छात्रों के प्रदर्शन के बीच सरकार का बड़ा प्रशासनिक फैसला, विनीत जोशी की जगह Naresh Pal गंगवार बने शिक्षा मंत्रालय के नए सचिव
नई दिल्ली। देश में प्रतियोगी परीक्षाओं और पेपर लीक के मुद्दे को लेकर छात्रों के प्रदर्शन के बीच केंद्र सरकार ने शिक्षा मंत्रालय में बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया है। केंद्र सरकार ने गुरुवार शाम शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग के सचिव पद पर बदलाव करते हुए विनीत जोशी की जगह Naresh Pal गंगवार को नया सचिव नियुक्त किया है।
Naresh Pal गंगवार 1994 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी हैं। उन्हें शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं, अब तक इस पद पर कार्यरत रहे विनीत जोशी का तबादला कर उन्हें पंचायती राज विभाग में भेज दिया गया है।
यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब देशभर में छात्र पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी बड़ी संख्या में छात्र अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।
विनीत जोशी का हुआ तबादला
विनीत जोशी ने 16 जनवरी 2025 को शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग के सचिव पद का कार्यभार संभाला था। अब प्रशासनिक फेरबदल के तहत उन्हें पंचायती राज विभाग में नई जिम्मेदारी दी गई है।
सरकार की ओर से जारी आदेश के अनुसार, शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग की कमान अब नरेश पाल गंगवार संभालेंगे। इसके अलावा केरल कैडर के आईएएस अधिकारी टीके अनिल कुमार को स्कूल शिक्षा विभाग का सचिव नियुक्त किया गया है।
कौन हैं नरेश पाल गंगवार?
Naresh Pal गंगवार 1994 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। शिक्षा मंत्रालय में नई जिम्मेदारी संभालने से पहले वह मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के अंतर्गत पशुपालन एवं डेयरी विभाग में सचिव के पद पर कार्यरत थे।
इससे पहले उन्होंने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव के रूप में भी काम किया है। वहां उन्होंने प्रदूषण नियंत्रण, पर्यावरण संरक्षण और खतरनाक पदार्थों के प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषयों को संभाला।
गंगवार प्रशासनिक अनुभव के साथ-साथ तकनीकी और आर्थिक क्षेत्र की अच्छी समझ रखने वाले अधिकारी माने जाते हैं।
शिक्षा और तकनीकी पृष्ठभूमि
Naresh Pal गंगवार पेशे से इंजीनियर हैं। उन्होंने रुड़की विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री हासिल की है।
इसके बाद उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली से कम्युनिकेशन और रडार इंजीनियरिंग में एमटेक किया। इसके अलावा राजस्थान विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में एमए की डिग्री भी प्राप्त की है।
उनकी तकनीकी शिक्षा और प्रशासनिक अनुभव को देखते हुए उन्हें कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं।
राजस्थान सरकार में संभाले कई अहम पद
नरेश पाल गंगवार ने अपने प्रशासनिक करियर के दौरान राजस्थान सरकार में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है। उन्होंने स्कूल शिक्षा, ऊर्जा, कृषि, उद्योग और सूचना प्रौद्योगिकी जैसे विभागों में प्रमुख सचिव की जिम्मेदारी संभाली।
इसके अलावा वह जयपुर डिस्कॉम के चेयरमैन और राजस्थान राज्य सड़क परिवहन निगम (RSRTC) के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर के पद पर भी रह चुके हैं।
राजस्थान में प्रशासनिक कार्यों के दौरान उन्होंने कई नीतिगत फैसलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सौर ऊर्जा नीति में निभाई अहम भूमिका
Naresh Pal गंगवार ने वर्ष 2010 से 2014 के बीच नेशनल सोलर मिशन के शुरुआती दौर में राजस्थान की सौर ऊर्जा नीति तैयार करने में अहम भूमिका निभाई थी।
राजस्थान देश के प्रमुख सौर ऊर्जा राज्यों में शामिल है और शुरुआती वर्षों में सौर ऊर्जा क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई नीतियों में गंगवार का योगदान महत्वपूर्ण माना जाता है।
पेपर लीक और परीक्षा सुधार के बीच नई जिम्मेदारी
नरेश पाल गंगवार ऐसे समय में शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, जब देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
नीट सहित कई परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के मुद्दे को लेकर छात्र संगठन और विपक्ष सरकार से जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। छात्रों की प्रमुख मांगों में निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था, दोषियों पर सख्त कार्रवाई और परीक्षा प्रक्रिया में सुधार शामिल हैं।
शिक्षा मंत्रालय के सामने अब परीक्षा प्रणाली को मजबूत करने, छात्रों का भरोसा बहाल करने और उच्च शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को प्रभावी तरीके से संभालने की चुनौती होगी।
प्रशासनिक बदलाव पर टिकी नजरें
सरकार द्वारा किए गए इस बदलाव के बाद अब सभी की नजरें नरेश पाल गंगवार के कामकाज पर होंगी। उच्च शिक्षा विभाग देश की प्रमुख परीक्षाओं, विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा नीतियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों का केंद्र होता है।
ऐसे में नई जिम्मेदारी संभालने के बाद गंगवार के सामने शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता और सुधार को लेकर बड़े फैसले लेने की चुनौती रहेगी।
