मालपानी परिवार का निर्णय सराहनीय
नागदा में नेत्रदान को लेकर पिछले कुछ वर्षों में समाज में सकारात्मक माहौल देखने को मिला है। जैन सोशल ग्रुप, सामाजिक संस्थाएँ और युवा वर्ग लगातार इस दिशा में काम कर रहे हैं।
स्व. गिरिराज मालपानी का नेत्रदान इस जागरूकता को और मजबूत करता है। परिवार के इस निर्णय की नगर में व्यापक रूप से प्रशंसा हो रही है। लोग इसे एक प्रेरणादायी कदम बता रहे हैं जो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक नई सोच प्रस्तुत करता है।
नेत्रदान: जीवन बाद भी चलता रहता है सेवा का कार्य
कई लोग नेत्रदान के महत्व को जानते हैं, परंतु जागरूकता की कमी के कारण यह कार्य समय पर नहीं हो पाता। विशेषज्ञ बताते हैं कि मृत्यु के 6 घंटे भीतर नेत्रदान सबसे प्रभावी तरीके से किया जा सकता है। नेत्रदान किसी भी धर्म या पंथ से जुड़ा नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा मानवीय कार्य है जो समाज को सबसे बड़ी देन दे सकता है।
मालपानी परिवार द्वारा नेत्रदान का निर्णय इस बात का प्रमाण है कि मृत्यु के बाद भी मनुष्य समाज की सेवा कर सकता है और अपनी रोशनी किसी और की दुनिया को उजाला दे सकती है।
परिवार को प्रमाण पत्र भेंट—नेत्रदानी स्व. गिरिराज जी को श्रद्धांजलि
कार्यक्रम में उपस्थित जैन सोशल ग्रुप नागदा और गीता भवन टीम द्वारा मालपानी परिवार को नेत्रदान का प्रमाण पत्र भेंट किया गया। इस दौरान नेत्रदानी स्व. गिरिराजजी मालपानी के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके निर्णय को “समाज में अनुकरणीय” बताया गया।
इस आयोजन में प्रमुख रूप से उपस्थित रहे:
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सीए कमलनयन चपलोत
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अमित बम
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जयेश राठौर
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परिवार के सदस्य एवं सामाजिक कार्यकर्ता
सभी ने स्व. गिरिराज मालपानी के जीवन और उनके अंतिम उपहार—नेत्रदान—को मानवता की सच्ची सेवा बताया।
नागदा के लिए प्रेरणा—नेत्रदान को बनाएं सामाजिक आंदोलन
नागदा और आसपास क्षेत्रों में यह नेत्रदान लोगों के भीतर एक नई चेतना पैदा कर रहा है। कई संगठनों का मानना है कि यदि अधिक से अधिक लोग नेत्रदान के लिए आगे आएँ, तो हजारों जीवन रोशन हो सकते हैं।
समाज के जिम्मेदार नागरिकों से अपेक्षा है कि वे नेत्रदान की वास्तविकता, प्रक्रिया और महत्व को समझें और अपने परिवार के साथ इस विषय पर खुलकर चर्चा करें।

