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डिजिटल जनगणना 2027 में जैन धर्म अलग कॉलम न देना होगी ऐतिहासिक भूल | 7 बड़े सवाल सरकार से

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Published On: 15 December 2025
डिजिटल जनगणना 2027 में जैन धर्म अलग कॉलम की मांग
— डिजिटल जनगणना 2027 में जैन धर्म को स्वतंत्र पहचान देने की मांग तेज

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डिजिटल जनगणना 2027 में जैन धर्म अलग कॉलम न देना भारत सरकार की एक बड़ी और ऐतिहासिक भूल साबित हो सकती है। देश में पहली बार पूरी तरह डिजिटल जनगणना कराई जा रही है, ऐसे में धार्मिक पहचान की सटीक गणना और पारदर्शिता बेहद आवश्यक हो जाती है।

Table of Contents

  • डिजिटल जनगणना 2027 क्या है
  • जैन धर्म अलग कॉलम क्यों जरूरी
  • जैन राजनीतिक चेतना मंच की मांग
  • जैन धर्म की ऐतिहासिक और संवैधानिक पहचान
  • अलग कॉलम न होने से क्या नुकसान
  • डिजिटल जनगणना और पारदर्शिता का सवाल
  • सरकार से जैन समाज की मुख्य मांगें
  • निष्कर्ष

डिजिटल जनगणना 2027 क्या है

भारत सरकार वर्ष 2027 में पहली बार पूर्णतः डिजिटल जनगणना कराने जा रही है। यह प्रक्रिया तकनीक आधारित होगी, जिससे आंकड़ों की सटीकता और नीति-निर्माण में मदद मिलेगी।

लेकिन यदि इस डिजिटल जनगणना में जैन धर्म अलग कॉलम के रूप में शामिल नहीं किया गया, तो यह तकनीकी प्रगति अधूरी मानी जाएगी।

जैन धर्म अलग कॉलम क्यों जरूरी

जैन राजनीतिक चेतना मंच के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष काला, मीडिया प्रभारी राजेश जैन दद्दू और जैन एकता मंच के गौरव जैन ने सरकार से स्पष्ट शब्दों में कहा कि—

जैन धर्म कोई पंथ या उप-संप्रदाय नहीं, बल्कि एक स्वतंत्र, प्राचीन और जीवंत धर्म है।

जैन राजनीतिक चेतना मंच की मांग

राजेश जैन दद्दू ने कहा कि अब तक की जनगणनाओं में—

  • कभी जैन समाज को “अन्य” श्रेणी में
  • कभी मिश्रित रूप में दर्शाया गया

जिससे:

  • वास्तविक जनसंख्या सामने नहीं आई
  • सामाजिक व धार्मिक योजनाओं में जैन समाज उपेक्षित रहा
  • नीतिगत निर्णय प्रभावित हुए

जैन धर्म की ऐतिहासिक और संवैधानिक पहचान

गौरव जैन ने कहा कि—

  • जैन धर्म की स्वतंत्र दर्शन परंपरा
  • अलग आचार-संहिता और साधु परंपरा
  • मंदिर, तीर्थ, ग्रंथ और सामाजिक संरचना

भारत के संविधान द्वारा प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के अंतर्गत आती है।

ऐसे में डिजिटल जनगणना 2027 में जैन धर्म अलग कॉलम देना सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है।

अलग कॉलम न होने से क्या नुकसान

यदि जैन धर्म का अलग कॉलम नहीं होगा तो:

  • जैन समाज की सही जनसंख्या दर्ज नहीं होगी
  • शिक्षा, अल्पसंख्यक योजनाओं में नुकसान
  • सामाजिक-धार्मिक अधिकार कमजोर होंगे
  • भविष्य की पीढ़ियों के साथ अन्याय होगा

डिजिटल जनगणना और पारदर्शिता का सवाल

सुभाष काला ने सवाल उठाया—

जब सरकार डिजिटल जनगणना में पारदर्शिता और सटीकता की बात करती है, तो फिर जैन समाज की सटीक गिनती से परहेज़ क्यों?

सरकार से जैन समाज की मुख्य मांगें

जैन राजनीतिक चेतना मंच और अन्य संगठनों की संयुक्त मांग:

  • धर्म कॉलम में “जैन” का स्पष्ट विकल्प
  • स्वतंत्र और पृथक पहचान
  • नीतिगत निर्णयों में न्याय
  • ऐतिहासिक भूल से बचाव

डिजिटल जनगणना 2027 में जैन धर्म अलग कॉलम की मांग

डिजिटल जनगणना 2027 में जैन धर्म को स्वतंत्र पहचान देने की मांग तेज

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