एवरेस्ट की कंपाउंडेड हींग की बिक्री पर रोक, FSSAI जांच में गुणवत्ता और लेबलिंग पर सवाल; अन्य मसाले भी जांच के दायरे में
उपभोक्ता शिकायत के बाद हुई जांच में कंपाउंडेड हींग के नमूने मानक के अनुरूप नहीं पाए जाने का दावा, Egg Curry, Chicken और Garam Masala को लेकर भी नियामकीय जांच
नई दिल्ली। देश में पैकेटबंद मसालों की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हुए हैं। मशहूर मसाला ब्रांड Everest की कंपाउंडेड हींग को लेकर भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी FSSAI की कार्रवाई चर्चा में है। सामने आई जानकारी के मुताबिक जांच में संबंधित कंपाउंडेड हींग के नमूने निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं पाए गए, जिसके बाद उसकी बिक्री पर रोक लगाने की कार्रवाई की गई है।
यह मामला एक उपभोक्ता शिकायत के बाद सामने आया। शिकायत मिलने पर बाजार में उपलब्ध हींग के कुछ ब्रांडों के नमूने लेकर उनकी जांच कराई गई। जांच में एवरेस्ट की कंपाउंडेड हींग के कुछ नमूनों में गुणवत्ता से जुड़ी कमियां सामने आने का दावा किया गया। इसके साथ ही उत्पाद की पैकेजिंग और लेबलिंग को लेकर भी सवाल उठे हैं।
हालांकि यहां यह समझना जरूरी है कि कार्रवाई पूरे Everest ब्रांड या उसके सभी मसालों पर लागू नहीं बताई गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार बिक्री पर रोक संबंधित कंपाउंडेड हींग उत्पाद को लेकर है, जबकि Egg Curry Masala, Chicken Masala और Garam Masala जैसे कुछ अन्य उत्पाद भी अलग-अलग नियामकीय जांच के दायरे में बताए गए हैं।
कंपाउंडेड हींग में किस मानक की हुई जांच?
कंपाउंडेड हींग में वास्तविक हींग की गुणवत्ता और मात्रा को परखने के लिए कुछ तकनीकी मानक निर्धारित किए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार इसमें अल्कोहल सॉल्युबल एक्सट्रैक्ट की न्यूनतम मात्रा महत्वपूर्ण मानदंडों में शामिल है।
दावा किया गया है कि नियमों के तहत कंपाउंडेड हींग में यह मात्रा कम से कम 5 प्रतिशत होनी चाहिए। जांच किए गए संबंधित नमूनों में यह स्तर 0 से 3 प्रतिशत के बीच पाया गया। इसी आधार पर नमूनों को निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं माना गया और उत्पाद की बिक्री रोकने की कार्रवाई सामने आई।
खाद्य उत्पादों में इस प्रकार की जांच इसलिए महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि उपभोक्ता पैकेट पर लिखे ब्रांड, सामग्री और गुणवत्ता के दावे के आधार पर उत्पाद खरीदते हैं।
लेबलिंग को लेकर भी उठे सवाल
गुणवत्ता के अलावा उत्पाद की लेबलिंग को लेकर भी जांच की गई। पैकेटबंद खाद्य सामग्री पर उत्पाद की संरचना, सामग्री, निर्माण संबंधी विवरण और अन्य जरूरी जानकारी नियमों के अनुसार देना आवश्यक होता है।
सामने आई जानकारी के मुताबिक संबंधित कंपाउंडेड हींग की लेबलिंग में भी कुछ मुद्दे पाए गए, जिसके बाद कंपनी से जवाब और आवश्यक सुधार की अपेक्षा की गई है।
खाद्य सुरक्षा के लिहाज से लेबलिंग केवल औपचारिकता नहीं है। उपभोक्ता को यह जानने का अधिकार होता है कि वह जिस वस्तु का उपयोग कर रहा है, उसमें कौन-कौन सी सामग्री है और वह किस प्रकार के उत्पाद की श्रेणी में आती है।
Egg Curry, Chicken और Garam Masala का क्या मामला?
