दिग्विजय सिंह ने भाजपा विधायक के पुत्र के फरमान के खिलाफ पुलिस को सौंपा एफआईआर के लिए ज्ञापन
इंदौर: मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने भाजपा विधायक मालिनी गौड़ के पुत्र एकलव्य गौड़ द्वारा इंदौर के शीतला माता क्षेत्र में जारी किए गए विवादित फरमान के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए पुलिस को एफआईआर दर्ज करने का ज्ञापन सौंपा।
विधायक पुत्र का विवादित फरमान
पिछले दो हफ्तों से शीतला माता क्षेत्र में एक संवेदनशील मामला लगातार उभर रहा है। पूर्व महापौर और वर्तमान विधायक मालिनी गौड़ के पुत्र एकलव्य गौड़ ने आदेश दिया कि इलाके के हिंदू दुकानदारों को अपने मुस्लिम सेल्समैन को नौकरी से हटाना होगा। इस फरमान का औचित्य यह बताया गया कि मुस्लिम कर्मचारियों की उपस्थिति से “लव जिहाद” जैसे मामले बढ़ सकते हैं और इससे सांप्रदायिक तनाव फैलने की आशंका रहती है।
चूंकि आदेश सत्ताधारी पार्टी के विधायक पुत्र का था, इसलिए दुकानदारों पर इसे मानने का दबाव था। हालांकि इस निर्णय से प्रभावित हुए कर्मचारी और उनके परिवार चिंतित हैं और कई छोटे-छोटे विरोध प्रदर्शन भी हुए, लेकिन उनका असर सीमित रहा।
दिग्विजय सिंह का हस्तक्षेप
इस विवाद पर स्थानीय कांग्रेसियों की प्रतिक्रिया धीमी रही, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने शनिवार को इंदौर का दौरा किया और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के के मिश्रा के साथ सराफा बाजार थाना पहुंचे। वहां उन्होंने पुलिस को ज्ञापन सौंपकर दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की।
इस दौरान स्थानीय विरोध भी देखने को मिला और पुलिस ने दिग्विजय सिंह को शीतला माता के दर्शन से रोक दिया। बावजूद इसके, उन्होंने मजबूती के साथ इस संवेदनशील मामले में कार्रवाई की मांग की।
राजनीतिक और सामाजिक परिप्रेक्ष्य
राजनीति में अक्सर नेता व्यक्तिगत या पार्टी हितों को प्राथमिकता देते हैं, लेकिन दिग्विजय सिंह ने इस मामले में सिद्धांत और जनता के हितों को सर्वोपरि रखा। उन्होंने बिना किसी राजनीतिक दबाव की परवाह किए सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने और गलत कार्रवाई के खिलाफ आवाज उठाई।
भाजपा पहले भी दिग्विजय सिंह पर अल्पसंख्यक समर्थक होने का आरोप लगाती रही है, लेकिन इस मामले में उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि सही और गलत का फैसला केवल जनता और संविधान के हित में किया जाना चाहिए, न कि राजनीतिक लाभ के लिए।
इस कदम के बाद यह साबित हो गया कि क्यों लोग दिग्विजय सिंह को उनका नाम ही नहीं, बल्कि उनकी सिद्धांतनिष्ठ और साहसी छवि के कारण “दिग्विजय” कहते हैं।

