वैश्विक समरसता व्यापार ही नहीं, संस्कृति-संवर्धन का भी आधार — डॉ. भरत शर्मा | Global Indian Organisation | Indo-UK Forum | Make in India | Indian Organic Farming | Ayurveda Export
इंदौर/भोपाल।
भारत और विश्व के बीच बढ़ते आर्थिक, सांस्कृतिक और स्टार्टअप सहयोग को नई दिशा देने वाले महत्वपूर्ण संवाद के अंतर्गत ग्लोबल इंडियन ऑर्गेनाइजेशन और इंडो–यूके फ़ोरम के चेयरमैन राजिंदर तिवारी रियान के नेतृत्व में आए प्रतिनिधिमंडल ने भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के सदस्य डॉ. भरत शर्मा से मुलाक़ात की। यह संवाद भारतीय उत्पादों के वैश्विक विस्तार, जैविक खेती (Indian Organic Farming), आयुर्वेदिक पदार्थों के निर्यात (Ayurveda Export), सांस्कृतिक संवर्धन और Make in India जैसे प्रमुख अभियानों की संभावनाओं पर केंद्रित रहा।
मध्यप्रदेश के भोपाल, सीहोर, ग्वालियर और इंदौर से आए विभिन्न औद्योगिक, स्टार्टअप और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने इस बैठक में भाग लिया, जिसमें भारतीय व्यापारिक क्षमताओं को विश्व बाजार से जोड़ने की दिशा में विस्तृत विचार-विमर्श हुआ।
भारत—विश्व आर्थिक एवं सांस्कृतिक सहयोग का उभरता केंद्र
डॉ. भरत शर्मा ने स्पष्ट कहा कि भारत की वैश्विक भूमिका अब केवल व्यापार विस्तार तक सीमित नहीं है, बल्कि सांस्कृतिक आदान–प्रदान एवं सभ्यताओं के बीच समरसता का महत्वपूर्ण माध्यम भी बन चुकी है। उन्होंने कहा—
“वैश्विक समरसता केवल व्यापार और समृद्धि का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कृति-संवर्धन का सशक्त समन्वयक भी है। भारतीय वेद, शास्त्र, साहित्य, नीतिशास्त्र और अध्यात्म वैश्विक आर्थिक दृष्टि और सांस्कृतिक उन्नयन दोनों के केंद्र में हैं।”
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि भारत तेज गति से विकसित होती अर्थव्यवस्था बन चुका है, जबकि वैश्विक मुद्रास्फीति के 2025 में 4.4% रहने के अनुमान के बीच दुनिया भारतीय बाजार को नए अवसर, निवेश और सांस्कृतिक सहयोग की नजर से देख रही है।
300 से अधिक NRI प्रतिनिधियों का इंदौर आगमन — ग्लोबल भारतीय डायस्पोरा एक मंच पर
राजिंदर तिवारी रियान के नेतृत्व में यूके, यूरोप, अमेरिका, अफ्रीका, हॉलैंड, दुबई और जापान से आए लगभग 300 NRI सदस्यों का समूह इंदौर पहुंचा।
ग्लोबल इंडियन ऑर्गेनाइजेशन का उद्देश्य—
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भारतीय उत्पादों के लिए वैश्विक बाजार निर्माण
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स्टार्टअप और MSME को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्लेटफ़ॉर्म उपलब्ध कराना
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भारतीय आयुर्वेद, योग, जैविक खेती और पारंपरिक ज्ञान को विश्व स्तर पर प्रोत्साहित करना
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सांस्कृतिक संवर्धन और भारतीय मूल्यों का अंतरराष्ट्रीय प्रचार
इन्हीं उद्देश्यों के अंतर्गत यह बैठक भारत–विश्व सहयोग को और सशक्त बनाने की दिशा में एक सार्थक पहल मानी जा रही है।
Make in India और स्टार्टअप इकोसिस्टम ने बढ़ाई भारत की वैश्विक पहचान
डॉ. शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में Make in India अभियान ने भारत को वैश्विक बाज़ार में प्रतिस्पर्धी बनाया है।
भारत में निर्मित उत्पाद अब—
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बड़ी मात्रा में निर्यात हो रहे हैं
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विदेशी निवेशकों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं
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स्टार्टअप और उद्यमिता को नई ऊर्जा दे रहे हैं
उन्होंने बताया कि भारत की जैविक खेती और आयुर्वेद विश्व में स्वास्थ्य, जीवनशैली और पर्यावरण संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।
प्रतिनिधिमंडल ने सराहा—भारत की विकास गति और वैश्विक संभावनाएँ
राजिंदर तिवारी और विभिन्न औद्योगिक प्रतिनिधियों ने कहा कि—
“भारत विश्व में सबसे तेज गति से प्रगति करने वाला देश बन चुका है। व्यापार और संस्कृति दोनों स्तरों पर भारत की क्षमता दुनिया का ध्यान आकर्षित कर रही है।”
इसके साथ ही जैविक कृषि, भारतीय जीवनशैली, पारंपरिक चिकित्सा पद्धति, योग–आयुर्वेद और सांस्कृतिक विविधता को विश्व गुरु बनने की दिशा में भारत की मजबूती बताया गया।
कार्यक्रम के विशिष्ट सहभागी
बैठक में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रमुख प्रतिनिधि मौजूद रहे:
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कंचन किशोर — जनजातीय उत्थान कार्यकर्ता
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आर्थिक प्रगट — स्टार्टअप इंडिया प्रशिक्षक, 5000+ उद्यमियों को प्रशिक्षण
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मोनिका कर्णावत — ग्रामीण विकास विशेषज्ञ
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रीमा सुखीजा — डीन, IT विभाग, IIT इंदौर
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अंकुश बाहेती — फार्मा उद्योगपति
सभी ने भारतीय उद्योग, शिक्षा, तकनीक और संस्कृति को वैश्विक मंच तक ले जाने के लिए सहयोग की सहमति दी।
स्वागत एवं आभार
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स्वागत: डॉ. भरत शर्मा
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आभार: शिक्षाविद् डॉ. राजीव झालानी, प्राचार्य—माहेश्वरी महाविद्यालय एवं अध्यक्ष—निजी महाविद्यालय प्राचार्य संघ
कार्यक्रम में भारत–विश्व सहयोग को मजबूत करने की दिशा में कई संयुक्त प्रस्तावों पर चर्चा हुई।
