शैक्षणिक भ्रमण: खानपुर स्कूल के 55 विद्यार्थियों ने जाना मेवाड़ का गौरवशाली इतिहास
कुंभलगढ़, हल्दीघाटी, उदयपुर और चित्तौड़गढ़ सहित प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों का किया भ्रमण
रिपोर्ट — मुकेश सोलंकी, दैनिक स्वराज वाणी
भीनमाल। निकटवर्ती राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय खानपुर के 55 विद्यार्थियों का दल मेवाड़ क्षेत्र के तीन दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण से लौट आया। 18 से 20 सितंबर तक आयोजित इस भ्रमण का उद्देश्य विद्यार्थियों को राजस्थान के ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व वाले स्थलों से प्रत्यक्ष रूप से परिचित कराना था। विद्यार्थियों ने भ्रमण के दौरान इतिहास की पुस्तकों में पढ़े महत्वपूर्ण स्थलों, दुर्गों, महलों, मंदिरों और प्राकृतिक धरोहरों को नजदीक से देखा तथा उनके महत्व को समझा।
विद्यार्थियों का दल हरी टूर एंड ट्रेवल्स की बस से भ्रमण के लिए रवाना हुआ था। भ्रमण दल का नेतृत्व विद्यालय के प्रधानाचार्य जगदीश विश्नोई और ट्रेवल्स संचालक प्रकाश रावल ने किया। विद्यार्थियों के मार्गदर्शन एवं देखरेख के लिए शिक्षक भंवरलाल, उर्मा, कृष्णा, सुनीता, ओमप्रकाश, कैलाश, सुरेश, अशोक, विनोद सोलंकी और नानजीराम भी साथ रहे।
ऐतिहासिक स्थलों की जानकारी की एकत्र
तीन दिवसीय यात्रा के दौरान विद्यार्थियों ने कुंभलगढ़, नाथद्वारा, हल्दीघाटी, एकलिंगजी, उदयपुर, चित्तौड़गढ़, सांवरिया सेठ और आवरी माता सहित मेवाड़ के विभिन्न ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थलों का भ्रमण किया। शिक्षकों ने प्रत्येक स्थान के इतिहास, स्थापत्य कला, धार्मिक मान्यताओं और सांस्कृतिक महत्व की विस्तार से जानकारी दी।
विद्यार्थियों ने भ्रमण के दौरान महत्वपूर्ण तथ्यों को अपनी डायरी में भी दर्ज किया। उन्होंने संबंधित स्थानों की वास्तुकला, भौगोलिक स्थिति और उनसे जुड़े ऐतिहासिक प्रसंगों को समझा। इस दौरान विद्यार्थियों में मेवाड़ के इतिहास और राजस्थान की समृद्ध विरासत को जानने के प्रति विशेष उत्साह दिखाई दिया।
उदयपुर रहा यात्रा का मुख्य आकर्षण
शैक्षणिक यात्रा का प्रमुख आकर्षण झीलों की नगरी उदयपुर रहा। यहां विद्यार्थियों ने सिटी पैलेस की भव्य स्थापत्य कला और राजपूतकालीन वास्तुकला का अवलोकन किया। शिक्षकों ने विद्यार्थियों को मेवाड़ के राजघराने, उनके शासन और ऐतिहासिक योगदान के विषय में जानकारी दी।
सिटी पैलेस की विशाल इमारत, नक्काशीदार खिड़कियां, प्राचीन कलाकृतियां और महल की संरचना ने विद्यार्थियों को विशेष रूप से प्रभावित किया। विद्यार्थियों ने यह समझा कि पुराने समय में सीमित संसाधनों के बावजूद कारीगरों ने किस प्रकार भव्य भवनों और महलों का निर्माण किया था।
पिछोला झील का सुंदर और शांत दृश्य विद्यार्थियों के लिए यादगार अनुभव रहा। इसके अतिरिक्त सहेलियों की बाड़ी की आकर्षक उद्यान व्यवस्था, फव्वारे, हरियाली और कलात्मक निर्माण को देखकर छात्र काफी उत्साहित हुए। शिक्षकों ने उदयपुर को झीलों की नगरी कहे जाने के कारणों और पर्यटन की दृष्टि से इसके महत्व की जानकारी दी।
कुंभलगढ़ में देखी विशाल दुर्ग संरचना
विद्यार्थियों ने कुंभलगढ़ दुर्ग पहुंचकर उसकी विशाल प्राचीर, मजबूत निर्माण और सुरक्षा व्यवस्था का अवलोकन किया। शिक्षकों ने उन्हें बताया कि यह दुर्ग मेवाड़ के इतिहास में विशेष स्थान रखता है। इसकी बनावट और दुर्ग तक पहुंचने वाले मार्ग को देखकर विद्यार्थियों ने प्राचीन समय की रक्षा प्रणाली को समझा।
हल्दीघाटी में विद्यार्थियों ने महाराणा प्रताप के साहस, संघर्ष और मातृभूमि के प्रति समर्पण की जानकारी प्राप्त की। यहां उन्हें हल्दीघाटी के युद्ध, महाराणा प्रताप और उनके प्रिय घोड़े चेतक से जुड़े प्रसंगों के बारे में बताया गया। इस ऐतिहासिक स्थल ने विद्यार्थियों के मन में वीरता और देशप्रेम की भावना जागृत की।
चित्तौड़गढ़ में जाना शौर्य और बलिदान का इतिहास
चित्तौड़गढ़ दुर्ग में विद्यार्थियों ने राजपूत शौर्य, स्वाभिमान, त्याग और बलिदान से जुड़े गौरवशाली इतिहास का अध्ययन किया। दुर्ग की विशालता और उससे संबंधित ऐतिहासिक घटनाओं ने विद्यार्थियों को काफी प्रभावित किया। शिक्षकों ने उन्हें दुर्ग के प्रमुख स्मारकों और मेवाड़ के इतिहास में चित्तौड़गढ़ की भूमिका के बारे में जानकारी दी।
विद्यार्थियों ने नाथद्वारा, एकलिंगजी, सांवरिया सेठ और आवरी माता मंदिर में दर्शन किए। इस दौरान उन्होंने राजस्थान की धार्मिक आस्था, पूजा-पद्धति और सांस्कृतिक परंपराओं को नजदीक से समझा। मंदिरों की स्थापत्य कला और वहां का आध्यात्मिक वातावरण भी विद्यार्थियों के लिए विशेष अनुभव रहा।
व्यावहारिक ज्ञान का सशक्त माध्यम
विद्यालय परिवार के अनुसार शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों को पुस्तकीय ज्ञान के साथ प्रत्यक्ष एवं व्यावहारिक अनुभव प्रदान करता है। ऐसे आयोजनों से छात्रों की जिज्ञासा बढ़ती है और वे इतिहास, भूगोल, कला तथा संस्कृति को अधिक आसानी से समझ पाते हैं।
प्रधानाचार्य जगदीश विश्नोई ने बताया कि इस प्रकार की यात्राएं विद्यार्थियों में अनुशासन, सामूहिकता, आत्मनिर्भरता और सामाजिक व्यवहार की भावना विकसित करती हैं। साथ ही देश की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहर के प्रति सम्मान और संरक्षण की जिम्मेदारी भी पैदा करती हैं। यात्रा से लौटे विद्यार्थियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए इसे ज्ञानवर्धक, रोमांचक और जीवनभर याद रहने वाला भ्रमण बताया।
