शेल इंडिया ने डीजल में ₹25.01 और पेट्रोल में ₹7.41 प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी की है। जानें नई कीमतें, कच्चे तेल की स्थिति और सरकारी कंपनियों ने दाम क्यों नहीं बढ़ाए।
शेल इंडिया ने बढ़ाए पेट्रोल-डीजल के दाम: डीजल ₹25 लीटर महंगा, अब ₹123.52 हुआ
नई दिल्ली। देश में ईंधन की कीमतों पर एक बार फिर भारी संकट आ गया है। नायरा (Nayara Energy) के बाद अब निजी क्षेत्र की अग्रणी तेल कंपनी शेल इंडिया (Shell India) ने भी पेट्रोल और डीजल के दामों में जबरदस्त बढ़ोतरी का ऐलान कर दिया है। उपभोक्ताओं के लिए यह झटका और भी बड़ा है क्योंकि डीजल तो सीधे ₹25.01 प्रति लीटर महंगा हो गया है।
तेल की बढ़ती कीमतों ने मचाया हाहाकार
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। ब्रेंट क्रूड $100 प्रति बैरल के पार जा चुका है, जिसका सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ रहा है। शेल इंडिया ने बढ़ाए पेट्रोल-डीजल के दाम इस कदर कि आम आदमी की जेब पर भारी बोझ पड़ गया है।
- डीजल में वृद्धि: ₹25.01 प्रति लीटर
- पेट्रोल में वृद्धि: ₹7.41 प्रति लीटर
शहरों के हिसाब से नई कीमतें (Shell India Pumps)
| शहर | सामान्य पेट्रोल (₹/लीटर) | प्रीमियम पेट्रोल (₹/लीटर) | सामान्य डीजल (₹/लीटर) | प्रीमियम डीजल (₹/लीटर) |
|---|---|---|---|---|
| दिल्ली | ~119.85 | ~129.85 | 123.52 | 133.52 |
| बेंगलुरु | 119.85 | 129.85 | 123.52 | 133.52 |
| मुंबई | थोड़ा अधिक (स्थानीय VAT से) | थोड़ा अधिक | थोड़ा अधिक | थोड़ा अधिक |
नोट: राज्यों के VAT और परिवहन लागत के कारन दामों में मामूली अंतर हो सकता है।
सरकारी कंपनियों ने क्यों नहीं बढ़ाए दाम?
जहां शेल इंडिया ने बढ़ाए पेट्रोल-डीजल के दाम, वहीं सरकारी तेल कंपनियाँ (IOCL, BPCL, HPCL) अभी भी कीमतें स्थिर रखे हुए हैं। इसकी मुख्य वजह सरकार का हस्तक्षेप और चुनावी साल में जनता पर अतिरिक्त बोझ न डालने की नीति है। सरकारी कंपनियों को नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजा मिल जाता है, लेकिन निजी कंपनियों को ऐसी कोई सब्सिडी नहीं मिलती।
कच्चे तेल के दाम क्यों बढ़े?
- ईरान पर हमले: अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद तेल की आपूर्ति ठप हो गई है।
- 60% का उछाल: फरवरी के अंत से ब्रेंट क्रूड की कीमतों में लगभग 60 फीसदी का उछाल आया है।
- भारत की निर्भरता: भारत अपनी तेल जरूरतों का 85% आयात करता है, इसलिए कोई भी अंतरराष्ट्रीय उथल-पुथल सीधे दामों पर असर डालती है।
क्या आगे और बढ़ेंगे दाम?
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय हालात सामान्य नहीं होते, कच्चा तेल $100 प्रति बैरल के ऊपर ही रहेगा। अगर सरकारी कंपनियों पर भी घाटा बढ़ा, तो वे भी जल्द ही दाम बढ़ा सकती हैं। फिलहाल, निजी कंपनियों के पंप पर पेट्रोल और डीजल भरना काफी महंगा हो गया है।
