सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य ने भोपाल में रचा इतिहास, सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा- “विक्रमादित्य हैं हमारे सुशासन और वीरता के प्रेरणास्रोत”
भोपाल, [तारीख डालें]: मध्य प्रदेश के 70वें स्थापना दिवस समारोह ‘अभ्युदय मध्यप्रदेश’ के दूसरे दिन राजधानी भोपाल का लाल परेड ग्राउंड एक भव्य और ऐतिहासिक महानाट्य का गवाह बना। यहां ‘सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य’ के जरिए लगभग 2000 साल पुराने उस स्वर्णिम इतिहास को जीवंत किया गया, जब सम्राट विक्रमादित्य ने वीरता, दानशीलता, न्याय और सुशासन की अद्भुत मिसाल कायम की थी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस ऐतिहासिक नाट्य मंचन को संबोधित करते हुए कहा कि सम्राट विक्रमादित्य ने न सिर्फ देश को विदेशी आक्रांताओं से मुक्त कराया, बल्कि उन्होंने एक ऐसी सुशासन व्यवस्था का उदाहरण प्रस्तुत किया, जो आज भी प्रासंगिक है।
सीएम डॉ. मोहन यादव ने किया विक्रमादित्य के योगदान को याद
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा, “सम्राट विक्रमादित्य ने वीरता, दानशीलता, न्याय, शौर्य और सुशासन का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया।” उन्होंने आगे कहा कि एक समय था जब देश पर बाहरी आक्रमणकारियों का खतरा मंडरा रहा था, लेकिन विक्रमादित्य ने अपने शौर्य से देश को मुक्ति दिलाई और एक नए युग का सूत्रपात किया।
डॉ. यादव ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि विक्रमादित्य का शासनकाल जनकल्याणकारी नीतियों से परिपूर्ण था। “उन्होंने अपने संपूर्ण राज्य के नागरिकों को ऋणमुक्त कर, उन्हें आत्मनिर्भर बनाया और विक्रम संवत की शुरुआत कर एक कालजयी इतिहास रचा। वे न्याय के लिए इतने प्रसिद्ध थे कि छोटे से छोटे व्यक्ति तक की बात सुनते थे।”
क्या थी महानाट्य की विशेषताएं? भोपाल में पहली बार हुआ ऐसा भव्य मंचन
यह सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य कोई साधारण नाट्य प्रस्तुति नहीं थी, बल्कि इसे भोपाल में पहली बार इतने विशाल पैमाने पर मंचित किया गया।
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जीवंत अभिनय और वास्तविक दृश्य: नाटक में वास्तविक घोड़ों, ऊंटों, हाथियों और पालकी का इस्तेमाल किया गया, जिसने युद्ध के दृश्यों को बेहद यथार्थपूर्ण बना दिया। दर्शकों ने महसूस किया कि मानो इतिहास उनके सामने जीवंत हो उठा हो।
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भव्य सेट और 150 कलाकार: तीन अलग-अलग स्टेज, अत्याधुनिक ग्राफिक्स, आश्रम, जंगल और भव्य महाकाल मंदिर के प्रतिरूप सेट ने दर्शकों को हैरान कर दिया। करीब 150 कलाकारों ने मिलकर इस महानाट्य को साकार किया।
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विक्रमादित्य के जीवन की संपूर्ण गाथा: नाटक में विक्रमादित्य के जन्म से लेकर सम्राट बनने, शकों को पराजित करने, नवरत्नों के साथ साहित्य-कला को बढ़ावा देने और उनकी न्यायपूर्ण शासन व्यवस्था की सभी महत्वपूर्ण घटनाओं को दिखाया गया।
इस महानाट्य का मुख्य उद्देश्य आम नागरिकों को मध्य प्रदेश के गौरवशाली अतीत से रूबरू कराना था, जहां से आज के सुशासन और जनकल्याण की प्रेरणा मिलती है।
स्थापना दिवस के दूसरे दिन की अन्य झलकियां
सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य के अलावा, ‘अभ्युदय मध्यप्रदेश’ समारोह के दूसरे दिन राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता भी देखने को मिली।
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लोक एवं जनजातीय नृत्यों की धूम: दोपहर में राज्य के कोने-कोने से आए कलाकारों ने अहिराई लाठी नृत्य (सीधी), मोनिया नृत्य (टीकमगढ़), गणगौर नृत्य (खंडवा), मटकी नृत्य (उज्जैन), बधाई नृत्य (सागर), घसियाबाजा नृत्य और गोण्ड जनजातीय नृत्य जैसी मनमोहक प्रस्तुतियां दीं।
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हंसराज रघुवंशी के भजनों ने मचाया जादू: शाम को मशहूर भजन गायक श्री हंसराज रघुवंशी ने अपने दिव्य स्वरों से माहौल को भक्तिमय बना दिया। उनके लोकप्रिय भजन ‘मेरा भोला है भंडारी’ ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।
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एक जिला-एक उत्पाद शिल्प मेला: समारोह स्थल पर लगे शिल्प मेले में राज्य के सभी जिलों की विशिष्ट हस्तशिल्प और उत्पादों की भरमार थी। भोपाल के जूट उत्पाद, बुरहानपुर की जैविक दाल, गुना की मेहंदी, जबलपुर के संगमरमर उत्पाद, अशोकनगर का चंदेरी साड़ियां और मण्डला की गोण्ड पेंटिंग्स लोगों के आकर्षण का केंद्र रहे।