एवरेस्ट की कंपाउंडेड हींग के साथ कंपनी के कुछ दूसरे मसाला उत्पादों के नाम भी जांच में सामने आए हैं। इनमें Egg Curry Masala, Chicken Masala और Garam Masala शामिल बताए गए हैं।
इन उत्पादों को लेकर खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुपालन से जुड़े सवाल उठे हैं और कंपनी से स्पष्टीकरण मांगे जाने की बात सामने आई है। लेकिन उपलब्ध जानकारी के आधार पर इन तीनों मसाला उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाए जाने की पुष्टि नहीं की गई है।
ऐसे में यह कहना कि Everest के सभी मसालों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है, भ्रामक हो सकता है। कार्रवाई और जांच के बीच अंतर समझना जरूरी है।
क्या Everest के सभी मसाले प्रतिबंधित हैं?
नहीं। सामने आई जानकारी के मुताबिक पूरा Everest ब्रांड प्रतिबंधित नहीं किया गया है। बिक्री रोकने की कार्रवाई संबंधित कंपाउंडेड हींग उत्पाद के संदर्भ में बताई गई है।
अन्य मसाला उत्पाद जांच के दायरे में जरूर आए हैं, लेकिन इसका मतलब स्वतः यह नहीं होता कि उन पर बिक्री प्रतिबंध लगा दिया गया है। उपभोक्ताओं को सोशल मीडिया या अधूरी सूचनाओं के आधार पर पूरे ब्रांड के उत्पादों को प्रतिबंधित मानने से बचना चाहिए।
किसी भी खाद्य उत्पाद पर कार्रवाई की स्थिति में नियामक संस्था द्वारा जारी आधिकारिक आदेश, संबंधित बैच नंबर और उत्पाद की सटीक जानकारी सबसे महत्वपूर्ण होती है।
घर में Everest की हींग है तो क्या करें?
जिन उपभोक्ताओं के घर में Everest की कंपाउंडेड हींग मौजूद है, उन्हें घबराने के बजाय पहले पैकेट की पूरी जानकारी जांचनी चाहिए। उत्पाद का नाम, बैच नंबर, निर्माण तिथि, समाप्ति तिथि और पैकेज पर मौजूद अन्य विवरण ध्यान से देखना उपयोगी होगा।
यदि नियामक संस्था या विक्रेता की ओर से संबंधित उत्पाद या बैच को लेकर कोई आधिकारिक रिकॉल या बिक्री रोक का निर्देश जारी किया गया हो तो उसी के अनुसार कदम उठाया जाना चाहिए।
उपभोक्ता संबंधित खाद्य सुरक्षा विभाग या FSSAI के आधिकारिक माध्यम से भी जानकारी की पुष्टि कर सकते हैं।
खाद्य सुरक्षा को लेकर बढ़ी सतर्कता
पैकेटबंद खाद्य उत्पादों की बढ़ती खपत के बीच गुणवत्ता जांच का महत्व लगातार बढ़ रहा है। बड़ी संख्या में लोग रोजमर्रा की रसोई में तैयार मसाला मिश्रण, कंपाउंडेड उत्पाद और पैक्ड खाद्य सामग्री इस्तेमाल करते हैं।
ऐसे में किसी बड़े ब्रांड के उत्पाद की जांच में मानकों से जुड़ी कमी सामने आना उपभोक्ताओं के लिए भी चेतावनी है कि केवल ब्रांड नाम के आधार पर उत्पाद की गुणवत्ता मान लेने के बजाय पैकेट की जानकारी भी देखी जाए।
पूरे ब्रांड पर प्रतिबंध समझना ठीक नहीं
इस मामले में सबसे अहम तथ्य यही है कि कार्रवाई को पूरे Everest ब्रांड पर प्रतिबंध के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। संबंधित कंपाउंडेड हींग को लेकर गुणवत्ता और लेबलिंग के मुद्दे सामने आए हैं, जबकि अन्य कुछ मसालों की जांच की बात कही गई है।
अलग-अलग उत्पादों की नियामकीय स्थिति अलग हो सकती है। इसलिए किसी खास उत्पाद की जांच या बिक्री रोक को कंपनी के सभी उत्पादों पर लागू मानना उचित नहीं होगा।
मामले में आगे कंपनी की प्रतिक्रिया, नियामक संस्था की विस्तृत रिपोर्ट और किसी अतिरिक्त कार्रवाई से तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है। तब तक उपभोक्ताओं के लिए बेहतर होगा कि वे आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें और पैक्ड खाद्य सामग्री खरीदते समय लेबल तथा उत्पाद विवरण जरूर जांचें।
