📰 भारत ने PoK में उठे जनआंदोलन पर साधा निशाना — इस्लामाबाद की दमनकारी नीतियों पर बढ़ा अंतरराष्ट्रीय दबाव
नई दिल्ली / इस्लामाबाद।
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) और गिलगित-बाल्टिस्तान में जारी व्यापक विरोध प्रदर्शनों ने पाकिस्तान सरकार की नीतियों को कठघरे में खड़ा कर दिया है। इन प्रदर्शनों के बीच भारत ने पाकिस्तान पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि “PoK में जनता का आक्रोश इस्लामाबाद की दमनकारी नीतियों और मानवाधिकार हनन का परिणाम है।”
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने शुक्रवार को कहा कि पाकिस्तान ने दशकों से जिस तरह PoK के नागरिकों के अधिकारों का हनन किया है, आज वहीं जनता उसके खिलाफ खड़ी हो गई है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वह इस क्षेत्र में जारी मानवाधिकार उल्लंघनों पर ध्यान दे और पाकिस्तान को उसके कृत्यों के लिए जवाबदेह ठहराए।
PoK में बढ़ता असंतोष — गिलगित से मुजफ्फराबाद तक सड़कों पर जनता
गिलगित-बाल्टिस्तान और PoK के कई हिस्सों में बीते कुछ हफ्तों से हजारों लोग सड़कों पर उतरकर पाकिस्तानी शासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन कर रहे हैं। विरोध की जड़ें स्थानीय असंतोष और शोषण से जुड़ी हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस्लामाबाद ने क्षेत्र के जल, खनिज और ऊर्जा संसाधनों का वर्षों से दोहन किया है, लेकिन उस राजस्व का कोई हिस्सा स्थानीय विकास में नहीं लगाया गया। वहीं, महंगाई, बिजली संकट और बेरोजगारी ने लोगों के जीवन को और कठिन बना दिया है।
मानवाधिकार संगठनों ने भी चेताया है कि पाकिस्तानी सेना और प्रशासन विरोध की आवाज़ों को दबाने के लिए बल का इस्तेमाल कर रहे हैं। शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों, राजनीतिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों को बिना मुकदमे के हिरासत में लिया जा रहा है।
‘दूसरे दर्जे की नागरिकता’ और भारत में विलय की आवाजें
PoK में प्रदर्शनकारियों के बीच यह भावना गहरी है कि इस्लामाबाद ने उन्हें ‘दूसरे दर्जे के नागरिक’ बना दिया है। कई क्षेत्रों में यह भी देखा गया कि प्रदर्शनकारियों ने भारत के साथ विलय के नारे लगाए — जिससे पाकिस्तान सरकार की चिंता और बढ़ गई है।
भारत का स्पष्ट संदेश — PoK भारत का अभिन्न हिस्सा
भारत ने दोहराया है कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है, जिस पर पाकिस्तान ने अवैध कब्जा कर रखा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि “PoK के लोगों की पीड़ा अब दुनिया के सामने है। पाकिस्तान को इस क्षेत्र पर अपना कब्जा समाप्त कर देना चाहिए और स्थानीय नागरिकों के मौलिक अधिकारों का सम्मान करना चाहिए।”
पाकिस्तान के लिए नई चुनौती
ये विरोध उस समय तेज़ हुए हैं जब पाकिस्तान खुद आर्थिक मंदी, महंगाई और राजनीतिक अस्थिरता से गुजर रहा है। ऐसे में PoK में बढ़ती अशांति ने सरकार के लिए एक नई सिरदर्दी खड़ी कर दी है।
भारत अब इस अवसर को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान के मानवाधिकार उल्लंघनों को उजागर करने के लिए उपयोग में ला सकता है — जिससे इस्लामाबाद पर वैश्विक दबाव और बढ़ने की संभावना है।
