जन्मदिन विशेष
बहुआयामी गुणों से सुशोभित, चुंबकीय व्यक्तित्व के धनी—डॉ. जैनेंद्र जैन
लिखित: जवाहर डोसी ‘पीयूष महिदपुर’, उज्जैन
भारत जैसे विशाल देश में, जहां जीवन की भागदौड़, गहमा-गहमी और आपाधापी अक्सर मानवीय संवेदनाओं को धुंधला कर देती है, वहां यदि कोई ऐसा व्यक्तित्व मिल जाए जो संपूर्ण जीवन समाजसेवा, मानवता, साहित्य, पत्रकारिता, संस्कृति और संत-धर्म की छत्रछाया में समर्पित कर दे—तो वह व्यक्ति निस्संदेह नमन का पात्र बन जाता है।
ऐसे ही अनुकरणीय और प्रेरणादायक व्यक्तित्व हैं—79 वर्षीय दिगंबर जैन समाज के गौरव, साहित्यकार, पत्रकार और समाजसेवी डॉ. जैनेंद्र जैन, जिनका जीवन संघर्ष, सेवा और सादगी की जीवित मिसाल है।
जन्म और प्रारंभिक जीवन
जन्म: 26 नवंबर 1947, बीना (जिला सागर, म.प्र.)
इंदौर प्रवास: सन् 1948 से निरंतर
चिकित्सा क्षेत्र में प्रवेश: 1965 में क्वालिफाइड होम्योपैथिक चिकित्सक
35 वर्षों तक उन्होंने जूनी इंदौर में क्लीनिक संचालित कर हजारों रोगियों को निस्वार्थ चिकित्सा सेवा प्रदान की। उनके क्लीनिक में पैसे से अधिक प्राथमिकता “मानव सेवा” को दी जाती थी—यही कारण है कि आज भी अनेक लोग उन्हें “जन-चिकित्सक” के रूप में सम्मान देते हैं।
समाजसेवा का अविरल प्रवाह – जरूरतमंदों का सहारा बने डॉ. जैन
वे केवल एक चिकित्सक नहीं, बल्कि समाज के सबसे विश्वसनीय सहायक के रूप में जाने जाते हैं।
असंख्य परिवार, जिनके बच्चे आर्थिक तंगी के कारण पढ़ नहीं पाते थे—मूलचंद जैन पारमार्थिक ट्रस्ट के माध्यम से डॉ. जैन ने उनकी फीस, पुस्तकों और चिकित्सा सहायता की व्यवस्था करवाई।
आज भी उनके घर का द्वार जरूरतमंदों के लिए हर समय खुला रहता है।
लोग किसी असहाय को लेकर आते हैं और कहते हैं—
“चलो, डॉ. जैन साहब के पास चलते हैं… वे रास्ता ज़रूर निकाल देंगे।”
जैन धार्मिक एवं पारमार्थिक योगदान – आदिनाथ जिनालय के निर्माता
डॉ. जैन ने छत्रपति नगर स्थित आदिनाथ दिगंबर जैन धार्मिक एवं पारमार्थिक ट्रस्ट की स्थापना में प्रमुख भूमिका निभाई।
उनका प्रमुख योगदान:
- आदिनाथ जिनालय के भव्य निर्माण में नेतृत्व
- ट्रस्ट के मंत्री, अध्यक्ष और संस्थापक ट्रस्टी के रूप में दीर्घ सेवा
- मंदिर परिसर में “ऋषभ सभागृह” का निर्माण—जिसे समाज आज भी याद करता है
- धार्मिक कार्यक्रमों, संस्कृति संरक्षण और जन-जागरण का सतत कार्य
परवार समाज में सम्मान की परंपरा के जनक
आज जिस “सम्मान परंपरा” पर पूरा जैन परवार समाज गर्व करता है, उसके शिल्पी स्वयं डॉ. जैनेंद्र जैन हैं।
उन्होंने समाज के दो महान विभूतियों—
-
श्री सोनेलाल जैन
-
श्री सुंदरलाल जैन बीड़ीवाले
—का भव्य अमृत महोत्सव एवं अभिनंदन समारोह आयोजित करवाया।
इसमें कई केंद्रीय एवं प्रादेशिक मंत्री उपस्थित रहे।
अभिनंदन पत्र, अभिनंदन स्मारिका और भव्य स्वागत की यह परंपरा समाज में पहली बार डॉ. जैन द्वारा शुरू की गई।
पत्रकारिता—35 वर्षों की स्वर्णिम यात्रा
डॉ. जैन पत्रकारिता के क्षेत्र में भी एक सशक्त और अनुभवी नाम हैं।
प्रमुख उपलब्धियाँ:
- 250+ राष्ट्रीय संपादकों के नाम प्रकाशित पत्र
- 35 वर्ष तक ‘जैन टाइम्स’ हास्य-व्यंग्य बुलेटिन के संपादक एवं प्रकाशक
- इंदौर आकाशवाणी पर दर्जनों रेडियो वार्ताएँ
- सोशल मीडिया पत्रकार के रूप में सक्रिय योगदान
- “सनमती वाणी” मासिक पत्रिका में सहयोगी संपादक
पत्र लेखक संघ, मध्यप्रदेश—संस्थापक अध्यक्ष
पत्र लेखकों को संगठित कर उन्होंने पत्र लेखक संघ, मध्यप्रदेश की स्थापना की और इसके अध्यक्ष बने।
उनके कार्यकाल में अनेक ऐतिहासिक सम्मेलन हुए जिनमें देश के शीर्ष पत्रकार शामिल हुए—
- अरुण शौरी (ज़ेड प्लस सुरक्षा)
- कन्हैयालाल नंदन
- कुलदीप नैयर
- अरुण गांधी
- डॉ. कैलाश नारद
- राजेंद्र माथुर
- कृष्णकुमार अष्टाना
- जनार्दन ठाकुर
- कालिका प्रसाद दीक्षित कुसुमाकर
इन सम्मेलनों में महू, देवास, इंदौर, उज्जैन, भोपाल, ग्वालियर, जावरा, महिदपुर सहित अनेक शहरों के पत्र लेखक शामिल होते थे।
राष्ट्र और समाज के मुद्दों पर मुखर आवाज
डॉ. जैन केवल लेखन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि राष्ट्रीय मुद्दों पर भी उनकी आवाज अत्यंत प्रभावी रही है।
प्रमुख अभियान:
गिरनार तीर्थ के नाम परिवर्तन का प्रखर विरोध
उन्होंने राष्ट्रीय और स्थानीय स्तर पर इस विषय को जोरदार ढंग से उठाया।
आचार्य श्री विद्यासागर जी को “भारत रत्न” देने की माँग
देश में सर्वप्रथम यह प्रस्ताव डॉ. जैन ने रखा।
उन्होंने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर तथा समाचार पत्रों के माध्यम से यह अभियान चलाई—जिसका व्यापक असर पड़ा।
लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड—सेवा यात्रा का सम्मान
“पर्युषण पर्व—2022” में उन्हें लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।
यह सम्मान उनकी दशकों की सेवा, पत्रकारिता, सांस्कृतिक संरक्षण और समाज उत्थान के प्रति समर्पण का प्रतीक है।
विशेष उपलब्धियाँ—एक नजर में
- 35 वर्ष तक जैन टाइम्स (हास्य व्यंग्य बुलेटिन) के संपादक
- आदिनाथ जिनालय और ऋषभ सभागृह निर्माण में निर्णायक भूमिका
- मूलचंद जैन पारमार्थिक ट्रस्ट से हजारों जरूरतमंदों को शिक्षा-चिकित्सा सहायता
- पत्र लेखक संघ, मध्यप्रदेश के संस्थापक अध्यक्ष
- 250 से अधिक राष्ट्रीय संपादकों को पत्र लेखन
- आकाशवाणी पर रेडियो वार्ताएँ
- आचार्य विद्यासागर जी के लिए “भारत रत्न” अभियान
- गिरनार तीर्थ नाम परिवर्तन पर राष्ट्रीय आंदोलन
- लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड (2022)
- सामाजिक संसद (Digambar Jain) में मंत्री व अध्यक्ष पद
- सनमती वाणी पत्रिका में सहयोगी संपादक
प्रमुख राष्ट्रीय हस्तियों के साथ विशेष मुलाकातें
डॉ. जैन को देश की प्रतिष्ठित हस्तियों के साथ काम करने और उनसे मिलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ—
-
राष्ट्रपति ज्ञानी ज़ैलसिंह
-
उपराष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा
-
पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर
-
प्रख्यात पत्रकार अरुण शौरी
-
फिल्म अभिनेता अनुपम खेर
-
हास्य कवि काका हाथरसी
डॉ. जैनेंद्र जैन—एक व्यक्तित्व, अनेक आयाम
उनका जीवन तीन मूल स्तंभों पर आधारित है—
संत-धर्म भक्ति
25 वर्षों से आचार्य विद्यासागर जी और आचार्य विशुद्ध सागर जी के अनन्य भक्त।
समाज सेवा और समर्पण
जरूरतमंदों के लिए घर हमेशा खुला—आज भी उनकी यह पहचान कायम है।
पत्रकारिता और लेखन
तीन दशक का अनुभव, हजारों लेख, बुलेटिन, रेडियो वार्ताएँ और जनजागरण।
जन्मदिन पर विशेष संदेश
डॉ. जैनेंद्र जैन का संपूर्ण जीवन समाज को समर्पित है।
उनका व्यक्तित्व सरल, सेवाभावी, संतुलित, और प्रेरणादायक है।
वे केवल व्यक्ति नहीं, एक संस्था हैं… एक विचार हैं…
एक ऐसी ज्योति हैं, जो निरंतर समाज पथ को आलोकित कर रही है।





